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सामाजिक संगठनों को साथ लेकर पुलिस चलाएगी नशे के खिलाफ अभियान
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सीमांत जनपद में स्मैक तेजी से पैर पसार रहा है। तीन माह के भीतर ही पुलिस जिले में सात अलग-अलग मामलों में 11 युवकों को करीब सौ ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस पूछताछ में स्कूली बच्चों (जिनमें लड़कियां भी शामिल हैं) के नशे की गिरफ्त में आने की चौंकाने वाली बातें सामने आने से अभिभावकों को सावधान होने की जरूरत है।
पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पत्रकारों के साथ वार्ता की। उन्होंने कहा कि स्मैक के साथ पकड़े गए अभियुक्तों से पूछताछ में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों के भी नशे की गिरफ्त में आने का पता चला है, जिनमें लड़कियां भी शामिल हैं। अभी तक पुलिस जिला मुख्यालय एवं आसपास के क्षेत्र में ही स्मैक का नशा करने वाले 50 से अधिक लोगों को चिह्नित कर चुकी है।
एसपी ने कहा कि पुलिस नशे के खिलाफ अभियान चलाकर तस्करों की धरपकड़ कर रही है, लेकिन इसके लिए आम जनता को भी जागरूक होने की जरूरत है। अभिभावक अपने बच्चों से निरंतर संवाद और उनकी हरकतों पर नजर रखकर नशे के दलदल में फंसने से बचा सकते हैं। एसपी मिश्रा ने नशामुक्ति केंद्र में आने वाला खर्च अपनी ओर से देने की बात कही।
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यह लक्षण दिखें तो सावधान हो जाएं
एसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि स्मैक के नशे में शराब एवं चरस की तरह गंध नहीं आने के कारण स्कूली बच्चे एवं युवा इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह नशा करने वाले बच्चे ज्यादा समय बाथरूम एवं अलग कमरे में बिताना पसंद करते हैं। यह नशा डरपोक बनाता है। नशे का आदी व्यक्ति भीड़ से अलग रहता है। किसी बात का जवाब नहीं देता है और बातचीत करते समय भी सिर झुकाए रखता है। यह नशा धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करता है। जिससे कुछ ही सालों में मौत तक हो सकती है। नशा नहीं मिलने पर व्यक्ति बेचैन होता है और नशे के लिए गलत कार्य करने से भी गुरेज नहीं करता। स्मैक के नशे की आदत पड़ने पर इसे मारपीट या काउंसिलिंग कर छुड़ाना आसान नहीं है। इसका विधिवत इलाज कराकर ही व्यक्ति को बचाया जा सकता है।
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पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पत्रकारों के साथ वार्ता की। उन्होंने कहा कि स्मैक के साथ पकड़े गए अभियुक्तों से पूछताछ में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों के भी नशे की गिरफ्त में आने का पता चला है, जिनमें लड़कियां भी शामिल हैं। अभी तक पुलिस जिला मुख्यालय एवं आसपास के क्षेत्र में ही स्मैक का नशा करने वाले 50 से अधिक लोगों को चिह्नित कर चुकी है।
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एसपी ने कहा कि पुलिस नशे के खिलाफ अभियान चलाकर तस्करों की धरपकड़ कर रही है, लेकिन इसके लिए आम जनता को भी जागरूक होने की जरूरत है। अभिभावक अपने बच्चों से निरंतर संवाद और उनकी हरकतों पर नजर रखकर नशे के दलदल में फंसने से बचा सकते हैं। एसपी मिश्रा ने नशामुक्ति केंद्र में आने वाला खर्च अपनी ओर से देने की बात कही।
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एसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि स्मैक के नशे में शराब एवं चरस की तरह गंध नहीं आने के कारण स्कूली बच्चे एवं युवा इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह नशा करने वाले बच्चे ज्यादा समय बाथरूम एवं अलग कमरे में बिताना पसंद करते हैं। यह नशा डरपोक बनाता है। नशे का आदी व्यक्ति भीड़ से अलग रहता है। किसी बात का जवाब नहीं देता है और बातचीत करते समय भी सिर झुकाए रखता है। यह नशा धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करता है। जिससे कुछ ही सालों में मौत तक हो सकती है। नशा नहीं मिलने पर व्यक्ति बेचैन होता है और नशे के लिए गलत कार्य करने से भी गुरेज नहीं करता। स्मैक के नशे की आदत पड़ने पर इसे मारपीट या काउंसिलिंग कर छुड़ाना आसान नहीं है। इसका विधिवत इलाज कराकर ही व्यक्ति को बचाया जा सकता है।