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Udham Singh Nagar News: जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में समानता के अधिकार के लिए धरने पर बैठीं छात्राएं

Mon, 17 Apr 2023 12:37 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Mon, 17 Apr 2023 12:37 AM IST
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Girl students sitting on dharna for the right to equality in GB Pant University
पंतनगर विश्वविद्यालय में समानता के अधिकार सहित पांच सूत्री मांगों को लेकर धरने पर बैठीं छात्राए
पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के सुभाष भवन में रविवार को पीजी कृषि और स्वर्ण जयंती भवन में पीजी प्रौद्योगिकी की छात्राएं समानता के अधिकार सहित पांच मांगों को लेकर धरने पर बैठ गईं। सूचना पर पहुंचे अधिकारियों के समझाने के बावजूद छात्राएं मांगों के समाधान पर ही धरने से उठने पर अड़ी रहीं। बाद में चीफ वार्डन व डीन सीबीएसएच के समझाने पर उन्होंने धरना समाप्त किया।
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नाम न छापने की शर्त पर छात्राओं ने बताया कि आज जब महिलाएं पुरुषाें के कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, तब पंत विवि में छात्र-छात्रों के लिए अलग-अलग नियम बनाकर उनके समानता के अधिकार पर अतिक्रमण किया जा रहा है। भोजन का बहिष्कार कर धरने पर अडिग छात्राओं ने सुरक्षाधिकारी पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि उनके निर्देश पर छात्रावास के सुरक्षाकर्मियों की ओर से छात्राओं के पांच मिनट देरी से पहुंचने पर छात्रावास का गेट नहीं खोला जाता है। बताया कि वार्डन के संज्ञान में यह सभी समस्याएं लाने के बावजूद उनकी ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। यह सरासर विद्यार्थियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिससे उनकी एकेडेमिक क्षमता व मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
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खबर लिखे जाने तक सुभाष भवन में कार्यवाहक चीफ वार्डन डाॅ एएस जीना, सह निदेशक प्रशासन डाॅ. पीवी सिंह, सह निदेशक छात्र कल्याण डाॅ. बीएन शाही, वार्डन डाॅ. अंजू पाॅल व डाॅ. रश्मि पंवार, सहायक वार्डन भावना, एएसओ रविंद्र मिश्रा, डीपी यादव व मदन मेहरा आदि लोग छात्राओं को समझाने में लगे रहे, लेकिन व भोजन का बहिष्कार कर धरने पर अडिग थीं। वहीं स्वर्ण जयंती भवन में पहुंचे चीफ वार्डन व डीन सीबीएसएच डाॅ. संदीप अरोड़ा के समझाने पर छात्राएं वार्ता के लिए मान गईं और धरना समाप्त कर उन्होंने डीन के साथ ही भोजन किया।
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छलका दर्द
:- छात्रों के लिए 10 और उनके लिए 7 बजे का समय... परिसर में छात्रों को रात्रि दस बजे तक छात्रावास में आवागमन की अनुमति उपलब्ध है, जबकि छात्राओं के लिए समय सीमा शाम सात बजे निर्धारित की गई है। जिसके चलते वह लाइब्रेरी, सीसीएफ, स्टेडियम व अन्य महाविद्यालयों के कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने से वंचित रह जाती हैं। यदि उन्हें प्रतिभाग करना हो तो पहले वार्डन से लिखित अनुमति लेनी होती है।

:- छात्रावास में होता है कैदियों सा अहसास... छुट्टी यह कहकर निरस्त कर दी जाती है, कि उन्हें उनकी मंशा का पता है। यह उनके चरित्र पर सीधा आघात है। इसलिए किसी भी छात्रा को अचानक जरूरत पड़ने पर घर जाने में बहुत परेशानी होती है। साथ ही अन्य प्रदेशों की छात्राओं को आसपास की जगहों पर जाने के लिए प्रतिबंधित होने से उन्हें छात्रावास में कैदी होने की अनुभूति होती है।


:- निजता का हो रहा है उल्लंघन... परिसर से बाहर जाने के लिए अवकाश के दिन आवेदन पत्र में एडवाइजर के हस्ताक्षर आवश्यक नहीं हैं, जबकि वह बिना एडवाइजर के हस्ताक्षरित आवेदन पत्र दिए परिसर नहीं छोड़ सकती हैं। बताया कि अधिष्ठाता छात्र कल्याण या छात्रावास प्रबंधन की ओर से बिना कोई नोटिस दिए उनके आने वाले पार्सल्स को जांच के नाम पर खोल दिया जाता है, जिससे उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन होता है।


:- अवकाश स्वीकृत होने की गारंटी नहीं...
छात्रों की शाम को हाजिरी नहीं होने से वह कभी भी परिसर से बाहर जा सकते हैं, जबकि छात्राओं को बाहर जाने के लिए अवकाश होने के बावजूद दो दिन पूर्व परिजनों से वार्ता कराने के बाद एडवाइजर से अग्रसारित करवाकर अवकाश पत्र देना होता है, जिसके स्वीकृत होने की कोई गारंटी नहीं है।
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