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अनुदेशक विहीन आईटीआई खोल रहा सरकार के कौशल विकास के दावों की पोल
Updated Thu, 19 Jul 2018 11:08 PM IST
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चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। वर्ष 1992 में खोले गए आईटीआई को अपना भवन और मशीन तो मिल गए, लेकिन अनुदेशक समेत तमाम पद रिक्त पड़े होने से युवाओं को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है।
आईटीआई में मोटर मैकेनिक ट्रेड में संविदा पर एक अनुदेशक तैनात है। इस ट्रेड में क्षेत्र के 12 युवाओं ने प्रवेश लिया है। शेष ट्रेड में अनुदेशक पद रिक्त होने से छात्रसंख्या भी शून्य है। प्रधानाचार्य का पद रिक्त होने से चार्ज बड़कोट के प्रधानाचार्य देख रहे हैं। आहरण वितरण अधिकारी का चार्ज देहरादून के अधिकारी के पास है। क्षेत्र के राजेंद्र थपलियाल, स्वामी कृष्णानंद का कहना है कि अनुदेशक नहीं होने से यहां शिक्षण-प्रशिक्षण ठप पड़ा है और क्षेत्र के युवा प्रशिक्षण के लिए बाहरी जनपदों का रुख करने को मजबूर हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य निरंजन कुकशाल का कहना है कि अनुदेशकों के रिक्त पदों के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जल्द ही चिन्यालीसौड़ आईटीआई में सिलाई-कटाई ट्रेड में भी प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है।
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आईटीआई में मोटर मैकेनिक ट्रेड में संविदा पर एक अनुदेशक तैनात है। इस ट्रेड में क्षेत्र के 12 युवाओं ने प्रवेश लिया है। शेष ट्रेड में अनुदेशक पद रिक्त होने से छात्रसंख्या भी शून्य है। प्रधानाचार्य का पद रिक्त होने से चार्ज बड़कोट के प्रधानाचार्य देख रहे हैं। आहरण वितरण अधिकारी का चार्ज देहरादून के अधिकारी के पास है। क्षेत्र के राजेंद्र थपलियाल, स्वामी कृष्णानंद का कहना है कि अनुदेशक नहीं होने से यहां शिक्षण-प्रशिक्षण ठप पड़ा है और क्षेत्र के युवा प्रशिक्षण के लिए बाहरी जनपदों का रुख करने को मजबूर हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य निरंजन कुकशाल का कहना है कि अनुदेशकों के रिक्त पदों के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जल्द ही चिन्यालीसौड़ आईटीआई में सिलाई-कटाई ट्रेड में भी प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है।
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