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Uttarkashi News: आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच पर सख्ती
Mon, 20 Jul 2026 05:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Mon, 20 Jul 2026 05:40 PM IST
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लिंगानुपात सुधार को अल्ट्रासाउंड केंद्रों की होगी कड़ी निगरानी
उत्तरकाशी। आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, लिंगानुपात सुधार और कन्या भ्रूण संरक्षण के लिए जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) एवं पीसीपीएनडीटी सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक में इन दोनों मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग और आईसीडीएस को निर्देशित किया कि स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान प्रत्येक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति तय की जाए। जांच में चिन्हित बच्चों को समयबद्ध उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित अध्यापकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तय होगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.एस. रावत ने बताया कि जिले में पांच सरकारी और दो निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं। जिलाधिकारी ने सभी अल्ट्रासाउंड मशीनों में एक्टिव ट्रैकर लगाने, केंद्रों का नियमित निरीक्षण, अभिलेखों की गहन जांच और कानून का कड़ाई से पालन कराने को कहा। साथ ही कन्या भ्रूण हत्या रोकने और बेटी बचाओ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी विशेष जोर दिया।
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उत्तरकाशी। आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, लिंगानुपात सुधार और कन्या भ्रूण संरक्षण के लिए जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) एवं पीसीपीएनडीटी सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक में इन दोनों मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग और आईसीडीएस को निर्देशित किया कि स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान प्रत्येक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति तय की जाए। जांच में चिन्हित बच्चों को समयबद्ध उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित अध्यापकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तय होगी।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.एस. रावत ने बताया कि जिले में पांच सरकारी और दो निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं। जिलाधिकारी ने सभी अल्ट्रासाउंड मशीनों में एक्टिव ट्रैकर लगाने, केंद्रों का नियमित निरीक्षण, अभिलेखों की गहन जांच और कानून का कड़ाई से पालन कराने को कहा। साथ ही कन्या भ्रूण हत्या रोकने और बेटी बचाओ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी विशेष जोर दिया।
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