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चीन समेत 15 देशों के बीच विश्व का सबसे बड़ा व्यापार समझौता, भारत नहीं है शामिल

Sun, 15 Nov 2020 06:48 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हनोई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हनोई Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 15 Nov 2020 06:48 PM IST
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15 asian countries sign china backed rcep trade pact but India is absent
चीन समेत 15 देशों के बीच होगा दुनिया का सबसे बड़े व्यापारिक समझौता - फोटो : All Indian Radio

चीन और 14 अन्य देशों ने विश्व के सबसे बड़े व्यापारिक गुट के गठन पर सहमति जताई है, जिसके दायरे में करीब एक तिहाई आर्थिक गतिविधियां आएंगी। एशिया में कई देशों को उम्मीद है कि इस समझौते से कोरोना वायरस महामारी की मार से तेजी से उबरने में मदद मिलेगी। इस करार के बाद सदस्य देशों के बीच व्यापार पर शुल्क और नीचे आएगा, जो पहले ही काफी निचले स्तर पर है।

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क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) पर दस राष्ट्रों वाले दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के इतर रविवार को डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर किए गए। मलेशिया के अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं उद्योग मंत्री मोहम्मद आजमीन अली ने कहा, ‘यह समझौता संकेत देता है कि आरसीईपी देशों ने इस मुश्किल समय में संरक्षणवादी कदम उठाने के बजाय अपने बाजारों को खोलने का फैसला किया है।
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मेजबान देश वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने कहा, ‘मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आठ साल की कड़ी मेहनत के बाद हम आधिकारिक तौर पर आरसीईपी वार्ताओं को हस्ताक्षर तक लेकर आ पाए हैं।’ उन्होंने कहा कि आरसीईपी वार्ताओं के पूरा होने के बाद इस बारे में मजबूत संदेश जाएगा कि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को समर्थन देने में आसियान की प्रमुख भूमिका रहेगी।
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उन्होंने कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे क्षेत्र में एक नया व्यापार ढांचा बनेगा, व्यापार सुगम हो सकेगा और कोविड-19 से प्रभावित आपूर्ति श्रृंखला को फिर से खड़ा किया जा सकेगा।

दस देशों के अलावा चीन समेत ये देश शामिल
इस समझौते में आसियान के 10 देशों (इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, मलयेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, ब्रुनेई, कंबोडिया, म्यांमार और लाओस) के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। अमेरिका इस समझौते में शामिल नहीं है।

भारत के लिए खुले हैं दरवाजे
भारत इस समझौते में शामिल नहीं है। भारत पिछले साल समझौते की वार्ताओं से हट गया था, क्योंकि ऐसी आशंका है कि शुल्क समाप्त होने के बाद देश के बाजार आयात से पट जाएंगे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान होगा। हालांकि, अन्य देश पूर्व में कहते रहे हैं कि आरसीईपी में भारत की भागीदार के द्वार खुले हुए हैं। 


अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते में भारत के फिर से शामिल होने के द्वार खुले रखे गए हैं। जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा कि उनकी सरकार समझौते में भविष्य में भारत की वापसी की संभावना समेत स्वतंत्र एवं निष्पक्ष आर्थिक क्षेत्र के विस्तार को समर्थन देती है और उन्हें इसमें अन्य देशों से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। 
 

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