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Pakistan Clashes: उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में खूनी संघर्ष; आठ दिन से चल रही झड़प में 50 लोग मारे गए, 120 घायल

Sat, 28 Sep 2024 10:17 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, पेशावर
पीटीआई, पेशावर Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 28 Sep 2024 10:17 PM IST
सार

कुर्रम के डिप्टी कमिश्नर जावेदउल्लाह महसूद ने बताया कि संघर्ष तूरी जनजाति और बंगश जनजाति के बीच चल रहा है। शनिवार को आदिवासी बुजुर्गों की मदद से हिंसा प्रभावित इलाकों में अस्थायी संघर्ष विराम लागू किया गया।

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50 killed, 120 injured in eight-day clashes between warring tribes in northwest Pakistan
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अफगानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिमी कुर्रम जिले में पिछले आठ दिनों में एक जमीन के टुकड़े को लेकर दो जनजातियों के बीच खूनी संघर्ष चल रहा है। यहां बीते आठ दिनों से जारी झड़पों में कम से कम 50 लोग मारे गए और 120 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने शनिवार को बताया कि बोशेहरा के ऊपरी कुर्रम इलाके में जमीन विवाद को लेकर झड़पें शुरू हुईं। इसके बाद गोलीबारी भी हुई।

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कुर्रम के डिप्टी कमिश्नर जावेदउल्लाह महसूद ने बताया कि संघर्ष तूरी जनजाति और बंगश जनजाति के बीच चल रहा है। शनिवार को आदिवासी बुजुर्गों की मदद से हिंसा प्रभावित इलाकों में अस्थायी संघर्ष विराम लागू किया गया। कुर्रम जिले में स्थिति अब नियंत्रण में आ गई है। महसूद ने बताया कि पिवार, तारी मंगल, कुंज अलीजई, मुकबिल और पारा चमकनी करमन सहित जिले के सभी इलाकों में झड़पें बंद हो गई हैं। उन्होंने बताया कि इलाकों में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।
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पुलिस के मुताबिक, झड़पों में स्वचालित हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया। लड़ाई की वजह से पाराचिनार-पेशावर मुख्य सड़क और पाक-अफगान खारलाची सीमा बंद हो गई। इससे परिवहन और आवाजाही बाधित हुई। सड़क नाकाबंदी की वजह से भोजन, ईंधन और दवाओं सहित आवश्यक वस्तुओं की कमी की स्थिति बन गई है। इससे आसपास के इलाकों में रहने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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कहां-कहां संघर्ष?
संघर्ष जिले के बालिशखेल, सद्दा, खार कल्ले, पीवर और मकबल जैसे क्षेत्रों में फैल गई है। यह अफगानिस्तान के खोस्त, पक्तिया, लोगर और नंगरहार प्रांतों की सीमा पर हैं। इसे आईएसआईएस और पाकिस्तान तालिबान का गढ़ माना जाता है।

क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील
तूरी जनजाति के आदिवासी नेता जलाल हुसैन, सैयद तजम्मुल हुसैन और बंगश जनजाति के नेता मलिक फखर जमान और हाजी सलीम खान ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने में जन भागीदारी के महत्व पर जोर दिया है। नेशनल असेंबली के सदस्य हामिद हुसैन ने जिले के लोगों से शांति बनाए रखने और क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त करने का आग्रह करते हुए कहा कि संघर्ष केवल विनाश की ओर ले जाते हैं। 


जुलाई में 50 लोग मारे गए थे
जुलाई में इसी क्षेत्र में बोशेहरा और मालीखेल जनजातियों के बीच सप्ताह भर चली झड़पों में कम से कम 50 लोग मारे गए थे और 225 से अधिक घायल हो गए थे। खैबर पख्तूनख्वा के उत्तर-पश्चिमी प्रांत में एक पहाड़ी क्षेत्र कुर्रम अफगानिस्तान के साथ एक लंबी सीमा साझा करता है। यहां पहले भी जनजातियों और धार्मिक समूहों के बीच घातक संघर्ष होते रहे हैं।

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