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विदेशी प्रजाति के सेब उत्पादन के लिए प्रेरित कर विभाग
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उद्यान विभाग ने हार्टीकल्चर मिशन में विकासखंड के बष्टी व उषाड़ा गांव में जेरामाइन, सुपर चीफ व गैलगाय सेब की 1150 पौधों का रोपण किया है। गांवों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग काश्तकारों को विदेशी प्रजाति के सेब के उत्पादन के लिए प्रेरित कर रहा है।
विदेशी प्रजाति के इन पौधों से अगले तीन वर्ष में फलोत्पादन होने लगेगा, जिससे काश्तकारों की आर्थिकी को बल मिलेगा। इसके तहत बष्टी गांव में 700 व उषाड़ा गांव में 450 विदेशी प्रजाति के सेब की पौध का रोपण किया गया है। विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में काश्तकारों ने आधुनिक विधि से रोपण किया है। दो पौधों के बीच में डेढ़-डेढ़ मीटर की दूरी व लाइन के हिसाब से तीन-तीन मीटर की दूरी रखी गई है। हार्टीकल्चर मिशन में विभाग द्वारा तुंगनाथ घाटी के दिलमी गांव में कल्मी सेब की 255, गिरीया गांव में 208 और राऊंलेक में 254 पौध भी रोपी गई हैं। इसके अलावा इन गांवों में कल्मी अखरोट का उत्पादन भी होगा, जिसके तहत दिलमी में 100, गैड व पाली में 50-50 पौध का रोपण किया गया है। उद्यान प्रभारी अव्वल सिंह रावत ने बताया कि तुंगनाथ, कालीमठ व मद्महेश्वर घाटी के गांवों को फलपट्टी के रूप में विकसित करने के लिए यह पहल की गई है। जिला उद्यान अधिकारी योगेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि बष्टी और उषाड़ा गांव में जेरोमाइन समेत अन्य प्रजाति के सेब पौधों का रोपण किया जा रहा है। ये सभी पौध अगले तीन वर्ष में फल देना शुरू कर देंगी। जिले में विभागीय स्तर पर यह पहला प्रयोग हो रहा है, जिसे सफल बनाने के लिए बेहतर से बेहतर कार्य किए जाएंगे।
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विदेशी प्रजाति के इन पौधों से अगले तीन वर्ष में फलोत्पादन होने लगेगा, जिससे काश्तकारों की आर्थिकी को बल मिलेगा। इसके तहत बष्टी गांव में 700 व उषाड़ा गांव में 450 विदेशी प्रजाति के सेब की पौध का रोपण किया गया है। विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में काश्तकारों ने आधुनिक विधि से रोपण किया है। दो पौधों के बीच में डेढ़-डेढ़ मीटर की दूरी व लाइन के हिसाब से तीन-तीन मीटर की दूरी रखी गई है। हार्टीकल्चर मिशन में विभाग द्वारा तुंगनाथ घाटी के दिलमी गांव में कल्मी सेब की 255, गिरीया गांव में 208 और राऊंलेक में 254 पौध भी रोपी गई हैं। इसके अलावा इन गांवों में कल्मी अखरोट का उत्पादन भी होगा, जिसके तहत दिलमी में 100, गैड व पाली में 50-50 पौध का रोपण किया गया है। उद्यान प्रभारी अव्वल सिंह रावत ने बताया कि तुंगनाथ, कालीमठ व मद्महेश्वर घाटी के गांवों को फलपट्टी के रूप में विकसित करने के लिए यह पहल की गई है। जिला उद्यान अधिकारी योगेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि बष्टी और उषाड़ा गांव में जेरोमाइन समेत अन्य प्रजाति के सेब पौधों का रोपण किया जा रहा है। ये सभी पौध अगले तीन वर्ष में फल देना शुरू कर देंगी। जिले में विभागीय स्तर पर यह पहला प्रयोग हो रहा है, जिसे सफल बनाने के लिए बेहतर से बेहतर कार्य किए जाएंगे।
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