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Tehri News: रासो-तांदी नृत्य और मछली आखेट के साथ मनाया मौण मेला
Sat, 27 Jun 2026 07:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sat, 27 Jun 2026 07:35 PM IST
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मछली पकड़ने को अगलाड़ नदी में पहुंचे लोग
नैनबाग (टिहरी)। जौनपुर ब्लॉक क्षेत्र का ऐतिहासिक राज मौण मेला धूमधाम से मनाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने अगलाड़ नदी में मछलियां पकड़ी और ढोल-दमाऊं की थाप पर जमकर रासो, तांदी नृत्य किया।
शनिवार को नैनबाग क्षेत्र की अगलाड़ नदी में जौनपुर का राज मौण मेला हर्षोल्लास से मनाया गया। मौण मेले में भारी संख्या में लोग पहुंचे और उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। अगलाड़ नदी में पानी का बहाव तेज होने के कारण लोगों को मछलियां पकड़ने में काफी परेशानी आई। बावजूद इसके लोगों ने खूब मछलियां पकड़ी।
इस बार के मौण मेले के पांतीदार अठजुला पट्टी के ग्रामीणों ने परंपरा के अनुसार टिमरू का पाउडर मौण एक साथ नदी में डाला। इस पाउडर से मछलियों के बेहोश होने पर हजारों की संख्या में लोगों ने मछलियां पकड़ी। ऐतिहासिक राजमौण मेला टिहरी नरेश के समय से संचालित होता आ रहा है।
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स्थानीय निवासी बुजुर्ग आशाराम नौटियाल, मोहन लाल कवि, बृजलाल कवि, महिशानंद कवि, शरण सिंह पंवार का कहना है कि टिहरी नरेश खुद रानी के साथ मौण मेले में आते थे। मौण मेले की अनेक विशेषताओं के साथ-साथ अनोखी पहचान है। आपसी भाईचारा, मेल-मिलाप और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के तहत लोग मौण का मेला मनाते हैं। जौनपुर के अलावा जौनसार, विकासनगर, रवाईं आदि क्षेत्र के लोगों ने मौण मेले में प्रतिभाग किया। इस मौके पर मेला समिति के अध्यक्ष महिपाल सजवाण, राकेश राणा, शरण सिंह पवार, प्रदीप कवि, गंभीर रावत, वीरेंद्र सिंह, गुड्डू चौहान, प्रवीण चौहान, अर्जुन रावत, रणवीर सिंह रावत, विरेश कवि मौजूद रहे।
यह है टिमरू के पाउडर की विशेषता
मौण मेले में टिमरू का पाउडर तैयार करने के लिए प्रत्येक वर्ष क्षेत्र के अलग-अलग गांव को इसकी जिम्मेदारी दी जाती है जिन्हें मौण के पांतीदार कहा जाता है। उनके द्वारा एक महीने पहले से ही टिमरू के पत्तों, बीज तनों की छाल को एकत्रित कर धूप में सुखाया जाता है। हल्की आंच में भूनकर घराट में बारीक पीसकर पाउडर मौण मेले के लिए तैयार किया जाता है। मौण मेले के पांतीदारों द्वारा पूरे जौनपुरी पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ढोल-दमाऊं, रणसिंगा के साथ तांदी रासो नृत्य कर मौण मेले में पहुंचते हैं। टिमरू का पाउडर मौण कोठ नामक स्थान से अगलाड़ नदी में डाला जाता है। इसके बाद नदी में भारी संख्या में बच्चे और युवा नदी की धाराओं के साथ-साथ मछलियों को पकड़ते हैं। टिमरू का पाउडर जलीय जीवों को नुकसान नहीं पहुंचता है। इसके डालने के बाद कुछ समय के लिए मछलियां बेहोश हो जाती।
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नैनबाग (टिहरी)। जौनपुर ब्लॉक क्षेत्र का ऐतिहासिक राज मौण मेला धूमधाम से मनाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने अगलाड़ नदी में मछलियां पकड़ी और ढोल-दमाऊं की थाप पर जमकर रासो, तांदी नृत्य किया।
शनिवार को नैनबाग क्षेत्र की अगलाड़ नदी में जौनपुर का राज मौण मेला हर्षोल्लास से मनाया गया। मौण मेले में भारी संख्या में लोग पहुंचे और उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। अगलाड़ नदी में पानी का बहाव तेज होने के कारण लोगों को मछलियां पकड़ने में काफी परेशानी आई। बावजूद इसके लोगों ने खूब मछलियां पकड़ी।
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इस बार के मौण मेले के पांतीदार अठजुला पट्टी के ग्रामीणों ने परंपरा के अनुसार टिमरू का पाउडर मौण एक साथ नदी में डाला। इस पाउडर से मछलियों के बेहोश होने पर हजारों की संख्या में लोगों ने मछलियां पकड़ी। ऐतिहासिक राजमौण मेला टिहरी नरेश के समय से संचालित होता आ रहा है।
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स्थानीय निवासी बुजुर्ग आशाराम नौटियाल, मोहन लाल कवि, बृजलाल कवि, महिशानंद कवि, शरण सिंह पंवार का कहना है कि टिहरी नरेश खुद रानी के साथ मौण मेले में आते थे। मौण मेले की अनेक विशेषताओं के साथ-साथ अनोखी पहचान है। आपसी भाईचारा, मेल-मिलाप और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के तहत लोग मौण का मेला मनाते हैं। जौनपुर के अलावा जौनसार, विकासनगर, रवाईं आदि क्षेत्र के लोगों ने मौण मेले में प्रतिभाग किया। इस मौके पर मेला समिति के अध्यक्ष महिपाल सजवाण, राकेश राणा, शरण सिंह पवार, प्रदीप कवि, गंभीर रावत, वीरेंद्र सिंह, गुड्डू चौहान, प्रवीण चौहान, अर्जुन रावत, रणवीर सिंह रावत, विरेश कवि मौजूद रहे।
यह है टिमरू के पाउडर की विशेषता
मौण मेले में टिमरू का पाउडर तैयार करने के लिए प्रत्येक वर्ष क्षेत्र के अलग-अलग गांव को इसकी जिम्मेदारी दी जाती है जिन्हें मौण के पांतीदार कहा जाता है। उनके द्वारा एक महीने पहले से ही टिमरू के पत्तों, बीज तनों की छाल को एकत्रित कर धूप में सुखाया जाता है। हल्की आंच में भूनकर घराट में बारीक पीसकर पाउडर मौण मेले के लिए तैयार किया जाता है। मौण मेले के पांतीदारों द्वारा पूरे जौनपुरी पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ढोल-दमाऊं, रणसिंगा के साथ तांदी रासो नृत्य कर मौण मेले में पहुंचते हैं। टिमरू का पाउडर मौण कोठ नामक स्थान से अगलाड़ नदी में डाला जाता है। इसके बाद नदी में भारी संख्या में बच्चे और युवा नदी की धाराओं के साथ-साथ मछलियों को पकड़ते हैं। टिमरू का पाउडर जलीय जीवों को नुकसान नहीं पहुंचता है। इसके डालने के बाद कुछ समय के लिए मछलियां बेहोश हो जाती।