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गौरीकुंड हाईवे पर हैं कई डेंजर जोन
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Fri, 27 May 2016 10:25 PM IST
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76 किमी लंबे रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर डेंजर जोन की भरमार है। जून 2013 की आपदा के बाद से राजमार्ग की स्थिति नहीं सुधर पाई है। कम चौड़ाई होने से कई स्थानों पर छोटे वाहनों को भी पास होने में भी खासी दिक्कतें हो रही हैं। इस वर्ष यात्रा तैयारियों के नाम पर किए गए सुधार कार्यों के बावजूद बीते दिनों हुई बारिश से कई स्थानों पर पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा बढ़ गया है।
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बीआरओ के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड लोनिवि के अधीन होने के बाद भी नाममात्र का सुधार हुआ है। इस राजमार्ग पर सबसे बड़ी दिक्कत चौड़ीकरण नहीं होना है। ऐसे में अगस्त्यमुनि से कुंड तक करीब 20 किमी मार्ग पर छोटे वाहनों को भी पास होने में दिक्कत हो रही है।
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यहां नदी और सड़क के बीच दूरी बमुश्किल 10 से 15 मीटर होने से यहां कई डेंजर जो बन गए हैं। रामपुर और खाट गांव के समीप भू-धंसाव से मार्ग बदहाल हो रहा है। पिछले तीन वर्ष में इन स्थानों पर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं है।
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दूसरी तरफ सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच भी हालात अच्छे नहीं हैं। मुनकटिया में जहां भूस्खलन जोन है। वहीं आगे मार्ग संकरा होने और ऊपरी तरफ झुकी पहाड़ियों के बरसात में ढहने का खतरा बना है।
केदारनाथ हाईवे पर डेंजर जोन
बाईपास के निकट, भटवाड़ी सैंण, सिल्ली, विजयनगर, बांसवाड़ा, अंधेरगढ़ी, चंद्रापुरी, कुंड, सेमी, रामपुर, खाट, बडासू।
चारधाम प्रोजेक्ट के तहत रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग का स्थायी सुधार होना है। इसमें सड़क चौड़ीकरण भी शामिल है। भूस्खलन जोन का स्थायी ट्रीटमेंट भी होना है। ये सभी कार्य चरणबद्ध तरीके से होने हैं। इन हालात में वर्तमान में हमारे द्वारा मार्ग पर हल्के सुधार कार्य ही किए गए हैं।
- प्रवीन कुमार, ईई नेशनल हाईवे, निर्माण खंड रुद्रप्रयाग
तेज गति और रात की ड्राइविंग दुर्घटना की वजह
श्रीनगर। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और वैकल्पिक यात्रा मार्ग मलेथा-टिहरी मोटर मार्ग पर ज्यादातर दुर्घटनाएं मानवीय भूल से हुई हैं। कतिपय दुर्घटनाएं ऐसे स्थानों पर हुई हैं, जहां सड़क काफी चौड़ी थी। वहीं तेज गति से दौड़ रहे वाहन पर चालक काबू नहीं रख पाते हैं और मोड़ों पर खाई में जा गिरते हैं।
रात के वक्त काफी दुर्घटनाएं हुई हैं। इन दुर्घटनाओं में कई जाने गई हैं। मूल्यागांव, चिलंगा मोड़, सौड़पानी, पंतगांव और तोताघाटी में रात के वक्त कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। 26 मार्च को एसडीआरएफ के चार जवानों और 11 मई को तीन पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी।
सभी लोग रात के वक्त निजी वाहनों में सफर कर रहे थे। राजमार्ग के चौड़ा होने के बाद वाहन चालक काफी तेजी से वाहन चला रहे हैं। इसी सप्ताह मूल्यागांव के समीप दो बसें आपस में भिड़ गई। इसमें 21 लोग घायल हुए। दुर्घटना का कारण ओवरटेक, लापरवाही से वाहन चलाना और ओवर स्पीड रहा।
बस और टैक्सी चालकों में सवारियां बैठाने की होड़ भी जान पर भारी पड़ती है। निर्धारित स्टेशनों में कौन जल्दी पहुंचकर यात्री बैठाएगा। इस फेर में वाहन चालक काफी तेज गति से वाहन दौड़ाते हैं, जबकि ट्रकों की दुर्घटना का कारण ओवरलोडिंग या वाहन चालकों के नशे में रहना रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर तोताघाटी ऐसा स्थान है, जो दशकों से खतरनाक बना हुआ है। यहां तीव्र ढलान, तीखा मोड़ और संकरी सड़क को सुधारा नहीं जा सका है।
