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भाजपा हाईकमान नरम, सिंघल को जिला कार्यसमिति में एंट्री 

Fri, 03 Aug 2018 12:17 AM IST
ब्यूरो/ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/ऊधमसिंह नगर Updated Fri, 03 Aug 2018 12:17 AM IST
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Singhal gets entry in District Working Committee
रुद्रपुर में भाजपा जिला कार्यसमिति की बैठक में मौजूद भाजपाई। - फोटो : अमर उजाला

अनुशासनहीनता के मामले में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में शिरकत करने से रोके गए जसपुर के पूर्व विधायक डॉ शैलेंद्र मोहन सिंघल पर हाईकमान ने नरम रुख अपनाया है। 

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प्रदेश कार्यसमिति में नो एंट्री के बाद सिंघल को बृहस्पतिवार को रुद्रपुर हुई जिला कार्यसमिति में एंट्री मिल ही गई। सिंघल ने बैठक में शिरकत की और प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी सहज अंदाज में प्रदेश कार्यसमिति में रोकने और जिला कार्यसमिति में बुलाने की बात कह दी। सिंघल के लिए मुसीबत कम तो नहीं हुई, लेकिन कुछ राहत जरूर मिली है। हालांकि उनके समर्थकों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ समर्थकों को चेतावनी और कुछ पर निलंबन की कार्रवाई होगी। 
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दरअसल बीती पांच जुलाई को कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के जसपुर आगमन पर हुए स्वागत समारोह में कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदेश उपाध्यक्ष विनय रोहेला पर भितरघात का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी थी। इससे नाराज होकर कैबिनेट मंत्री कौशिक नाराज होकर बिना संबोधन के ही कार्यक्रम से चले गए थे। जिलाध्यक्ष शिव अरोरा ने घटनाक्रम को अनुशासनहीनता का मामला मानते हुए 16 कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। साथ ही मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। नोटिस की जद आए कार्यकर्ता सिंघल समर्थक थे। 
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इधर, भाजपा हाईकमान ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 11 और 12 जुलाई को काशीपुर में हुई प्रदेश कार्यसमिति में डॉ सिंघल को आने से मना करने साथ ही अनुशासनहीनता को लेकर कड़ा संदेश दिया था। मामले में अंदरूनी सियासत गर्मायी थी और समर्थकों को कार्रवाई से बचाने को देहरादून और दिल्ली की दौड़ लगाई गई थी। जांच कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट जिलाध्यक्ष को सौंप दी थी। 

सूत्रों के अनुसार जांच में सिंघल अनुशासनहीनता के दोषी नहीं पाए गए हैं, हालांकि उनके कुछ समर्थकों को दोषी माना गया है। यही वजह रही कि सिंघल को रुद्रपुर में जिला कार्यसमिति में बुलाया गया था और उन्होंने शिरकत भी की। सिंघल के मामले को लेकर जब प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो कोई बड़ा मामला नहीं है। तब उनको रोका गया था और आज बुला लिया गया है। 


प्रदेश कार्यसमिति की जांच रिपोर्ट जिलाध्यक्ष देने वाले हैं। निकाय चुनाव पर उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी चुनाव हो जाएं, उतनी जल्दी कार्यकर्ता एडजस्ट होंगे। भट्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव में देरी सरकार की वजह से नहीं बल्कि हाईकोर्ट में चल रहे वाद की वजह से हो रही है। कोर्ट का मामला होने की वजह से इस पर ज्यादा बोलना ठीक नहीं है। जैसे ही वाद निस्तारित हो जाएगा, चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 

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