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Udham Singh Nagar News: मल्टी ईयर टैरिफ याचिका और बिजली दरों में वृद्धि के खिलाफ दर्ज कराई आपत्ति
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काशीपुर। केजीसीसीआई अध्यक्ष अशोक बंसल ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के समक्ष उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की ओर से प्रस्तावित मल्टी ईयर (बहुवर्षीय) टैरिफ याचिका और बिजली दरों में वृद्धि के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराई है।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की ओर से विद्युत नियामक भवन देहरादून के सभागार में विद्युत सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक केजीसीसीआई अध्यक्ष बंसल ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के समक्ष उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) से प्रस्तावित मल्टी ईयर (बहुवर्षीय) टैरिफ याचिका और बिजली दरों में वृद्धि के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यूपीसीएल की याचिका में वित्तीय प्रबंधन की खामियां और अक्षमताएं स्पष्ट हैं। वितरण हानियां अधिक हैं। व्यापारिक देयताएं और बकाया राशि बढ़ रही है। ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख है।
यूपीसीएल वितरण हानियों को नियंत्रित करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा उच्च वोल्टेज पर भी समान वितरण हानियां लगाई जा रही हैं, जो कि अनुचित है। प्रतिवर्ष बढ़ती विद्युत दरें राज्य के औद्योगिक विकास को बाधित कर रही हैं। इसके विपरीत पड़ोसी राज्यों में सस्ती बिजली दरें उद्योगों को आकर्षित कर रही हैं। राज्य सरकार की ओर से लगाए गए बिजली शुल्क, ग्रीन सेस और जल उपकर जैसे कर अवैध और असंवैधानिक हैं। उन्होंने नियामक आयोग के समक्ष यूपीसीएल की ओर से दायर प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि को खारिज करने और वितरण हानियों को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की। साथ ही अवैध करों और उपकरों को समाप्त करने को कहा है।
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उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की ओर से विद्युत नियामक भवन देहरादून के सभागार में विद्युत सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक केजीसीसीआई अध्यक्ष बंसल ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के समक्ष उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) से प्रस्तावित मल्टी ईयर (बहुवर्षीय) टैरिफ याचिका और बिजली दरों में वृद्धि के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यूपीसीएल की याचिका में वित्तीय प्रबंधन की खामियां और अक्षमताएं स्पष्ट हैं। वितरण हानियां अधिक हैं। व्यापारिक देयताएं और बकाया राशि बढ़ रही है। ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख है।
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यूपीसीएल वितरण हानियों को नियंत्रित करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा उच्च वोल्टेज पर भी समान वितरण हानियां लगाई जा रही हैं, जो कि अनुचित है। प्रतिवर्ष बढ़ती विद्युत दरें राज्य के औद्योगिक विकास को बाधित कर रही हैं। इसके विपरीत पड़ोसी राज्यों में सस्ती बिजली दरें उद्योगों को आकर्षित कर रही हैं। राज्य सरकार की ओर से लगाए गए बिजली शुल्क, ग्रीन सेस और जल उपकर जैसे कर अवैध और असंवैधानिक हैं। उन्होंने नियामक आयोग के समक्ष यूपीसीएल की ओर से दायर प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि को खारिज करने और वितरण हानियों को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की। साथ ही अवैध करों और उपकरों को समाप्त करने को कहा है।
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