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अधूरे रह गए वादे: रुद्रपुर और काशीपुर में मेयर का कार्यकाल खत्म, आज से बैठेंगे प्रशासक
Sat, 02 Dec 2023 12:49 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sat, 02 Dec 2023 12:49 PM IST
सार
रुद्रपुर और काशीपुर में मेयर का कार्यकाल खत्म हो गया हैं। रुद्रपुर मेयर ने नेशनल हाईवे किनारे कूड़े का ढेर कम तो किया मगर साफ करने में कामयाब नहीं हो सके। वहीं, काशीपुर नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी कई कार्य अब भी अधूरे रह गए हैं।
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मेयर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पांच साल में मेयर रामपाल सिंह ने शहर को इंदौर जैसा बनाने की कोशिश तो खूब की मगर कई अड़चन उनके सपने को साकार नहीं कर सकी। कार्यकाल में नजूल भूमि पर काबिज गरीबों को निशुल्क मालिकाना हक देने की प्रक्रिया तो शुरू कराई और 1400 फाइलें भी बन गईं मगर मेयर मालिकाना हक का दस्तावेज नहीं दिलवा सके।
मेयर ने नेशनल हाईवे किनारे कूड़े का ढेर कम तो किया मगर साफ करने में कामयाब नहीं हो सके। शहर के वार्डों में हॉटमिक्स सड़कें, कूड़े से सीएनजी, मल कीचड़ उपचार संयंत्र के साथ ही ट्रांजिट कैंप की मुख्य सड़क बनवाना उनकी उपलिब्धयां रहीं।
पांच साल पहले मेयर रामपाल ने कई संकल्प लिए। इसमें सबसे पहली प्राथमिकता नजूल भूमि पर रहे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मालिकाना हक दिलाने की थी। इस संकल्प के चलते वे साढ़े चार साल कुर्सी पर नहीं बैठे थे और सीएम ने संशोधित नजूल नीति को एक साल के लिए बढ़ाया और मेयर को कुर्सी पर बैठाया था।
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ये हुए विकास कार्य
ये कार्य रह गए अधूरे
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मेयर ने नेशनल हाईवे किनारे कूड़े का ढेर कम तो किया मगर साफ करने में कामयाब नहीं हो सके। शहर के वार्डों में हॉटमिक्स सड़कें, कूड़े से सीएनजी, मल कीचड़ उपचार संयंत्र के साथ ही ट्रांजिट कैंप की मुख्य सड़क बनवाना उनकी उपलिब्धयां रहीं।
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पांच साल पहले मेयर रामपाल ने कई संकल्प लिए। इसमें सबसे पहली प्राथमिकता नजूल भूमि पर रहे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मालिकाना हक दिलाने की थी। इस संकल्प के चलते वे साढ़े चार साल कुर्सी पर नहीं बैठे थे और सीएम ने संशोधित नजूल नीति को एक साल के लिए बढ़ाया और मेयर को कुर्सी पर बैठाया था।
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ये हुए विकास कार्य
- शहर में कूड़ा निस्तारण के लिए वैज्ञानिक विधि से सीबीजी प्लांट तो स्थापित किया गया।
- वार्डों में हॉटमिक्स सड़कें बनवाईं।
- कूड़े से सीएनजी और मल कीचड़ उपचार संयंत्र स्थापित।
- पार्कों में ओपन जिम का निर्माण किया।
- शहर में शौचालयों का निर्माण कराया।
- चार साहिबजादे चौक का निर्माण कराया।
- सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग करने के लिए एमआरएफ सेंटर, ट्राॅमल प्लांट बनाने का काम किया।
- कल्याणी नदी के किनारे वाटिकाएं बनवाईं।
ये कार्य रह गए अधूरे
- शहर को जलभराव की समस्या का निजात नहीं दिला सके।
- शहर में वाहनों के लिए पार्किंग नहीं बन सकी।
- शहर के एक पार्क को पर्यटन के रूप में विकसित करना था जो पूरा नहीं हो सका।
- घोषणा पत्र के अनुसार वार्डों में मोहल्ला क्लिनिक भी नहीं बना पाए।
- कल्याणी नदी की तस्वीर नहीं बदली।
- हाईवे के किनारे बने कूड़े के पहाड़ को नहीं हटा पाए।
