{"_id":"68b9e6242dd565e6bf0cb88c","slug":"private-hospital-operator-and-staff-accused-of-negligence-kashipur-news-c-235-1-ksp1006-131654-2025-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: निजी अस्पताल संचालक और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: निजी अस्पताल संचालक और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप
विज्ञापन
काशीपुर। एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान आठ महीने की बच्चे की मौत मामले में परिजनों ने अस्पताल संचालक और स्टाफ पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए पुलिस में तहरीर सौंपी है।
मोहल्ला खालसा निवासी अमरदीप सक्सेना ने बताया कि वह अपने आठ महीने के बेटे शिवांश को बुखार आने पर 28 अगस्त को मुरादाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गया था। डॉक्टर ने बेटे का चेकअप किया, दवाई देकर कहा कि आप इसे घर ले जा सकते हैं। उसी समय अस्पताल संचालक डॉक्टर आए और बुखार बताकर शिवांश को पीआईसीयू में भर्ती कर लिया। भर्ती करते समय बेटा खेल रहा था और अपनी मां का दूध भी पी रहा था। इस दौरान बेटे को ग्लूकोज लगाया गया। 29 अगस्त की दोपहर लगभग डेढ़ बजे नर्स ने बताया कि शिवांश का बुखार नहीं उतर रहा है। डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाने को कहा। इंजेक्शन लगने के 10 मिनट बाद ही बेटे की हालत बिगड़ने लगी। जब डॉक्टर को बुलाने को कहा तो नर्स ने कहा कि वह किसी कार्यक्रम में गए हैं। अमरदीप के मुताबिक इस दौरान शिवांश की हालत काफी बिगड़ने पर उसके भाई ने डॉक्टर को फोन किया तो उन्होंने आने से मना कर दिया। कहा कि किसी अन्य अस्पताल ले जाओ। तब वह अपने बेटे को इलाज के लिए मुरादाबाद ले जा रहा था कि उसकी रास्ते में मृत्यु हो गई।
विज्ञापन
मोहल्ला खालसा निवासी अमरदीप सक्सेना ने बताया कि वह अपने आठ महीने के बेटे शिवांश को बुखार आने पर 28 अगस्त को मुरादाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गया था। डॉक्टर ने बेटे का चेकअप किया, दवाई देकर कहा कि आप इसे घर ले जा सकते हैं। उसी समय अस्पताल संचालक डॉक्टर आए और बुखार बताकर शिवांश को पीआईसीयू में भर्ती कर लिया। भर्ती करते समय बेटा खेल रहा था और अपनी मां का दूध भी पी रहा था। इस दौरान बेटे को ग्लूकोज लगाया गया। 29 अगस्त की दोपहर लगभग डेढ़ बजे नर्स ने बताया कि शिवांश का बुखार नहीं उतर रहा है। डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाने को कहा। इंजेक्शन लगने के 10 मिनट बाद ही बेटे की हालत बिगड़ने लगी। जब डॉक्टर को बुलाने को कहा तो नर्स ने कहा कि वह किसी कार्यक्रम में गए हैं। अमरदीप के मुताबिक इस दौरान शिवांश की हालत काफी बिगड़ने पर उसके भाई ने डॉक्टर को फोन किया तो उन्होंने आने से मना कर दिया। कहा कि किसी अन्य अस्पताल ले जाओ। तब वह अपने बेटे को इलाज के लिए मुरादाबाद ले जा रहा था कि उसकी रास्ते में मृत्यु हो गई।
विज्ञापन