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Udham Singh Nagar News: बिजली तो बन गई लेकिन आय का जरिया बनना है अभी अधूरा
Sat, 25 Nov 2023 12:37 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 25 Nov 2023 12:37 AM IST
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रुद्रपुर में सीबीजी प्लांट
- फोटो : Samvad
सीबीजी प्लांट में कूड़े से नहीं बन पा रही अतिरिक्त सीएनजी
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। राज्य के पहले कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट (सीबीजी) में कचरे से सीएनजी और इससे बिजली बनाई जा रही है। हालांकि प्लांट में अतिरिक्त सीएनजी नहीं बन पा रही है, जिसे बेचकर कंपनी इसे आय का जरिया बना सके।
सीबीजी प्लांट में सिडकुल की कंपनी की कैंटीन से निकला फूड वेस्ट और लोगों के घरों से निकले गीले कूड़े का निपटारा कर सीएनजी तैयार की जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक प्लांट में अब तक 300 फूड वेस्ट, 852.55 टन गोबर डालकर 31885.2 घनमीटर से भी अधिक सीएनजी का उत्पादन हो चुका है।
बताया गया कि 300 टन जैविक खाद और चार लाख लीटर जैविक तरल खाद बनाई जा चुकी है। यह खाद किसानों में निशुल्क बांटी जा रही है। ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से आठ करोड़ रुपये की लागत से प्लांट की स्थापना की गई है। नगर निगम को कूड़े के एवज में कंपनी प्रति माह 24,000 रुपये दे रही है। 25 वर्ष बाद कंपनी प्लांट को नगर निगम को हस्तांतरित कर देगी। इसके बाद निगम को एक रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रतिमाह की दर से छह एकड़ भूमि की रॉयल्टी देगी।
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कोट-
प्लांट में अभी तक अतिरिक्त सीएनजी नहीं बन पा रही है, जिसे बाहर बेचा जा सके। उम्मीद है कि ज्यादा कूड़ा आने के बाद प्लांट से अतिरिक्त सीएनजी तैयार की जा सके। -विकास कुमार, प्रभारी, ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। राज्य के पहले कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट (सीबीजी) में कचरे से सीएनजी और इससे बिजली बनाई जा रही है। हालांकि प्लांट में अतिरिक्त सीएनजी नहीं बन पा रही है, जिसे बेचकर कंपनी इसे आय का जरिया बना सके।
सीबीजी प्लांट में सिडकुल की कंपनी की कैंटीन से निकला फूड वेस्ट और लोगों के घरों से निकले गीले कूड़े का निपटारा कर सीएनजी तैयार की जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक प्लांट में अब तक 300 फूड वेस्ट, 852.55 टन गोबर डालकर 31885.2 घनमीटर से भी अधिक सीएनजी का उत्पादन हो चुका है।
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बताया गया कि 300 टन जैविक खाद और चार लाख लीटर जैविक तरल खाद बनाई जा चुकी है। यह खाद किसानों में निशुल्क बांटी जा रही है। ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से आठ करोड़ रुपये की लागत से प्लांट की स्थापना की गई है। नगर निगम को कूड़े के एवज में कंपनी प्रति माह 24,000 रुपये दे रही है। 25 वर्ष बाद कंपनी प्लांट को नगर निगम को हस्तांतरित कर देगी। इसके बाद निगम को एक रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रतिमाह की दर से छह एकड़ भूमि की रॉयल्टी देगी।
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कोट-
प्लांट में अभी तक अतिरिक्त सीएनजी नहीं बन पा रही है, जिसे बाहर बेचा जा सके। उम्मीद है कि ज्यादा कूड़ा आने के बाद प्लांट से अतिरिक्त सीएनजी तैयार की जा सके। -विकास कुमार, प्रभारी, ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड।