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किसानों के लिए जिरेनियम की खेती लाभप्रद : डॉ. त्रिवेदी
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पंतनगर में किसानों को मेंथा की जड़ें वितरित करते सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध त्रिवेदी।
- फोटो : RUDRAPUR
केंद्रीय औषधि एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) में आयोजित दो दिनी किसान गोष्ठी मंगलवार को संपन्न हो गई। सीमैप लखनऊ के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने किसानों से पारंपरिक खेती से इतर जिरेनियम और मेंथा की खेती को लाभप्रद बताया। इस मौके पर चयनित 150 किसानों को जिरेनियम के पौधे और जीएपी-388 परियोजना के तहत करीब 10 क्विंटल जड़ें वितरित की गईं।
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि आज देश में जितनी खपत है, उसका मात्र 10 प्रतिशत ही जिरेनियम तेल का उत्पादन होता है। लगभग 90 प्रतिशत जिरेनियम तेल आयात किया जाता है। इसका बाजार भाव 15-20 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक है। सीमैप ने इसकी विभिन्न प्रजातियां विकसित की हैं। इनकी खेती से किसान लाभ कमाएंगे और जिरेनियम तेल में देश आत्मनिर्भर बन सकता है।
वैज्ञानिक डॉ. वीआर सिंह ने कहा कि मैदान में मेंथा और तुलसी, भाबर में जिरेनियम और सतावर, पर्वतीय क्षेत्रों में गुलाब तथा विदर्भ और बुंदेलखंड जैसे सूखे इलाकों में खस व पामारोजा की खेती की जा सकती है। वैज्ञानिक डॉ. आरके उपाध्याय ने कहा कि आज हम मेंथा ऑयल के उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर आ गए हैं। पंतनगर अनुसंधान केंद्र प्रभारी डॉ. आरसी पडलिया ने कहा कि परंपरागत गेहूं, धान, गन्ना आदि की खेती से किसानों को जीवनयापन की ही आय हो रही है। वहां पर डॉ. सौदान सिंह, डॉ. संजय कुमार, डॉ. आरएस वर्मा, डॉ. दीपेंद्र कुमार, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. वैंकटेश केटी, अमित चौहान थे।
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डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि आज देश में जितनी खपत है, उसका मात्र 10 प्रतिशत ही जिरेनियम तेल का उत्पादन होता है। लगभग 90 प्रतिशत जिरेनियम तेल आयात किया जाता है। इसका बाजार भाव 15-20 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक है। सीमैप ने इसकी विभिन्न प्रजातियां विकसित की हैं। इनकी खेती से किसान लाभ कमाएंगे और जिरेनियम तेल में देश आत्मनिर्भर बन सकता है।
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वैज्ञानिक डॉ. वीआर सिंह ने कहा कि मैदान में मेंथा और तुलसी, भाबर में जिरेनियम और सतावर, पर्वतीय क्षेत्रों में गुलाब तथा विदर्भ और बुंदेलखंड जैसे सूखे इलाकों में खस व पामारोजा की खेती की जा सकती है। वैज्ञानिक डॉ. आरके उपाध्याय ने कहा कि आज हम मेंथा ऑयल के उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर आ गए हैं। पंतनगर अनुसंधान केंद्र प्रभारी डॉ. आरसी पडलिया ने कहा कि परंपरागत गेहूं, धान, गन्ना आदि की खेती से किसानों को जीवनयापन की ही आय हो रही है। वहां पर डॉ. सौदान सिंह, डॉ. संजय कुमार, डॉ. आरएस वर्मा, डॉ. दीपेंद्र कुमार, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. वैंकटेश केटी, अमित चौहान थे।
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