खतरनाक सड़कों पर भी ओवर लोडिंग
गोपेश्वर। चमोली जिले में संपर्क मार्गों पर वाहनों में ओवर लोडिंग थम नहीं रही है। कई बार ओवर लोडिंग दुर्घटना का कारण भी बन रहा है। बीते वर्ष पोखरी में हुई दो दुर्घटनाएं भी ओवर लोडिंग के चलते हुई थी। पोखरी-हापला मार्ग पर जीप में पंद्रह लोग सवार थे, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर निगोल नदी में समा गया था।
पिछले वर्ष ही जून माह में कनकचौंरी-रौता सड़क पर हुई मारुति वैन दुर्घटना में भी ओवर लोडिंग का मामला सामने आया था। कार में 14 सवारियां थी, जिसमें से चार की मौत हो गई थी। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले कई संपर्क मार्ग मौजूदा समय में खतरनाक बने हुए हैं।
पीएमजीएसवाई और एडीबी के अधीन की सड़कें सबसे अधिक खस्ता हाल में हैं। इन सड़कों पर ओवर लोडिंग से वाहन चालक परहेज नहीं करते। चार धाम यात्रा के चलते कई स्थानीय वाहन भी यात्रा में लगे हुए हैं, जिससे संपर्क मार्गों पर संचालित होने वाले वाहनों में भीड़ बढ़ गई है।
कई बार परिवहन विभाग के अधिकारियों की ओर से भी संपर्क मार्गों पर वाहनों की नियमित चेकिंग नहीं की जाती है, जिससे वाहन चालक मनमाने ढंग से वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां बैठा लेते हैं। जनपद के नंदप्रयाग-घाट, बिरही-निजमुला, गोपेश्वर-पोखरी, कर्णप्रयाग पोखरी, पोखरी-मोहनखाल, मोहनखाल-चंद्रापुरी, घाट-सितेल, घाट-रामणी, नंदप्रयाग-कांडई, पीपलकोटी-बैमरु, हेलंग-उर्गम जैसे संपर्क मार्ग दर्जनों गांवों को यातायात से जोड़ते हैं। इन मार्गों पर नियमित बस सेवा न होने से स्थानीय वाहनों में ही ग्रामीण आवाजाही करते हैं।
संपर्क मार्ग पर संचालित होने वाले वाहनों की नियमित चेकिंग की जाती है। दिक्कत तब होती है, जब वाहन चालक हमें देखकर करीब आधा किमी दूर ही वाहन में क्षमता से अधिक सवारियों को उतार देता है और हमारे जाने के बाद फिर उन सवारियों को बैठाकर गंतव्य को चले जाता है। ओवर लोडिंग को रोकने के लिए आकस्मिक चेकिंग अभियान भी चलाया जाता है।
-पंकज श्रीवास्तव, एआरटीओ, चमोली
जिले के संपर्क मार्गों पर हुई वाहन दुर्घटना
वर्ष सड़क मृतक/घायल
2013 चमोली-लासी एक मौत, आठ घायल
2013 गोपेश्वर-पोखरी दो की मौत, दो घायल
2014 घाट-नंदप्रयाग 18 की मौत 5 घायल
2015 हापला-पोखरी आठ की मौत, सात घायल
2015 कनकचौंरी-रौता चार की मौत, 10 घायल
2015 पोखरी-बिनगढ़ दो लोगों की मौत
2016 घाट-नंदप्रयाग चार की मौत, 18 घायल
ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार और शराब है हादसों की वजह
नई टिहरी। जिले में डेढ़ साल में हुई 58 वाहन दुर्घटनाओं में 76 लोगों की मौत और 175 घायल हो गए थे। पुलिस और परिवहन विभाग आए दिन हो रही वाहन दुर्घटनाएं रोकने में असफल साबित हो रहा है। वर्ष 2015 में 44 वाहन दुर्घटनाओं में 62 लोगों की मौत और 130 घायल हुए हैं। इस साल अभी तक 14 दुर्घटनाओं में 14 लोग मौत के मुंह में चले गए और 45 घायल हुए हैं। वाहन दुर्घटनाओं के कारणों पर नजर डालें तो ज्यादातर में चालक की लापरवाही ही सामने आई है। बहुत कम घटनाओं की वजह तकनीकी खराबी रही है।
वाहन दुर्घटनाओं की जांच में चालक के नशे में होने, ओवरलोड और तेज रफ्तार ही मुख्य कारण सामने आए हैं। तकनीकी खराबी और सड़क तंग होने के कारण दो-तीन प्रतिशत दुर्घटनाएं हुई हैं।
-मनोज त्यागी,एआरआई टेक्रीकल
लगातार चेकिंग अभियान चलाने से दुर्घटनाओं में कुछ कमी आई है। बावजूद कुछ घटनाओं में मोबाइल, शराब, ओवर लोडिंग और तेज रफ्तार के कारण हादसे हो रहे हैं। यह सब रोकने के लिए कड़ाई से चेङ्क्षकग कर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू की गई है।
-ज्योति शंकर मिश्रा, एआरटीओ टिहरी।