- नजूल भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक नहीं दिलवा सके।
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लावारिस गोवंश को हाईटेक गोशाला का इंतजार
काशीपुर नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी कई बड़े कार्य अब भी अधूरे रह गए हैं। शहर की प्रमुख समस्या बारिश के दौरान मुख्य बाजार में जलभराव से निजात दिलाने के लिए लक्ष्मीपुर माइनर को कवर्ड करने के लिए शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए सिंचाई विभाग की ओर से टेंडर निकाले जा चुके हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द इस योजना पर कार्य शुरू हो जाएगा।
लावारिस पशुओं से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित हाईटेक गोशाला की शासन से स्वीकृति नहीं मिल सकी है। हालांकि शासन ने बाजपुर रोड पर जमीन तो उपलब्ध करा दी है लेकिन धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है।
मेयर उषा चौधरी ने कहा बोर्ड ने अंतिम दिन तक विकास कार्य करने का काम किया। इसके अलावा निगम क्षेत्र में 1850 सड़कें, नाले, नालियां आैर 28,45,00,000 रुपये से लक्ष्मीपुर माइनर को कवर्ड करने के लिए शासन स्तर से स्वीकृति मिल चुकी हैं।
ये हुए विकास कार्य
ये कार्य रह गए अधूरे
काशीपुर नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी कई बड़े कार्य अब भी अधूरे रह गए हैं। शहर की प्रमुख समस्या बारिश के दौरान मुख्य बाजार में जलभराव से निजात दिलाने के लिए लक्ष्मीपुर माइनर को कवर्ड करने के लिए शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए सिंचाई विभाग की ओर से टेंडर निकाले जा चुके हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द इस योजना पर कार्य शुरू हो जाएगा।
लावारिस पशुओं से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित हाईटेक गोशाला की शासन से स्वीकृति नहीं मिल सकी है। हालांकि शासन ने बाजपुर रोड पर जमीन तो उपलब्ध करा दी है लेकिन धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है।
मेयर उषा चौधरी ने कहा बोर्ड ने अंतिम दिन तक विकास कार्य करने का काम किया। इसके अलावा निगम क्षेत्र में 1850 सड़कें, नाले, नालियां आैर 28,45,00,000 रुपये से लक्ष्मीपुर माइनर को कवर्ड करने के लिए शासन स्तर से स्वीकृति मिल चुकी हैं।
ये हुए विकास कार्य
- नगर निगम क्षेत्र में 1850 छोटी-बड़ी सड़कें, नाले, नालियां बनाए गए हैं।
- करीब 28,45,00,000 रुपये से लक्ष्मीपुर माइनर को कवर्ड करने की शासन स्तर से स्वीकृति मिल चुकी हैं।
- निगम के बाहरी क्षेत्र व पुराने क्षेत्र में करीब दस हजार से अधिक स्ट्रीट लाइटें व 150 सोलर लाइटें लगवाई गईं।
- पीसीबी की ओर से वायु प्रदूषण रोकथाम के लिए शहर के चार प्रमुख मार्गों पर सड़क पटरी पर करीब साढ़े चार करोड़ की लागत से टाइल्स रोड बनाई गई है।
- निगम क्षेत्र में पांच हाईटेक शौचालय, महिलाओं के लिए मुख्य चौराहा के पास 12 सीटर पिंक शौचालय निर्माणाधीन है।
ये कार्य रह गए अधूरे
- बाजपुर रोड पर प्रस्तावित गोशाला के लिए भूमि तो शासन से मिली, लेकिन साढ़े तीन करोड़ को स्वीकृति नहीं मिली।
- नगर निगम कार्यालय के पीछे साढ़े छह करोड़ की लागत से चार मंजिल शॉपिंग कॉम्पलेक्स की डीपीआर शासन को भेजी है।
- करीब 35 करोड़ की लागत से पुरानी जेल परिसर में चार मंजिला पार्किंग को शासन से स्वीकृति का इंतजार है।
- करीब 63 लाख की लागत से बने एनिमल बर्थ कंट्रोल के टेंडर हो चुके हैं लेकिन अभी शुरू नहीं हो सका है।
- निगम बोर्ड ने अमृत योजना को शहर में लागू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा और जल निगम को डीपीआर बनाने का कहा है।