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सऊदी में मृत्युदंड पाए 33 शिया मुस्लिम, अमेरिकी डेमोक्रेट चिंतित
Fri, 26 Apr 2019 04:52 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 26 Apr 2019 04:52 AM IST
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मानवाधिकार संस्था एचआरडब्ल्यू ने कहा है कि हाल ही में सऊदी अरब के भीतर आतंकवाद के दोषी जिन 37 लोगों को मौत की सजा दी गई है उनमें 33 लोग शिया मुस्लिम रहे हैं। जबकि इसी घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चुप्पी के बाद डेमोक्रेट सांसदों ने सामूहिक मृत्युदंड पर चिंता जताई है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इस मामले में सिर्फ अप्रत्यक्ष रूप से चिंता व्यक्त की है।
अमेरिका के डेमोक्रेट सांसदों ने सऊदी अरब के साथ अमेरिका के रिश्तों पर पुनर्विचार का आव्हान किया है। सऊदी अरब ने मंगलवार को 37 नागरिकों का सिर धड़ से अलग किया गया जबकि एक व्यक्ति को मौत के बाद सूली पर चढ़ाया गया। डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से अमेरिका में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के दावेदार सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा कि सामूहिक मौत की सजा यह बताती है कि अमेरिका के लिए सऊदी अरब में निरंकुश शासन के साथ संबंधों को फिर से परिभाषित करना कितना जरूरी हो गया है। अमेरिका को यह दिखाना चाहिए कि सऊदी अरब मानवाधिकारों का उल्लंघन जारी नहीं रख सकता।
उधर, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी मृत्युदंड पाने वाले अधिकांश लोगों के शिया समुदाय से होने का दावा किया है। जबकि एचआरडब्ल्यू के एडम कुगल ने कहा, हम जानते हैं कि मौत की सजा पाने वाले 33 लोग शिया मुसलमान थे और उन पर सांप्रदायिक दंगे भड़काने का आरोप था। लेकिन ऐसे आरोप अकसर सुन्नी बहुल सऊदी अरब में शिया कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगाए जाते रहे हैं।
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आरोपियों पर फर्जी मुकदमे चले : एमनेस्टी
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि सऊदी अरब में जिन 37 लोगों को मौत की सजा दी गई उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाया गया। इनमें से अधिकांश शिया समुदाय के थे जिन्हें यातनाएं देकर उनसे बलपूर्वक लिए बयानों के आधार पर कार्रवाई की गई। संस्था के मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ लिन मालौफ ने कहा, यह कार्रवाई न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है बल्कि इससे पता चलता है कि सऊदी अरब किस तरह से शियाओं का असंतोष दबाने के लिए मौत की सजा का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।
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अमेरिका के डेमोक्रेट सांसदों ने सऊदी अरब के साथ अमेरिका के रिश्तों पर पुनर्विचार का आव्हान किया है। सऊदी अरब ने मंगलवार को 37 नागरिकों का सिर धड़ से अलग किया गया जबकि एक व्यक्ति को मौत के बाद सूली पर चढ़ाया गया। डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से अमेरिका में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के दावेदार सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा कि सामूहिक मौत की सजा यह बताती है कि अमेरिका के लिए सऊदी अरब में निरंकुश शासन के साथ संबंधों को फिर से परिभाषित करना कितना जरूरी हो गया है। अमेरिका को यह दिखाना चाहिए कि सऊदी अरब मानवाधिकारों का उल्लंघन जारी नहीं रख सकता।
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उधर, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी मृत्युदंड पाने वाले अधिकांश लोगों के शिया समुदाय से होने का दावा किया है। जबकि एचआरडब्ल्यू के एडम कुगल ने कहा, हम जानते हैं कि मौत की सजा पाने वाले 33 लोग शिया मुसलमान थे और उन पर सांप्रदायिक दंगे भड़काने का आरोप था। लेकिन ऐसे आरोप अकसर सुन्नी बहुल सऊदी अरब में शिया कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगाए जाते रहे हैं।
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एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि सऊदी अरब में जिन 37 लोगों को मौत की सजा दी गई उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाया गया। इनमें से अधिकांश शिया समुदाय के थे जिन्हें यातनाएं देकर उनसे बलपूर्वक लिए बयानों के आधार पर कार्रवाई की गई। संस्था के मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ लिन मालौफ ने कहा, यह कार्रवाई न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है बल्कि इससे पता चलता है कि सऊदी अरब किस तरह से शियाओं का असंतोष दबाने के लिए मौत की सजा का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।