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कर्ज का बोझ तोड़ रहा किसानों के जीवन की डोर
सुनील दिवाकर/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Thu, 13 Jul 2017 12:42 AM IST
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farmar suicide
कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। खटीमा में कर्ज में डूबे किसान की आत्महत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बाजपुर में कर्ज में डूबे एक और किसान ने जान दे दी। बीस दिन के भीतर आत्महत्या की दो घटनाओं ने प्रदेश सरकार को परेशानी में डाल दिया है। कृषक समाज भी ऐसी घटनाओं से सकते में है और आंदोलन की रणनीति बनाने की तैयारी कर रहा है।
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कर्ज में डूबे खटीमा के किसान रामअवतार ने 24 जून को गले में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इस किसान पर दो बैंकों सहित साहूकारों का करीब सात लाख रुपये ऋण था। इसी घटना के बीस दिन के अंतराल में गदरपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव बांसखेड़ी निवासी बलविंदर सिंह ने बुधवार को जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मृतक बलविंदर सिंह सरना पर बेरिया दौलत बैंक का 7 लाख 49 हजार 896 रुपये के अलावा सहकारी समिति और अन्य बैंकों का भी कर्ज था। बलविंदर के पास केवल चार एकड़ कृषि भूमि है। उससे उसके परिवार की अजीविका चल रही थी। खेतीबाड़ी से इतनी कमाई नहीं होती कि वह परिवार के भरण पोषण के साथ बैंक का कर्ज चुका पाता। इसके चलते वह अवसाद में बताया जा रहा था।
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डीएम डॉ. नीरज खैरवाल ने बताया कि बाजपुर के गांव बांसखेड़ी निवासी किसान बलविंदर सिंह सरना की मृत्यु की बात संज्ञान में आई है। इस संबंध में एसडीएम बाजपुर ने जांच की है। घर से कोई सुसाइड नोट नही मिला है। किसान की मौत का कारण कुछ और भी हो सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एसएसपी से इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी से भूमि विवाद, पारिवारिक कलह या स्वास्थ्य संबंधी कारण से मौत जैसे पहलुओं पर जांच करवाने को कहा है।
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