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धनोल्टी और घनसाली में बागी को मनाने में नाकाम रही भाजपा
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जिले की धनोल्टी और घनसाली विधानसभा सीटों पर भाजपा बागी प्रत्याशियों को मनाने में नाकाम रही है। वहीं घनसाली में कांग्रेस के बागी ने पार्टी नेताओं की मुसीबतें बढ़ा दी है। पिछले दो दिन से दोनों विधानसभा क्षेत्रों में पार्टियों के बड़े नेता डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए थे, लेकिन अभी तक की सभी कोशिशें नाकाम साबित हो रही है।
भाजपा प्रभाव वाली घनसाली विधानसभा सीट पर पार्टी के बागी दर्शन लाल आर्य और सोहन लाल खंडेलवाल ने निर्दलीय नामांकन कराया था, लेकिन नाम वापसी के अंतिम दिन खंडेलवाल ने नामांकन वापस ले लिया है। जिससे भाजपा को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ के संयोजक दर्शन लाल आर्य अब भी चुनाव मैदान में डटे हैं। इस स्थिति में घनसाली विधानसभा सीट पर भाजपा में भीतरघात की संभावना प्रबल बनी हुई है। क्योंकि पार्टी संगठन के कुछ कार्यकर्ता आर्य के चुनाव प्रचार में सक्रिय है। घनसाली विधानसभा सीट पर कांग्रेस की मुसीबतें भी कम नहीं हो पाई है। टिकट न मिलने से नाराज पूर्व विधायक भीम लाल आर्य ने नामांकन वापस नहीं लिया। उन्हें मनाने की कांग्रेस की सभी कोशिशें अंत तक भी नाकाम साबित हुई है। कांग्रेस को भी घनसाली में भीतरघात का डर सता रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश राणा ने बताया कि पार्टी के बड़े नेताओं ने आर्य से कई दौर की वार्ता की, लेकिन वह नहीं माने।
सबसे अधिक दिलचस्प स्थिति धनोल्टी विधानसभा सीट पर बनी हुई है। टिकट न मिलने से खफा पूर्व विधायक महावीर सिंह रागड़ निर्दलीय चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। रांगड़ के साथ पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता चुनाव प्रचार अभियान में जुटे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष विनोद रतूड़ी ने बताया कि रांगड़ से सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वार्ता की, लेकिन उन्हें मनाने की सभी कोशिशें नाकाम रही। डैमेज कंट्रोल रोकने के लिए पार्टी संगठन हर सीट पर नजर बनाए हुए है।
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भाजपा प्रभाव वाली घनसाली विधानसभा सीट पर पार्टी के बागी दर्शन लाल आर्य और सोहन लाल खंडेलवाल ने निर्दलीय नामांकन कराया था, लेकिन नाम वापसी के अंतिम दिन खंडेलवाल ने नामांकन वापस ले लिया है। जिससे भाजपा को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ के संयोजक दर्शन लाल आर्य अब भी चुनाव मैदान में डटे हैं। इस स्थिति में घनसाली विधानसभा सीट पर भाजपा में भीतरघात की संभावना प्रबल बनी हुई है। क्योंकि पार्टी संगठन के कुछ कार्यकर्ता आर्य के चुनाव प्रचार में सक्रिय है। घनसाली विधानसभा सीट पर कांग्रेस की मुसीबतें भी कम नहीं हो पाई है। टिकट न मिलने से नाराज पूर्व विधायक भीम लाल आर्य ने नामांकन वापस नहीं लिया। उन्हें मनाने की कांग्रेस की सभी कोशिशें अंत तक भी नाकाम साबित हुई है। कांग्रेस को भी घनसाली में भीतरघात का डर सता रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश राणा ने बताया कि पार्टी के बड़े नेताओं ने आर्य से कई दौर की वार्ता की, लेकिन वह नहीं माने।
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सबसे अधिक दिलचस्प स्थिति धनोल्टी विधानसभा सीट पर बनी हुई है। टिकट न मिलने से खफा पूर्व विधायक महावीर सिंह रागड़ निर्दलीय चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। रांगड़ के साथ पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता चुनाव प्रचार अभियान में जुटे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष विनोद रतूड़ी ने बताया कि रांगड़ से सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वार्ता की, लेकिन उन्हें मनाने की सभी कोशिशें नाकाम रही। डैमेज कंट्रोल रोकने के लिए पार्टी संगठन हर सीट पर नजर बनाए हुए है।
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