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रुपयों के लालच में दोस्त की हत्या करने वाले तीन आरोपियों को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर
Updated Fri, 01 Jun 2018 12:24 AM IST
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court
सात साल पहले काशीपुर में रुपये के लालच में दोस्त को मौत के घाट उतारने वाले तीन आरोपियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपियों पर 60-60 हजार रुपयों का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड नहीं चुकाने पर उनको अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
जानकारी के अनुसार ग्राम हेमपुर स्माइल निवासी रामचंद्र ने काशीपुर कोतवाली में 31 दिसंबर 2011 को अपने बेटे सुनील (18) की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसी बीच 15 जनवरी 2012 को अज्ञात नंबर से रामचंद्र को फोन आया था। फोन करने वाले ने बेटे को छोड़ने की एवज में 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। रामचंद्र ने सुनील के तीन दोस्तों पर शक जताते हुए तहरीर पुलिस को सौंपी थी। पुलिस ने हेमपुर स्माइल गांव के रहने वाले शेर और गुड्डू को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की थी तो आरोपियों ने रुपये के लालच में सुनील की हत्या कर शव को बोरे में बांधकर बहल्ला नदी में फेंकने की बात स्वीकारी थी। इसके बाद पुलिस ने शव बरामद कर लिया था। पुलिस ने एक महीने के बाद ही तीसरे आरोपी सुखराम को भी गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम की कोर्ट मेें चल रही थी। शासकीय अधिवक्ता दीपक अरोड़ा ने पुख्ता सबूतों के साथ ही आठ गवाह पेश किया। एडीजे प्रथम संजीव कुमार ने दोनों पक्षों के तर्क और गवाहों को सुनने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों आरोपियों पर अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड नहीं चुकाने पर आरोपियों को एक-एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
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जानकारी के अनुसार ग्राम हेमपुर स्माइल निवासी रामचंद्र ने काशीपुर कोतवाली में 31 दिसंबर 2011 को अपने बेटे सुनील (18) की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसी बीच 15 जनवरी 2012 को अज्ञात नंबर से रामचंद्र को फोन आया था। फोन करने वाले ने बेटे को छोड़ने की एवज में 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। रामचंद्र ने सुनील के तीन दोस्तों पर शक जताते हुए तहरीर पुलिस को सौंपी थी। पुलिस ने हेमपुर स्माइल गांव के रहने वाले शेर और गुड्डू को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की थी तो आरोपियों ने रुपये के लालच में सुनील की हत्या कर शव को बोरे में बांधकर बहल्ला नदी में फेंकने की बात स्वीकारी थी। इसके बाद पुलिस ने शव बरामद कर लिया था। पुलिस ने एक महीने के बाद ही तीसरे आरोपी सुखराम को भी गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम की कोर्ट मेें चल रही थी। शासकीय अधिवक्ता दीपक अरोड़ा ने पुख्ता सबूतों के साथ ही आठ गवाह पेश किया। एडीजे प्रथम संजीव कुमार ने दोनों पक्षों के तर्क और गवाहों को सुनने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों आरोपियों पर अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड नहीं चुकाने पर आरोपियों को एक-एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
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