पाकिस्तान: जारी सियासी विवाद में खुला नया मोर्चा, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आए आमने-सामने
सत्ताधारी गठबंधन के सूत्रों ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति संविधान का पालन करने के बजाय दलगत निष्ठा के तह काम कर रहे हैं। वे शाहबाज शरीफ सरकार के कामकाज में रोड़ा डाल रहे हैं, जिससे आगे चल कर संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है...
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पाकिस्तान में जारी सियासी खींचतान में अब एक नया मोर्चा खुल गया है। अब राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और शाहबाज शरीफ सरकार आमने-सामने आ गए हैं। पाकिस्तान में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं। अल्वी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से जुड़े रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने देश में ‘सरकार बदलने के लिए रची गई साजिश’ की जांच के लिए उच्च अधिकार प्राप्त न्यायिक आयोग के गठन का समर्थन कर दिया।
उधर शाहबाज शरीफ सरकार की तरफ से आरोप लगाया गया कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह को मानने से इनकार कर रहे हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के तहत वे ऐसा नहीं कर सकते। संघीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद ऊर्जा मंत्री खुर्रम दास्तगीर खान ने कहा- ‘यह संभव नहीं है कि राष्ट्रपति सिर्फ उसे स्वीकार करें, जो उन्हें पसंद है और जो पसंद नहीं है, उसे ठुकरा दें।’ शाहबाज शरीफ सरकार ने पंजाब प्रांत के गवर्नर को बर्खास्त करने की सिफारिश की है। लेकिन अब तक राष्ट्रपति ने उस पर दस्तखत नहीं किए हैं।
राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस को लिखा इमरान ने खत
इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के पिछले 30 अप्रैल को भेजे पत्र पर आरिफ अल्वी ने अपनी राय बता दी है। इमरान खान ने राष्ट्रपति के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल को भी पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने पीटीआई सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए ‘रची गई साजिश’ की न्यायिक आयोग से जांच कराने की मांग की थी। इस पत्र के जवाब में राष्ट्रपति ने कहा है कि इस मामले के परिस्थितिजन्य सबूतों को दर्ज किया जाना चाहिए और उनकी जांच होनी चाहिए। तभी कोई तार्किक नतीजा निकल सकेगा।
सत्ताधारी गठबंधन के सूत्रों ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति संविधान का पालन करने के बजाय दलगत निष्ठा के तह काम कर रहे हैं। वे शाहबाज शरीफ सरकार के कामकाज में रोड़ा डाल रहे हैं, जिससे आगे चल कर संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान खान के पत्र के जवाब में राष्ट्रपति अल्वी ने जो कहा है, वह साफ तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री के आरोपों का समर्थन है। अल्वी ने कहा कि उन्होंने अमेरिका स्थित पूर्व पाकिस्तानी राजदूत असद माजिद खान का कूटनीतिक पत्र पढ़ा है। इसी पत्र में दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू के संदेश का जिक्र था। लू ने अविश्वास प्रस्ताव और उसके पारित होना या ना होने के परिणामों का उल्लेख भी किया था।
लंदन जाने के फैसले पर विवाद
इस बीच प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के एक दस सदस्यों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को लेकर लंदन जाने के फैसले से एक नया विवाद खड़ा हुआ है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि ये दल वहां पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिलने जा रहा है। उनसे देश के अंदर चल रही राजनीतिक घटनाओं पर चर्चा होगी।
विश्लेषकों का कहना है कि इससे सरकार विरोधी समूहों के इस आरोप को बल मिलेगा कि नवाज शरीफ लंदन में बैठ कर रिमोट कंट्रोल से पाकिस्तान का शासन चला रहे हैं। इमरान खान ने मंगलवार को झेलम में एक विशाल जन सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पूरा मंत्रिमंडल जनता के खर्च पर एक भ्रष्ट और सजायाफ्ता व्यक्ति से मिलने लंदन जा रहा है।