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Tehri News: हाईवे चौड़ीकरण से टूटी नहर, डेढ़ दशक में भी नहीं बनी
Sun, 13 Oct 2024 07:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sun, 13 Oct 2024 07:31 PM IST
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कंडीसौड़ (टिहरी)। थौलधार ब्लाॅक के डोभन गांव में सिंचाई सुविधा बहाल नहीं होने से काश्तकार निराश हैं। वर्ष 2005-06 में चंबा-धरासू हाईवे के चौड़ीकरण के दौरान नहर क्षतिग्रस्त होने के बाद से ग्रामीण लगातार नहर की मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति रोष है। उन्होंने विभाग को भेजे ज्ञापन में नहर की मरम्मत कर सिंचाई सुविधा बहाल करने की मांग की है।
नगुण पट्टी में डोभन गांव के लिए वर्ष 1985 में सिंचाई नहर बनाई थी, जिससे काश्तकारी खेतों की सिंचाई कर अच्छा उत्पादन कर रहे थे। वर्ष 2005-06 के दौरान चंबा-धरासू हाईवे का चौड़ीकरण के दौरान गांव की नहर भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। उसके बाद से काश्तकार बगैर सिंचाई के ही खेतीबाड़ी कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि नहर क्षतिग्रस्त होने के बाद कई सालों तक सिंचाई विभाग और एनएच से पत्राचार कर नहर की मरम्मत करने की गुहार लगाते रहे, लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हो पाई है। गांव के प्रगतिशील किसान मुकुंद राम नौटियाल ने बताया कि उन्होंने अपने बगीचे में कई प्रकार के फलों के पेड़ और हर सीजन में नकदी फसल उगाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। सिंचाई की सुविधा मिल जाती तो ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती।
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नहर की मरम्मत करने के लिए सिंचाई विभाग, एनएच और बीआरओ से मांग करते आ रहे हैं, लेकिन 20 साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले उनके बगीचे देखने पहुंचे सिंचाई सचिव सेंथिल पांडियन ने भी नहर बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी हालत जस के तस हैं। इससे उन्हें बरसाती पानी से ही काम चलाना पड़ रहा है।
गांव के प्रधान सुरेश नौटियाल ने बताया कि गांव में कई लोग मुकुंद राम से प्रेरित होकर बगीचा लगाने के साथ ही नकदी फसल उगाना चाहते हैं, लेकिन सिंचाई सुविधा नहीं होने से वह काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने विभाग को भेजे ज्ञापन में नहर की मरम्मत कराने की मांग की है।
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नगुण पट्टी में डोभन गांव के लिए वर्ष 1985 में सिंचाई नहर बनाई थी, जिससे काश्तकारी खेतों की सिंचाई कर अच्छा उत्पादन कर रहे थे। वर्ष 2005-06 के दौरान चंबा-धरासू हाईवे का चौड़ीकरण के दौरान गांव की नहर भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। उसके बाद से काश्तकार बगैर सिंचाई के ही खेतीबाड़ी कर रहे हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि नहर क्षतिग्रस्त होने के बाद कई सालों तक सिंचाई विभाग और एनएच से पत्राचार कर नहर की मरम्मत करने की गुहार लगाते रहे, लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हो पाई है। गांव के प्रगतिशील किसान मुकुंद राम नौटियाल ने बताया कि उन्होंने अपने बगीचे में कई प्रकार के फलों के पेड़ और हर सीजन में नकदी फसल उगाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। सिंचाई की सुविधा मिल जाती तो ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती।
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नहर की मरम्मत करने के लिए सिंचाई विभाग, एनएच और बीआरओ से मांग करते आ रहे हैं, लेकिन 20 साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले उनके बगीचे देखने पहुंचे सिंचाई सचिव सेंथिल पांडियन ने भी नहर बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी हालत जस के तस हैं। इससे उन्हें बरसाती पानी से ही काम चलाना पड़ रहा है।
गांव के प्रधान सुरेश नौटियाल ने बताया कि गांव में कई लोग मुकुंद राम से प्रेरित होकर बगीचा लगाने के साथ ही नकदी फसल उगाना चाहते हैं, लेकिन सिंचाई सुविधा नहीं होने से वह काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने विभाग को भेजे ज्ञापन में नहर की मरम्मत कराने की मांग की है।