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छह माह से समुद्र में फंसे रोहिंग्या इंडोनेशिया पहुंचे, करीब 300 शरणार्थियों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे
Tue, 08 Sep 2020 01:46 AM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 08 Sep 2020 01:46 AM IST
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समुद्र में फंसे रोहिंग्या (Flle photo)
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पिछले छह माह से समुद्र में फंसे करीब 300 रोहिंग्या शरणार्थी सोमवार को इंडोनेशिया के एसेह प्रांत में पहुंच गए। अधिकारियों ने बताया कि इन शरणार्थियों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं जिन्हें स्थानीय मछुआरों ने लोखसेमाव के तट से कुछ किलोमीटर दूरी पर देखा था।
उप-जिला सैन्य कमांडर रोनी महेंद्रा ने बताया कि स्थानीय निवासियों के मुताबिक सभी रोहिंग्या एक नाव से उजोंग ब्लांग समुद्र तट पर पहुंचे। जब तक वहां अधिकारी पहुंचते तब तक वह तीन विभिन्न समूहों में बंट चुके थे। महेंद्रा ने कहा, हमने उन्हें समझाया है और स्थानीय लोगों से उनकी मदद करने को कहा है। इन रोहिंग्या शरणार्थियों में 181 महिलाएं, 100 पुरुष और 14 बच्चे हैं और स्थानीय पुलिस, सैन्य अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी इनकी मदद कर रहे हैं। इसी वर्ष जून में इंडोनेशिया के मछुआरों को एक नाव पर रहते 94 रोहिंग्या का पता चला था।
म्यांमार से हुआ पलायन
दरअसल, बौद्ध बाहुल्य म्यांमार में सैनिक कार्रवाई के बाद कई लाख मुस्लिमों का वहां से पलायन हुआ। लगभग दस लाख रोहिंग्या बांग्लादेश में शरण लिए हुए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि बांग्लादेश में कठिन परिस्थितियों से परेशान होकर बड़ी संख्या में रोहिंग्या समुद्र तट वाले देशों की तरफ भाग रहे हैं।
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उप-जिला सैन्य कमांडर रोनी महेंद्रा ने बताया कि स्थानीय निवासियों के मुताबिक सभी रोहिंग्या एक नाव से उजोंग ब्लांग समुद्र तट पर पहुंचे। जब तक वहां अधिकारी पहुंचते तब तक वह तीन विभिन्न समूहों में बंट चुके थे। महेंद्रा ने कहा, हमने उन्हें समझाया है और स्थानीय लोगों से उनकी मदद करने को कहा है। इन रोहिंग्या शरणार्थियों में 181 महिलाएं, 100 पुरुष और 14 बच्चे हैं और स्थानीय पुलिस, सैन्य अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी इनकी मदद कर रहे हैं। इसी वर्ष जून में इंडोनेशिया के मछुआरों को एक नाव पर रहते 94 रोहिंग्या का पता चला था।
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म्यांमार से हुआ पलायन
दरअसल, बौद्ध बाहुल्य म्यांमार में सैनिक कार्रवाई के बाद कई लाख मुस्लिमों का वहां से पलायन हुआ। लगभग दस लाख रोहिंग्या बांग्लादेश में शरण लिए हुए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि बांग्लादेश में कठिन परिस्थितियों से परेशान होकर बड़ी संख्या में रोहिंग्या समुद्र तट वाले देशों की तरफ भाग रहे हैं।
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