{"_id":"65244b4f31997133680d4304","slug":"dust-hinders-athletes-in-kashipur-stadiam-kashipur-news-c-8-hld1009-240953-2023-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: पदक की कामना और धूल से सामना, एथलीट की परेशानी जानिए यहां...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: पदक की कामना और धूल से सामना, एथलीट की परेशानी जानिए यहां...
Tue, 10 Oct 2023 12:19 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 10 Oct 2023 12:19 AM IST
विज्ञापन
काशीपुर स्टेडियम में बाल्टी से छिडकाव करते धावक। संवाद
- फोटो : Samvad
स्टेडियम में धूल भरे ट्रैक पर दौड़ने के लिए मजबूर धावक, अभ्यास से पहले खुद ही छिड़कते हैं पानी
काशीपुर। यूं तो सरकार खेल और खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के तमाम दावे करते हैं लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। बात अगर काशीपुर के स्टेडियम की करें तो यहां एथलीट को पदक के लिए पसीना बहाने से पहले ट्रैक से उठ रही धूल का सामना करना पड़ता है। कर्मचारी होने के बावजूद खिलाड़ी धूल से बचने के लिए खुद ही ट्रैक पर पानी का छिड़काव करते हैं।
स्टेडियम में विभिन्न खेलों के अलावा एथलेटिक्स का भी प्रशिक्षण दिया जाता हैं। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल भी हो चुके हैं। इसके बावजूद यहां खिलाड़ी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। पहले ही बाहरी लोगों के ट्रैक पर मॉर्निंग वॉक करने से परेशान धावकों को अब इससे उठने वाली धूल का भी सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय बाद भी स्टेडियम में न तो बेहतर ट्रैक बन सका और न छिड़काव के लिए पानी की व्यवस्था ही हुई। अभ्यास के दौरान धूल का गुब्बार उठने से धावकों को दौड़ने में मुश्किल होती है। ऐसे में पदक की कामना लिए अभ्यास करने से पूर्व धावक स्वयं ही धूल से बचने के लिए ट्रैक पर पानी का छिड़काव करते हैं।
विभाग की सुस्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस तरह के कामों के लिए यहां साई के चार और स्टेडियम के दो कर्मचारी तैनात हैं। इस बाबत पूछने पर प्रशिक्षकों का कहना है कि धावकों के वर्कआउट के हिसाब से उनसे पानी का छिड़काव करवाया जाता है। स्टेडियम में तैनात कर्मी नियमित छिड़काव करते है।
विज्ञापन
लाखों की लागत का सबमर्सिबल नहीं हो सका शुरू
लगभग एक साल पहले लाखों की लागत से सबमर्सिबल लगवाया गया था। लेकिन वर्तमान में वह मात्र शोपीस बनकर खड़ा है। इस एक साल के अंतराल में वह नहीं चल सका। बताया जाता है कि ट्रांसफार्मर का लोड कम होने की वजह से सबमर्सिबल चलता नहीं है। स्टेडियम प्रशासन की ओर से ट्रांसफार्मर के लोड को बढ़ाए जाने को लेकर विभाग में लिखित में दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है।
-
स्टेडियम में लोड बढ़ाने के लिए विभाग को निवेदन किया गया है। उसके बाद सबमर्सिबल शुरू किया जाएगा। ग्राउंड मैन कर्मियों को रखरखाव के लिए संबंधित को निर्देशित किया जाएगा। - गिरीश कुमार, प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी
विज्ञापन
काशीपुर। यूं तो सरकार खेल और खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के तमाम दावे करते हैं लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। बात अगर काशीपुर के स्टेडियम की करें तो यहां एथलीट को पदक के लिए पसीना बहाने से पहले ट्रैक से उठ रही धूल का सामना करना पड़ता है। कर्मचारी होने के बावजूद खिलाड़ी धूल से बचने के लिए खुद ही ट्रैक पर पानी का छिड़काव करते हैं।
स्टेडियम में विभिन्न खेलों के अलावा एथलेटिक्स का भी प्रशिक्षण दिया जाता हैं। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल भी हो चुके हैं। इसके बावजूद यहां खिलाड़ी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। पहले ही बाहरी लोगों के ट्रैक पर मॉर्निंग वॉक करने से परेशान धावकों को अब इससे उठने वाली धूल का भी सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय बाद भी स्टेडियम में न तो बेहतर ट्रैक बन सका और न छिड़काव के लिए पानी की व्यवस्था ही हुई। अभ्यास के दौरान धूल का गुब्बार उठने से धावकों को दौड़ने में मुश्किल होती है। ऐसे में पदक की कामना लिए अभ्यास करने से पूर्व धावक स्वयं ही धूल से बचने के लिए ट्रैक पर पानी का छिड़काव करते हैं।
विज्ञापन
विभाग की सुस्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस तरह के कामों के लिए यहां साई के चार और स्टेडियम के दो कर्मचारी तैनात हैं। इस बाबत पूछने पर प्रशिक्षकों का कहना है कि धावकों के वर्कआउट के हिसाब से उनसे पानी का छिड़काव करवाया जाता है। स्टेडियम में तैनात कर्मी नियमित छिड़काव करते है।
विज्ञापन
लाखों की लागत का सबमर्सिबल नहीं हो सका शुरू
लगभग एक साल पहले लाखों की लागत से सबमर्सिबल लगवाया गया था। लेकिन वर्तमान में वह मात्र शोपीस बनकर खड़ा है। इस एक साल के अंतराल में वह नहीं चल सका। बताया जाता है कि ट्रांसफार्मर का लोड कम होने की वजह से सबमर्सिबल चलता नहीं है। स्टेडियम प्रशासन की ओर से ट्रांसफार्मर के लोड को बढ़ाए जाने को लेकर विभाग में लिखित में दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है।
-
स्टेडियम में लोड बढ़ाने के लिए विभाग को निवेदन किया गया है। उसके बाद सबमर्सिबल शुरू किया जाएगा। ग्राउंड मैन कर्मियों को रखरखाव के लिए संबंधित को निर्देशित किया जाएगा। - गिरीश कुमार, प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी