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Udham Singh Nagar News: दिवाली को इको फ्रेंडली बनाएंगी महिलाएं
Sat, 10 Oct 2026 12:53 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:53 AM IST
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रुद्रपुर। दिवाली पर घर-आंगन रोशन करने की तैयारी के बीच महिलाएं पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश कर रही हैं। गाय के गोबर को बेकार समझकर फेंकने के बजाय उससे दीये, मोमबत्तियां और सजावटी सामान तैयार किया जा रहा है।
रुद्रपुर की नैनी देवी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्वदेशी उत्पादों के जरिये दिवाली को इको फ्रेंडली बनाने में जुटी हैं। इनकी पहल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, बल्कि महिलाओं के लिए स्वरोजगार के रास्ते भी खोल रही है। समूह से जुड़ी हेमा धामी ने बताया कि गोबर को सुखाकर पीसा जाता है। इसके बाद उसमें प्रीमिक्स मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को सांचों में डालकर अलग-अलग आकार के दीये बनाए जाते हैं। इन्हें धूप में सुखाने में डेढ़ से दो दिन लगते हैं। सूखने के बाद दीयों के अंदर तेल और गोंद का लेप किया जाता है, जिससे बाती आसानी से जल सके। दीये के पूरी तरह जलने के बाद बची सामग्री का इस्तेमाल जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है।
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गोबर से मूर्तियां और सजावटी सामान भी तैयार
महिलाएं दीयों के साथ लक्ष्मी-गणेश और भगवान कृष्ण की मूर्तियां समेत सजावटी वस्तुएं भी बना रही हैं। इन उत्पादों को रंगने में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। हेमा धामी के मुताबिक, इस बार उत्पादों की मांग बढ़ी है और लोग ऑर्डर देकर खरीदारी कर रहे हैं। समूह को इन उत्पादों के लिए उत्तराखंड ग्रामीण स्कॉच अवॉर्ड भी मिल चुका है।
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रुद्रपुर की नैनी देवी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्वदेशी उत्पादों के जरिये दिवाली को इको फ्रेंडली बनाने में जुटी हैं। इनकी पहल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, बल्कि महिलाओं के लिए स्वरोजगार के रास्ते भी खोल रही है। समूह से जुड़ी हेमा धामी ने बताया कि गोबर को सुखाकर पीसा जाता है। इसके बाद उसमें प्रीमिक्स मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को सांचों में डालकर अलग-अलग आकार के दीये बनाए जाते हैं। इन्हें धूप में सुखाने में डेढ़ से दो दिन लगते हैं। सूखने के बाद दीयों के अंदर तेल और गोंद का लेप किया जाता है, जिससे बाती आसानी से जल सके। दीये के पूरी तरह जलने के बाद बची सामग्री का इस्तेमाल जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है।
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गोबर से मूर्तियां और सजावटी सामान भी तैयार
महिलाएं दीयों के साथ लक्ष्मी-गणेश और भगवान कृष्ण की मूर्तियां समेत सजावटी वस्तुएं भी बना रही हैं। इन उत्पादों को रंगने में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। हेमा धामी के मुताबिक, इस बार उत्पादों की मांग बढ़ी है और लोग ऑर्डर देकर खरीदारी कर रहे हैं। समूह को इन उत्पादों के लिए उत्तराखंड ग्रामीण स्कॉच अवॉर्ड भी मिल चुका है।
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