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जून तक बन जाएगा जीओ टेक्सटाइल स्नानघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Fri, 06 May 2016 09:14 PM IST
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June will become the bathing ghats, Geo-textile
- फोटो : amarujala
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केदारनाथ में मंदाकिनी और सरस्वती नदी के संगम पर जीओ टेक्सटाइल तकनीकी से बनाया जा रहा स्नानघाट जून माह में बनकर तैयार हो जाएगा।
आईआईटी रुड़की के डिजायन और सीबीआरआई की संस्तुति से नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने बीते वर्ष जुलाई से धाम में स्नानघाट का निर्माण शुरू किया था। दो सौ मीटर लंबे स्नान घाट का काम अब अंतिम चरण में है। स्नान घाट के निर्माण में विदेशों में अधिक बर्फ और बारिश वाले स्थानों में उपयोग होने वाली जीओ टेक्सटाइल तकनीक का उपयोग हो रहा है।
सीढ़ियों और फर्श पर भी इसी तकनीक से पत्थर बिछाए जा रहे हैं। यहां महिला व पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग स्नानघर व शौचालय का भी निर्माण किया जाना है। इस सुविधा से जून माह से धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को नदी में स्नान, कर्मकांड और अन्य कार्यों के लिए दिक्कत नहीं होगी।
ये है जीओ टेक्सटाइल
पॉली बेनायल फ्लोराइड से बनी कपड़े जैसी पतली चादर को जीओ टेक्सटाइल कहा जाता है। यह बर्फ और ज्यादा पानी वाले स्थानों पर होने वाले निर्माण कार्यो में उपयोग में लाई जाती है। मिट्टी पर मजबूत पकड़ बनाने वाला टेक्सटाइल से निर्माण में परत-दर परत पॉली बेनायल फ्लोरायड और मिट्टी की परत बिछाई जाती हैं।
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स्नान घाट के निर्माण में पूरी तरह से वैज्ञानिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि जून में स्नानघाट को तैयार कर दिया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को लाभ मिल सके। - कर्नल अजय कोठियाल, प्राचार्य निम
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आईआईटी रुड़की के डिजायन और सीबीआरआई की संस्तुति से नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने बीते वर्ष जुलाई से धाम में स्नानघाट का निर्माण शुरू किया था। दो सौ मीटर लंबे स्नान घाट का काम अब अंतिम चरण में है। स्नान घाट के निर्माण में विदेशों में अधिक बर्फ और बारिश वाले स्थानों में उपयोग होने वाली जीओ टेक्सटाइल तकनीक का उपयोग हो रहा है।
सीढ़ियों और फर्श पर भी इसी तकनीक से पत्थर बिछाए जा रहे हैं। यहां महिला व पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग स्नानघर व शौचालय का भी निर्माण किया जाना है। इस सुविधा से जून माह से धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को नदी में स्नान, कर्मकांड और अन्य कार्यों के लिए दिक्कत नहीं होगी।
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ये है जीओ टेक्सटाइल
पॉली बेनायल फ्लोराइड से बनी कपड़े जैसी पतली चादर को जीओ टेक्सटाइल कहा जाता है। यह बर्फ और ज्यादा पानी वाले स्थानों पर होने वाले निर्माण कार्यो में उपयोग में लाई जाती है। मिट्टी पर मजबूत पकड़ बनाने वाला टेक्सटाइल से निर्माण में परत-दर परत पॉली बेनायल फ्लोरायड और मिट्टी की परत बिछाई जाती हैं।
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स्नान घाट के निर्माण में पूरी तरह से वैज्ञानिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि जून में स्नानघाट को तैयार कर दिया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को लाभ मिल सके। - कर्नल अजय कोठियाल, प्राचार्य निम