रुद्रपुर: जितेंद्र के पापा...यह मेरे बेटे का खून है, रुद्रपुर फ्लाईओवर हादसे ने छीना परिवार का सहारा
रुद्रपुर में फ्लाईओवर पर डिवाइडर से टक्कर के बाद उछलकर 40 फीट नीचे गिरने से 23 वर्षीय जितेंद्र की मौत हो गई। वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था।
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रुद्रपुर में फ्लाईओवर पर डिवाइडर से टक्कर के बाद उछलकर नीचे गिरे जितेंद्र की मौत की खबर से परिजनों में कोहराम मच गया। अस्पताल में हंगामे के साथ जितेंद्र की मां की चित्कार गूंजती रही। स्ट्रेचर पर बेटे के खून को देखकर मां की ममता बिलख पड़ी। वह मानने को तैयार नहीं थीं कि जल्दी आने का कहकर निकला उनका 23 वर्ष का बेटा अब कभी नहीं लौटेगा।
ग्राम नंदपुर गदरपुर निवासी कल्याण सिंह के तीन बच्चे (दो बेटे और एक बेटी) हैं। जितेंद्र सबसे छोटा था। बृहस्पतिवार सुबह वह रोजाना की तरह काम के लिए घर से निकला था। उसकी कंपनी के प्लांट हेड नरेश अरोड़ा ने बताया कि 40 फीट गहराई से निकालकर घायल को अपनी निजी गाड़ी से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि कई बार कहने के बाद भी डॉक्टर इलाज करने के लिए नहीं पहुंचे।
जब काफी शोर किया तो डॉक्टर आए लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रक्तस्राव के कारण घायल जितेंद्र की सांस उखड़ने लगीं और 10 मिनट के बाद ही उसकी मौत हो गई। जितेंद्र ही अपने परिवार का इकलौता सहारा था। वहीं, परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट घायल का इलाज कर अपनी प्रैक्टिस कर रहे थे। परिजनों ने जिम्मेदार डॉक्टर पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, जितेंद की मौत के संबंध में डॉक्टर की जिम्मेदारी को लेकर सवाल करते हुए साथी का वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहा है कि अब इनके माता-पिता को क्या जवाब दोगे।
भाई मुझे बचा लो... कहकर गुहार लगाता रहा जितेंद्र
हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल जितेंद्र काफी देर तक खुद को बचाने की गुहार लगाता रहा। परिजनों के मुताबिक, वह बार-बार कह रहा था कि भाई मुझे बचाओ, मुझे बचाओ। आरोप है कि वह मदद के लिए चीखता रहा लेकिन समय पर कोई डॉक्टर उसके इलाज के लिए आगे नहीं आया। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उसका इलाज शुरू कर दिया जाता और रक्तस्राव को नियंत्रित किया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
रोते हुए पिता बोले : मेरा दाहिना हाथ चला गया
इकलौते बेटे जितेंद्र की मौत के बाद उसके पिता कल्याण सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था। बेटे का शव सामने देख वह बार-बार यही कहते रहे कि मेरा दाहिना हाथ चला गया। परिवार के लिए जितेंद्र ही सबसे बड़ा सहारा था। उसकी मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।
मधुमक्खी के हमले की भी चर्चा
कई लोगों का कहना है कि जितेंद्र पर मधुमक्खी ने हमला किया था। इस कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और वह डिवाइडर से टकराकर फ्लाईओवर से नीचे गिर गया। हालांकि, परिजनों की ओर से ऐसी कोई पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस हादसे के कारण को जानने के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल रही है।
108 पर फोन के बाद भी नहीं आई एंबुलेंस
मृतक के दोस्तों का आरोप है कि 40 फीट गहराई से घायल को निकालने के बाद साथियों ने तुरंत 108 एंबुलेंस के लिए फोन किया था लेकिन एंबुलेंस चालक ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद कंपनी के साथी उसे अपनी निजी गाड़ी में लेकर जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन लापरवाही के कारण जितेंद्र को बचाया नहीं जा सका।
जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित
परिजनों की शिकायत और इलाज में लापरवाही के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पीएमएस ने मामले की जांच के लिए दो वरिष्ठ डॉक्टर की समिति गठित की है। समिति में एक एनेस्थेटिक चिकित्सक को भी शामिल किया गया है। टीम हादसे में घायल के अस्पताल पहुंचने से लेकर इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ने और मौत तक की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी। इलाज के दौरान किए गए इलाज, मेडिकल रिकॉर्ड और चिकित्सकों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा। समिति को दो दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।