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COP-29: 12 दिवसीय जलवायु सम्मेलन, मेजबान ने देशों से नए जलवायु वित्त लक्ष्य पर मतभेद को तत्काल सुलझाने को कहा

Mon, 11 Nov 2024 02:37 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, (बाकू) अजरबैजान।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, (बाकू) अजरबैजान। Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 11 Nov 2024 02:37 PM IST
सार

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) फ्रेमवर्क कन्वेंशन (कॉप-29) के पक्षकारों का 29वां सम्मेलन सोमवार 11 नवंबर से 22 नवंबर तक अजरबैजान के बाकू में चलेगा। यह आयोजन जलवायु संकट से निपटने के लिए कार्रवाई में तेजी लाने का एक अहम मौका है। वैश्विक तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है और चरम मौसम की घटनाएं दुनिया भर के लोगों पर असर डाल रही हैं।

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12-day climate conference begins today, focus on fund raising; Trillions of dollars will be needed to reduce g
कॉप-29 में पैसे बनाने पर फोकस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) फ्रेमवर्क कन्वेंशन (कॉप-29) के पक्षकारों का 29वां सम्मेलन सोमवार 11 नवंबर से 22 नवंबर तक अजरबैजान के बाकू में चलेगा। इस वर्ष के संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के मेजबान अजरबैजान ने सोमवार को सभी देशों से लंबित मुद्दों को तत्काल सुलझाने की अपील की। उनकी ओर से विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करने के लिए एक नए जलवायु वित्त लक्ष्य पर सहमत होने का आह्वान किया गया। संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में अपना भाषण देते हुए COP29 के अध्यक्ष मुख्तार बाबायेव ने कहा कि वर्तमान नीतियां दुनिया को 3 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की ओर ले जा रही हैं, जो अरबों लोगों के लिए विनाशकारी होगा।

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राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजनाओं को पेश करने का अहम पल
यह सम्मेलन देशों के लिए पेरिस समझौते के तहत अपनी अपडेटेड  राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजनाओं को पेश करने का अहम पल भी होगा,जो 2025 की शुरुआत तक पेश की जानी हैं। अगर सही तरीके से इस पर अमल किया जाए, तो ये योजनाएं वैश्विक तापमान को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री सेल्सियस के दायरे में ला देंगी।
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कॉप की पहली बैठक
मार्च 1995 जर्मनी के बर्लिन में हुई कॉप की पहली बैठक कॉप यानी कॉन्फ्रेस ऑफ द पार्टीज जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन  (यूएनएफसीसीसी) के पक्षों का सम्मेलन है। पार्टीज वह देश हैं जिन्होंने 1992 में यूएन के जलवायु समझौते पर दस्तखत किए थे।
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क्या हैं कॉर्बन ऑफसेट्स
कार्बन ऑफसेट क्रेडिट कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए एक प्रमाणपत्र होता है। कुछ सरकारें और कंपनियां अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को सीधे कम करने में असमर्थ होती हैं। ऐसे में कार्बन ऑफसेट क्रेडिट के जरिये कहीं और ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए भुगतान कर सकते हैं जो सोलर पैनल लगाकर, पौधे लगाने जैसे उपाय करके उत्सर्जन को घटाते हैं।

पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 का अर्थ
2015 में पेरिस समझौते में वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस कम रखने और धरती के तापमान में बढ़ोतरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस के दायरे में रखने के लिए 200 देशों ने मंजूरी दी थी। समझौते का अनुच्छेद 6 विकासशील देशों को जलवायु वित्त देने के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र माना जाता है। समझौते का यह अनुच्छेद देशों को अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए मिलकर काम करने में मदद करता है।

  •  अनुच्छेद 6.2: दो देशों के मध्य सीधे कार्बन ऑफसेट्स के व्यापार के लिए शर्ते तय करने की मंजूरी देता है।
  •  अनुच्छेद 6.4: संयुक्त राष्ट्र से प्रबंधित एक केंद्रीय प्रणाली बनाई जाती है, जो देशों और कंपनियों को कार्बन ऑफसेटस खरीदने और बेचने की सुविधा देती है। इसका उद्देश्य ऑफसेट व्यापार को अधिक मानकीकृत और सभी के लिए सुलभ बनाना है।


अभी तक क्या तय हुआ...
यूके ग्लासगो में 2021 में आयोजित कॉप-26 सम्मेलन में देशों ने कार्बन क्रेडिट के व्यापार के लिए सामान्य नियमों पर सहमति जताई थी। इसके बाद 2022 के कॉप-27 को लेकर यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा था कि सभी देशों को जलवायु संकट के लिए अतिरिक्त कोशिश करने की जरूरत है। दुबई में 2023 कॉप-28 में दो हफ्ते की बातचीत के बाद भी दुनिया के देश उन जरूरी नियमों पर रजामंद नहीं हो पाए जो एक केंद्रीय प्रणाली स्थापित करने और सीधे व्यापार करने वाले देशों के लिए स्पष्ट नियम बनाने के लिए जरूरी है।

मुख्य मुद्दा...क्या होंगे फैसले
कॉप- 29 में  मुख्य मुद्दा देशों के कार्बन क्रेडिट को खरीदने और बेचने का  है, इसके लिए जल्द अनुच्छेद 6 पर रजामंद होने पर फोकस रहेगा।

  • अहम मकसद द्विपक्षीय समझौतों के गार्डरेलों (सुरक्षात्मक उपायों) पर समझौता करना है। इससे यूएन समर्थित केंद्रीय बाजार कार्यान्वित हो सकेगा। इसमें कुछ देश एक-दूसरे के साथ सीधे कार्बन क्रेडिट का व्यापार करते हैं।
  • कुछ देश चाहते हैं कि क्रेडिट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांचे जाएं ताकि उनकी गुणवत्ता की पुष्टि हो सके।
  • यूएन एक ऐसा बाजार बनाना चाहता है जहां देश कार्बन क्रेडिट खरीद, बेच सकें। यूएन ने इसके लिए एक बुनियादी गुणवत्ता मानक तैयार किया है। अगर सहमति बनती है तो यह नई व्यापार प्रणाली 2025 तक शुरू हो सकती है।


स्वैच्छिक कार्बन बाजार...
स्वैच्छिक कार्बन बाजार सिस्टम में कानूनी तौर से उत्सर्जन को कम करने के लिए बाध्य न होने वाली कंपनियां भी कार्बन क्रेडिट खरीद सकती हैं ताकि वे अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा कर सकें। 2022 में इस बाजार का वैश्विक मूल्य 2 अरब डॉलर था। बीते साल यह घटकर 723 मिलियन डॉलर रह गया। जहां कार्बन प्रोजेक्ट्स यूएन के पेरिस समझौता सिस्टम से जुड़ते हैं, तो इससे बाजार में भरोसा बढ़ सकता है। यूएन से मंजूरी मिलने के बाद इन क्रेडिट्स को यूएन सिस्टम में या स्वैच्छिक बाजार में बेचा जा सकेगा।

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