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पाकिस्तान : राज कपूर और दिलीप कुमार के पुश्तैनी घर खरीदने के लिए जारी हुए 2.30 करोड़

Sat, 22 May 2021 06:30 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी,पेशावर।
एजेंसी,पेशावर। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 22 May 2021 06:30 AM IST
सार

  • हवेलियों को खरीदकर संग्रहालय में किया जाएगा तब्दील
  • 2014 में तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार ने इन्हें राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था।

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2.30 crores rs released to buy ancestral houses of Raj Kapoor and Dilip Kumar
राज कपूर और दिलीप कुमार - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने अभिनेता राज कपूर और दिलीप कुमार की पुश्तैनी हवेलियां खरीदने के लिए 2.30 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं। पेशावर स्थित इन हवेलियों को खरीदकर संग्रहालय में तब्दील किया जाएगा।

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प्रांत के पुरातत्व विभाग ने यह राशि पेशावर के उपायुक्त को सौंपी है। यह कदम दोनों हवेलियों के मौजूदा मालिकों को खरीद के लिए अंतिम नोटिस जारी करने के बाद उठाया गया है।
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पुरातत्व निदेशक अब्दुस समद ने बताया कि सरकार दोनों घरों का कब्जा लेने के बाद ढांचे को उनके पुराने स्वरूप में बहाल करने का काम शुरू करेगी। इसके बाद सरकार इन हवेलियों को संरक्षित करेगी, ताकि लोग फिल्म उद्योग में दिलीप कुमार और राजकपूर के योगदान के बारे में जान सके।
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राज कपूर के घर की कीमत डेढ़ करोड़ तय और दिलीप कुमार की हवेली 80 लाख रुपये की
खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने 6.25 मरला में बने राज कपूर के घर के लिए 1.50 करोड़ और चार मरला में निर्मित दिलीप कुमार की हवेली की कीमत 80 लाख रुपये तय की है। मरला भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में जमीन की पैमाइश का पुराना मापक है। एक मरला 272.25 वर्ग फुट के बराबर माना जाता है।

मालिक ने मांगे थे 20 करोड़
राज कपूर के घर के मौजूदा मालिक अली कादिर ने सरकार से 20 करोड़ तो दिलीप की हवेली के मालिक गुल रहमान मोहम्मद ने 3.50 करोड़ रुपये मांगे थे। राज कपूर का पैतृक निवास पेशावर के किस्सा ख्वानी बाजार में है, जिसे उनके दादा दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने वर्ष 1918 से 1922 के बीच कराया था। दिलीप का 100 साल पुराना पुश्तैनी मकान भी इसी इलाके में है।


इमारतों को तोड़कर मॉल बनाने की थी तैयारी
2014 में तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार ने इन्हें राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था। इन दोनों ऐतिहासिक इमारतों के मालिकों ने कई बार इसे तोड़कर मॉल या प्लाजा बनाने की कोशिश की, लेकिन ऐसे सभी प्रयासों को रोक दिया गया क्योंकि पुरातत्व विभाग इनके ऐतिहासिक महत्व के कारण इन्हें संरक्षित करना चाहता था।

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