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म्यांमार: खुद को मिल रही चुनौती खत्म करने के लिए सैनिक शासन ने सुनाई सू ची को सजा

Tue, 07 Dec 2021 06:56 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 07 Dec 2021 06:56 PM IST
सार

आंग सान सू ची अभी कहां है, यह भी किसी को नहीं मालूम है। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ- आसियान के एक विशेष दूत की म्यांमार यात्रा के दौरान उसे सू ची से मिलने की इजाजत नहीं दी गई थी...

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A Myanmar military court has sentenced National League for Democracy (NLD) leader Aung San Suu Kyi to four years in prison
आंग सान सू - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

म्यांमार के सैनिक शासकों ने अपने लिए सियासी चुनौती को खत्म करने दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया है। म्यांमार की सैनिक अदालत ने नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) की नेता आंग सान सू ची को चार साल कैद सुना दी है। सू ची देश की सबसे लोकप्रिय नेता हैं। 1990 के दशक में भी सैनिक शासन के विरोध की प्रतीक बनी रही थीं। सैनिक शासन खत्म होने के बाद हुए दो आम चुनावों में उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला। पिछले साल के चुनाव में भी उनकी पार्टी जीती, जिसके सत्ता संभालने से कुछ ही घंटों पहले बीते एक फरवरी को सेना ने सत्ता अपने हाथ में ले ली थी।

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वॉकी-टॉकी रखने के इल्जाम

फरवरी में तख्ता पलट के बाद से सेना ने सू ची पर अनगिनत मुकदमे थोप दिए। उनमें से पहले मामले में फैसला सोमवार को सुनाया गया। इस मुकदमे में सू ची पर प्राकृतिक आपदा कानून तोड़ने के लिए लोगों को उकसाने का आरोप लगाया गया था। पर्यवेक्षकों का कहना है कि बाकी कई मामलों में आरोप इससे भी अधिक गंभीर हैं। इनमें सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन और गैर कानूनी ढंग से वॉकी-टॉकी रखने के इल्जाम भी हैं। आम समझ है कि उनमें भी सू ची को सजा सुनाई जाएगी। इन सभी मामलों में सजा के साथ सेना 76 वर्षीया सू ची को जीवन भर कैद में रखने का इंतजाम कर लेगी।

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पश्चिमी मीडिया की रिपोर्टों में इस बात का जिक्र किया गया है कि सू ची के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही कैसे चली, इस बारे में म्यांमार के लोगों या बाकी दुनिया को कुछ नहीं मालूम है। सू ची के वकीलों ने सारे आरोपों को बेतुका बताया था। 1990 में जब चुनाव में जीती सू ची की पार्टी को सेना ने सत्ता सौंपने से इनकार कर दिया, तब भी सू ची को गिरफ्तार किया गया था। तब उन्हें 15 साल तक उनके घर में नजरबंद रखा गया। यह पता नहीं चल सका है कि अब सजा होने के बाद सू ची को उनके घर पर ही रखा जाएगा या किसी जेल में डाल दिया जाएगा।

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सू ची से मिलने की इजाजत नहीं

आंग सान सू ची अभी कहां है, यह भी किसी को नहीं मालूम है। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ- आसियान के एक विशेष दूत की म्यांमार यात्रा के दौरान उसे सू ची से मिलने की इजाजत नहीं दी गई थी।


म्यांमार में राजनीतिक बंदियों की मदद के लिए बने संगठन- एसिस्टैंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स के मुताबिक बीते फरवरी में तख्ता पलटे जाने के बाद सेना ने दस हजार छह सौ से ज्यादा लोगों को जेल में डाला है। उसने हर प्रकार के विरोध प्रदर्शन का सख्ती से दमन किया है। इस दौरान सैनिक कार्रवाई में 1,303 लोगों की मौत हुई है। इसके बावजूद सेना देश में शांति कायम करने में नाकाम रही है। इस बीच देश की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य एवं शिक्षा के तंत्र भी लगभग ढह गए हैँ।


संयुक्त राष्ट्र के मानव अधिकार संबंधी विशेष प्रतिनिधि रह चुके यांगही ली ने पिछले महीने कहा था कि देश में खाद्य पदार्थों और दवाओं की सप्लाई भी बाधित है, जिससे भुखमरी जैसी हालत पैदा हो गई है।

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