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Tehri News: पर्यावरण संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका अहम
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डालियों का दगड़िया संस्था (डीकेडी) की ओर से जलवायु परिर्वतन के कारण खेती और हिमालय पर पड़ रहे दुष्प्रभाव के कारणों पर कार्यशाला आयोजित की गई। बताया गया कि परंपरागत पद्धति को आधार मानकर पर्यावरण को संरक्षित किया जा सकता है। साथ ही जलवायु के अनुरूप खेती करने की भी जरूरत है।
शुक्रवार को न्यू टिहरी प्रेस क्लब में आयोजित कार्यशाला में जिला विकास अधिकारी मोहम्मद असलम ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों का उपयोग कर पर्यावरण और जलवायु का संरक्षण किया जा सकता है। इसके लिए मनरेगा से लेकर अन्य सरकारी संसाधन भी उपयोग किया सकता है। उन्होंने कहा कि अमृत सरोवर और जल स्रोतों के संवर्धन और पौधरोपण के लिए भी मनरेगा से काम हो रहे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी के प्रभारी डॉ. आलोक यावले ने कहा कि किसानों के लिए किसान सम्मान निधि, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फसल बीमा सहित योजनाएं चलाई जा रही है। डीकेडी के सचिव डॉ. मोहन सिंह पंवार ने कहा कि संस्थान जलवायु परिवर्तन के अनुकूल समायोजन के लिए जाखणीधार ब्लाक के 15 गांव में कलस्टर बनाकर बीएमजेड जर्मनी, टीडीएच और राड्स के सहयोग से कार्य कर रहा है।
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हितायु के सचिव दिवाकर पैन्यूली, धारकोट की प्रधान निवेदिता परमार, मंदार के पूर्व प्रधान ध्यान सिंह रावत ने भी पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन को लेकर अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण समुदाय की सहभागिता के कारण ही पर्यावरण सुरक्षित है। ग्रामीण अपनी जरूरत के अनुरूप वनों का दोहन कर उन्हें आग से भी बचाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों से खेती सुरक्षा के लिए उपाय करने जरूरत है। कार्यशाला में पर्यावरण एवं जन विकास समिति के अध्यक्ष जयवीर रावत, आशाराम ममगाईं, आयुष कठियाल, भगवान सिंह, जगदीश बडोनी, आशा भद्री, उर्मिला भट्ट, विजय लक्ष्मी, ममता देवी, कृष्णा रावत, काजल बगियाल, शैला बगियाल, सतीमा देवी और विजय सिंह आदि मौजूद थे।
शुक्रवार को न्यू टिहरी प्रेस क्लब में आयोजित कार्यशाला में जिला विकास अधिकारी मोहम्मद असलम ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों का उपयोग कर पर्यावरण और जलवायु का संरक्षण किया जा सकता है। इसके लिए मनरेगा से लेकर अन्य सरकारी संसाधन भी उपयोग किया सकता है। उन्होंने कहा कि अमृत सरोवर और जल स्रोतों के संवर्धन और पौधरोपण के लिए भी मनरेगा से काम हो रहे हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी के प्रभारी डॉ. आलोक यावले ने कहा कि किसानों के लिए किसान सम्मान निधि, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फसल बीमा सहित योजनाएं चलाई जा रही है। डीकेडी के सचिव डॉ. मोहन सिंह पंवार ने कहा कि संस्थान जलवायु परिवर्तन के अनुकूल समायोजन के लिए जाखणीधार ब्लाक के 15 गांव में कलस्टर बनाकर बीएमजेड जर्मनी, टीडीएच और राड्स के सहयोग से कार्य कर रहा है।
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हितायु के सचिव दिवाकर पैन्यूली, धारकोट की प्रधान निवेदिता परमार, मंदार के पूर्व प्रधान ध्यान सिंह रावत ने भी पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन को लेकर अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण समुदाय की सहभागिता के कारण ही पर्यावरण सुरक्षित है। ग्रामीण अपनी जरूरत के अनुरूप वनों का दोहन कर उन्हें आग से भी बचाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों से खेती सुरक्षा के लिए उपाय करने जरूरत है। कार्यशाला में पर्यावरण एवं जन विकास समिति के अध्यक्ष जयवीर रावत, आशाराम ममगाईं, आयुष कठियाल, भगवान सिंह, जगदीश बडोनी, आशा भद्री, उर्मिला भट्ट, विजय लक्ष्मी, ममता देवी, कृष्णा रावत, काजल बगियाल, शैला बगियाल, सतीमा देवी और विजय सिंह आदि मौजूद थे।