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166 Indians rescued from the Nepal disaster so far; 410 Indians returned from China!
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नेपाल आपदा से अब तक 166 भारतीय बचाए गए ,410 भारतीय चीन से वापस लौटे!
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और उसके बाद पैदा हुए हालात के बीच भारत का राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें बुधवार को बचाए गए तीन भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। भारत सरकार नेपाल में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ वहां राहत सामग्री पहुंचाने और स्थानीय प्रशासन की मदद करने में भी जुटी हुई है। इसी क्रम में बुधवार को भारत ने राहत सामग्री की पांचवीं खेप नेपाल भेजी। भारत की ओर से चलाया जा रहा अभियान आपदा प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की तलाश, राहत सामग्री की आपूर्ति और बचाव कार्यों को तेज करने पर केंद्रित है।
इस बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा और अन्य गतिविधियों के लिए तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र गए 410 भारतीय नागरिक बुधवार को चीन से रवाना हो गए। नेपाल में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के कारण भारत सरकार लगातार अपने नागरिकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। दूसरी ओर, भारतीय सुरंग बचाव दल ने अपने अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए अपना बेस त्रिशूली से स्याब्रुबेसी स्थानांतरित कर दिया है। इस स्थान से चिलीमे सुरंग तक पहुंचने में बचाव दल को पहले की तुलना में कम समय लगेगा। नेपाली सेना के साथ चलाए जा रहे संयुक्त अभियान में भारतीय दल ने कीचड़ और मलबे से पूरी तरह भरी सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक आगे बढ़ने में सफलता हासिल की है। सुरंग के अंदर भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा होने के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारतीय और नेपाली बचाव दल अब सुरंग तक भारी मशीनरी पहुंचाने के लिए अस्थायी सड़क बनाने की संभावना भी तलाश रहे हैं। इससे बचाव अभियान में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों और अन्य जरूरी उपकरणों को मौके तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। बुधवार को भारत से पहुंचे 11 विशेषज्ञ भी त्रिशूली बाजार के पास पहुंच चुके हैं। ये विशेषज्ञ गुरुवार से नेपाली सेना के साथ संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान में शामिल होंगे। इससे प्रभावित इलाकों में तकनीकी विशेषज्ञता और बचाव क्षमता को और मजबूत करने की उम्मीद है।
आपदा के बाद लापता लोगों की पहचान और उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। भारत की फॉरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य बरामद शवों की पहचान करना और उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में सहायता करना है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बुधवार सुबह तक बाढ़ में बहकर गए 1,200 से अधिक लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। ऐसे में भारत और नेपाल की संयुक्त टीमें लगातार बचाव अभियान में जुटी हैं और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अधिक से अधिक लोगों का पता लगाया जा सकेगा।
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