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Victory Day : द्वितीय विश्व युद्ध की 75वीं बरसी, आज ही जर्मनी ने किया था आत्मसमर्पण

Fri, 08 May 2020 10:09 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 08 May 2020 10:09 PM IST
सार

  • आठ मई 1945 को जर्मनी ने औपचारिक रूप से यूरोप से सामने आत्मसमर्पण कर दिया था
  • जर्मन तानाशाह हिटलर के आत्महत्या करने के एक सप्ताह बाद जर्मनी ने टेक दिए थे घुटने
  • द्वितीय विश्व युद्ध में 10 करोड़ से भी ज्यादा सैनिकों ने हिस्सा लिया था, सभी देश थे शामिल

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8 May victory day in Europe 75th Anniversary of second World War ending
आठ मई 1945 को विक्ट्री डे पर लंदन में उमड़ी भीड़ - फोटो : विकीपीडिया

विस्तार

आठ मई की तारीख यूरोप के इतिहास में बहुत महत्व रखती है। आज के ही दिन जर्मनी ने  यूरोप के आगे आत्मसमर्पण किया था और द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत हो गया था। आज द्वितीय विश्व युद्ध के अंत की 75वीं वर्षगांठ है। जर्मनी के तानाशाह हिटलर के आत्महत्या करने के एक सप्ताह बाद आठ मई को जर्मनी के तत्कालीन जनरल आल्फ्रेड योडल ने बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण के कागजों पर दस्तखत कर दिए थे। तब से यूरोपीय देश इस तारीख को विक्टरी डे ( Victory Day या VE Day) के रूप में मनाते हैं। 

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आठ मई 1945 को नाजी जर्मनी ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया था और लाखों लोगों की जान लेने वाले द्वितीय विश्वयुद्ध पर विराम लग गया था। हालांकि, विश्व युद्ध के समापन की औपचारिक घोषणा होने तक रूस में अगला दिन हो चुका था इसलिए वहां नौ मई को जश्न मनाया गया। द्वितीय विश्व युद्ध या 'वर्ल्ड वार 2' एक ऐसी जंग थी जिसमें पूरी दुनिया ने भाग लिया था। इसमें सभी बड़े राष्ट्र शामिल थे। इस युद्ध में 10 करोड़ से भी ज्यादा सैनिकों ने हिस्सा लिया था जिसके चलते इसे इतिहास सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है। 

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कोरोना वायरस के चलते सभी आयोजनों पर लगी है रोक

बता दें कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते, द्वितीय विश्व युद्ध में यूरोपीय देशों की जीत से संबंधित समारोह पहले ही रद्द किए जा चुके हैं। हालांकि, प्रिंस चार्ल्स और उनकी पत्नी कैमिला ने युद्ध के दौरान अपनी सेवाएं देने वाली महिलाओं और पुरुषों की याद में स्थानीय समयानुसार सुबह 11 बजे मौन रखकर श्रद्धाजंलि दी। वहीं महारानी एलिजाबेथ-द्वितीय शुक्रवार शाम इस संबंध में राष्ट्र को संबोधित करेंगी।

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दो भागों में बंटी हुई थी दुनिया : मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र

इस लड़ाई में एक ओर इंग्लैंड, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ (रूस) और फ्रांस आदि थे तो दूसरी ओर जर्मनी, इटली और जापान आदि देश थे। इनमें अमेरिका, सोवियत संघ, इंग्लैंड आदि का साथ देने वाले देश मित्र देश कहलाए तो जर्मनी, इटली व जापान की ओर से लड़ने वाले देशों को धुरी राष्ट्र कहा गया। 

एक सितंबर 1939 को हुई थी द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत

एक सितंबर को जर्मनी द्वारा पोलैंड पर हमला करने के साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हो गई थी। इसके बाद इंग्लैंड और फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी। हालांकि, एक सितंबर 1939 से नौ अप्रैल 1940 तक के युद्ध को नकली युद्ध कहा जाता है क्योंकि इस युद्ध की स्थिति बनी तो थी लेकिन कोई युद्ध हुआ नहीं था। नौ अप्रैल 1040 को जर्मनी ने नार्वे और डेनमार्क पर हमला कर उन पर कब्जा कर लिया। 

जून के अंत तक बेल्जियम और हॉलैंड के साथ-साथ फ्रांस ने भी जर्मनी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाज जर्मनी की योजना इंग्लैंड को अपने अधिकार में लेने की थी, लेकिन उसके खिलाफ जर्मनी को सफलता नहीं मिली। हालांकि, जून 1941 में जर्मनी ने सोवियत संघ पर हमला किया और एक बड़े क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया लेकिन सोवियत संघ ने मॉस्को की ओर से जर्मन सेना पर हमला किया और उसे वापस लौटने को मजबूर कर दिया। 

1944 में इटली ने किया आत्मसमर्पण

साल 1944 में इटली ने आत्मसमर्पण किया, इससे जर्मनी को तगड़ा झटका लगा। उधर स्टालिनग्राद के की लड़ाई में सोवियत सेना ने जर्मनी को हरा दिया और बर्लिन तक पहुंच गई। खुद को चारों ओर से घिरा देखकर जर्मन तानाशाह हिटलन ने आत्महत्या कर ली और इसके एक सप्ताह बाद जर्मनी ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया और विश्व युद्ध समाप्त हो गया। 

हालांकि, जापान की ओर से लड़ाई अब भी जारी थी। अमेरिका ने इसमें हस्तक्षेप करते हुए छह और नौ अगस्त को क्रमश: जापान के दो प्रमुख शहरों हिरोशमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरा कर जापान को आत्मसमर्पण के लिए विवश कर दिया था। माना जाता है कि अमेरिका ने परमाणु बम गिराने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि जापान उसे बहुत नुकसान पहुंचा चुका था और बिना शर्त आत्मसमर्पण को राजी नहीं था।  

द्वितीय विश्व युद्ध में 87 हजार भारतीय हुए थे शहीद

द्वितीय विश्व युद्ध में भारत का योगदान भी था। तब भारत में ब्रिटिश राज था, ऐसे में भारतीयों ने यूरोप की ओर से लड़ाई में भाग लिया था। इस युद्ध में करीब 87 हजार भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। ब्रिटेन में शुक्रवार को द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद होने वाले भारतीयों को भी दो मिनट का मौन रख कर श्रृद्धांजलि दी गई। उस दौरान भारतीय सेना में लगभग 25 लाख जवान थे। यह संख्या सेना के इतिहास में सर्वाधिक है।

कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन (सीडब्ल्यूजीसी) ने कहा, 'राष्ट्रमंडल देशों के समुदायों और पूरी दुनिया के लाखों लोगों ने द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सशस्त्र बलों में अपनी सेवाएं दीं और हजारों लोगों ने भूमि, समुद्र और वायु क्षेत्र के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।' कमीशन ने इस संबंध में एक डिजिटल अभियान चलाते हुए लोगों से शहीदों का स्मरण करने की अपील की।

कमीशन ने कहा, 'भारतीयों ने भारत, बर्मा, मलेशिया, सिंगापुर, हांगकांग, मध्यपूर्व, उत्तरी अफ्रीका, यूनान, इटली समेत कई देशों में अपनी सेवाएं दीं। सीडब्लयूजीसी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों में सेवाएं देते हुए शहीद हुए 87 हजार से अधिक लोगों को याद करता है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपनी सेवाएं देते हुए प्राण न्यौछावर करने वालों को कभी न भुलाया जाए।'

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