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भारतीय संस्कृति एवं गौरव की पुनर्स्थापना के लिए गाय का सम्मान जरूरी - संत गोपालमणि
Updated Mon, 23 Jul 2018 10:32 PM IST
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उत्तरकाशी। सोमवार को नगर में भव्य कलश यात्रा के साथ रामलीला मैदान में कथावाचक संत गोपालमणि एवं उनके बेटे सीताशरण की ओर से धेनुमानस गो कथा का शुभारंभ किया गया। उन्होंने विश्व में भारत की संस्कृति, वैभव एवं प्रतिष्ठा की पुनर्स्थापना के लिए गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देकर गाय का सम्मान करने पर जोर दिया।
सोमवार को नगर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मणिकर्णिका घाट से गंगाजल भरकर नगर के विभिन्न मंदिरों से होते हुए कलश यात्रा निकाली, जो रामलीला मैदान में बने विशाल कथा पंडाल में संपन्न हुई। व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए संत गोपालमणि ने कहा कि गो और गंगा भारतीय संस्कृति का आधार है। इनकी उपेक्षा का ही परिणाम है कि भारत की प्रतिष्ठा और वैभव का ह्रास हुआ। विश्व में भारतीय संस्कृति, वैभव एवं गौरव हासिल करने के लिए गो और गंगा को उनकी प्रतिष्ठा प्रदान करना जरूरी है। कथा व्यास सीता शरण ने कहा कि श्रावण मास में कथा, धार्मिक अनुष्ठान एवं दान से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने भी भक्तों को गाय के धार्मिक, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक एवं आर्थिक महत्व की जानकारी दी। इस मौके पर श्री गो कथा आयोजन समिति के चंद्रशेखर भट्ट, शिव प्रसाद सेमवाल, डा. राधेश्याम खंडूड़ी, राकेश सेमवाल, सुखराम, डा. रामभूषण बिजल्वाण, जयेंद्र रावत, जयेंद्री राणा, राजेंद्र रावत, शूरवीर मटूड़ा, प्रेम सिंह पंवार, प्रताप रावत आदि मौजूद रहे।
सोमवार को नगर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मणिकर्णिका घाट से गंगाजल भरकर नगर के विभिन्न मंदिरों से होते हुए कलश यात्रा निकाली, जो रामलीला मैदान में बने विशाल कथा पंडाल में संपन्न हुई। व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए संत गोपालमणि ने कहा कि गो और गंगा भारतीय संस्कृति का आधार है। इनकी उपेक्षा का ही परिणाम है कि भारत की प्रतिष्ठा और वैभव का ह्रास हुआ। विश्व में भारतीय संस्कृति, वैभव एवं गौरव हासिल करने के लिए गो और गंगा को उनकी प्रतिष्ठा प्रदान करना जरूरी है। कथा व्यास सीता शरण ने कहा कि श्रावण मास में कथा, धार्मिक अनुष्ठान एवं दान से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने भी भक्तों को गाय के धार्मिक, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक एवं आर्थिक महत्व की जानकारी दी। इस मौके पर श्री गो कथा आयोजन समिति के चंद्रशेखर भट्ट, शिव प्रसाद सेमवाल, डा. राधेश्याम खंडूड़ी, राकेश सेमवाल, सुखराम, डा. रामभूषण बिजल्वाण, जयेंद्र रावत, जयेंद्री राणा, राजेंद्र रावत, शूरवीर मटूड़ा, प्रेम सिंह पंवार, प्रताप रावत आदि मौजूद रहे।
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