Afghanistan: तालिबान विरोधी गुटों के सिर उठाने से बढ़ा गृह युद्ध का अंदेशा
हाल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान आईएसआईएस-के की तुलना में एनआरएफ को अपने लिए ज्यादा बड़ा खतरा मानता है। आईएसआईएस-के कट्टर इस्लामी संगठन है, जो लगातार तालिबान के ठिकानों पर हमले करता रहा है...
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अफगानिस्तान में फिर गृह युद्ध जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। तालिबान शासन के खिलाफ गुटों ने लड़ाई तेज कर दी है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान विरोधी गुट छापामार स्टाइल में हमले कर रहे हैं। खासकर पंजशीर घाटी क्षेत्र में ऐसे हमलों में हाल में इजाफा हुआ है। यह इलाका काबुल से तकरीबन 100 किलोमीटर दूर है।
विशेषज्ञों के मुताबिक नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (एनआरएफ) नाम से बने नए तालिबान विरोधी गुट को अभी तक ज्यादा कामयाबी नहीं मिली है। लेकिन इसकी वजह से तालिबान के लिए मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। हाल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान आईएसआईएस-के की तुलना में एनआरएफ को अपने लिए ज्यादा बड़ा खतरा मानता है। आईएसआईएस-के कट्टर इस्लामी संगठन है, जो लगातार तालिबान के ठिकानों पर हमले करता रहा है।
एनआरएफ में कई हथियारबंद संगठन शामिल
वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक एनआरएफ में कई हथियारबंद संगठन शामिल हैं। इन संगठनों में पूर्व अफगान सेना में काम कर चुके सैनिक भी हैं। एनआरएफ का नेतृत्व अहमद मसूद कर रहा है, जो तालिबान विरोधी मशहूर सरदार अहमद शाह मसूद का बेटा है। अहमद शाह मसूद ने पंजशीर घाटी को अपना केंद्र बना कर 1980 के दशक में सोवियत फौजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। बाद में 1990 के दशक में उसने तालिबान को भी कड़ी चुनौती दी थी।
पंजशीर घाटी में मुख्य रूप से ताजिक नस्लीय समूह के कबीले रहते हैं। तालिबान मोटे तौर पर पश्तून समुदाय का संगठन है। पिछले महीने एनआरएफ ने कहा था कि उसने तालिबान के खिलाफ नई जंग छेड़ दी है। लेकिन तालिबान ने इसका खंडन किया था। तालिबान ने दावा किया था कि एनआरएफ का कोई हमला उस पर नहीं हुआ है। मगर स्थानीय लोगों के मुताबिक एनआरएफ के हमले हाल में तेज हुए हैं।
हाल की लड़ाई के कारण 40 वर्षीय किसान मूसा खलील पंजशीर घाटी छोड़ कर काबुल आ गए हैं। उन्होंने बताया कि उस क्षेत्र में तालिबान और एनआरएफ के बीच भीषण लड़ाई के कारण उनकी तरह बड़ी संख्या में दूसरे लोग भी विस्थापित हुए हैं। तालिबान ने कई घरों पर जबरन कब्जा करते हुए उन्हें सुरक्षा चौकियों में तब्दील कर दिया है।
कई छोटे गुट हुए सक्रिय
अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एनआरएफ ने बदखशान, बघलान, जोव्जजान, खुंदुज, पंजशीर, तखर और समनगान प्रांतों में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसकी वजह से वहां तालिबान ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है।
खबरों के मुताबिक एनआरएफ के अलावा भी कई छोटे गुट उस इलाके में सक्रिय हो गए हैं। इन सबका निशाना तालिबान है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते मई के मध्य में अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति अब्दुल राशिद दोस्तम ने तुर्किये के शहर अंकारा में अफगानिस्तान से निष्कासित तकरीबन 40 लोगों के साथ बैठक की थी। उस बैठक में एनआरएफ का अहमद मसूद भी शामिल हुआ था। उस बैठक में तालिबान के खिलाफ संघर्ष चलाने के लिए हाई काउंसिल ऑफ नेशनल रेजिस्टेंस अगेंस्ट तालिबान नाम का मोर्चा बनाने का फैसला हुआ। इसका मकसद तालिबान विरोधी सभी गुटों को एकजुट करना है।