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Threat of 100% tariff on buying oil from Russia—was there a discussion with the US Secretary of State?
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रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिकी विदेश मंत्री से हुई बात?
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम
Published by: Bhaskar Tiwari
Updated Thu, 24 Sep 2026 02:15 AM IST
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई। बैठक के बाद जयशंकर ने बताया कि उन्होंने अमेरिका के साथ Sanctioning Russia and Iran Act (SRIA) को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। दोनों नेताओं ने इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब अमेरिका ने रूस और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों से संबंधित नया कानून लागू किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर किए हैं। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार इस प्रावधान के संभावित दायरे में आते हैं। हालांकि, कानून में राष्ट्रपति के पास इन अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर विवेकाधिकार भी है; इसलिए 100 प्रतिशत टैरिफ लगना अपने-आप में तय नहीं है।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूसी कच्चा तेल देश की ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है और रूस सहित कई देशों से कच्चे तेल की खरीद करता है। भारतीय पक्ष ने पहले ही स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा नीति का प्रमुख उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत बदलती बाजार परिस्थितियों और विविध स्रोतों के आधार पर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता रहेगा। साथ ही, नई अमेरिकी व्यवस्था के संभावित आर्थिक प्रभावों पर भारत की नजर बनी हुई है।
जयशंकर और रूबियो की बैठक में इस मुद्दे को उठाना भारत-अमेरिका संबंधों में इसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर लगातार बातचीत चल रही है। रूबियो ने बैठक के बाद कहा कि दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं तथा आगामी बहुपक्षीय प्रयासों पर समन्वय कर रहे हैं। दोनों नेताओं की इससे पहले जुलाई 2026 में मनीला में भी मुलाकात हुई थी, जहां व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित कई विषयों पर चर्चा हुई थी।
भारत की चिंता केवल संभावित अतिरिक्त शुल्क तक सीमित नहीं है। यदि रूसी ऊर्जा खरीद पर किसी प्रकार का अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लागू होता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा बाजार और भारतीय आयात लागत पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी कानून का घोषित उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इसलिए आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी प्रशासन कानून में दिए गए अधिकारों का किस तरह इस्तेमाल करता है और भारत इस बदलती परिस्थिति में अपनी ऊर्जा सुरक्षा तथा आर्थिक हितों को किस प्रकार सुरक्षित रखता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान कानून में मौजूद है, लेकिन उसका वास्तविक इस्तेमाल अलग प्रशासनिक निर्णय पर निर्भर करेगा।
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