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गर्भवती को अस्पताल में भर्ती न करने की जांच की मांग

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jan 2020 06:24 PM IST
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Demand for investigation of not getting pregnant hospitalized
रुद्रपुर। जिला अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में गर्भवती महिला को भर्ती न करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बृहस्पतिवार को लोगों ने प्रमुख अधीक्षक डॉ. टीडी रखोलिया को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने जिला अस्पताल के कुछ स्टाफ और आशा कार्यकर्ताओं पर निजी अस्पतालों के साथ मिलीभगत करने का आरोप भी लगाया।
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ज्ञापन में कहा गया है कि समाजसेवी सुशील गाबा ने कहा कि आजादनगर निवासी मजदूर धरमपाल की गर्भवती पत्नी लक्ष्मी का नौ माह से जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। मंगलवार रात को जब महिला को प्रसव के लिए जिला अस्पताल लाया गया तो वहां मौजूद स्टाफ ने महिला की हालत गंभीर बताते हुए उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके बाद एक निजी अस्पताल से एंबुलेंस मंगवाकर गर्भवती को प्रसव के लिए वहां भेजा गया जबकि नियम के अनुसार गर्भवती को एसटीएच हल्द्वानी रेफर किया जाना चाहिए था।
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गाबा ने आरोप लगाया कि निजी अस्पताल में आशा कार्यकर्ता की ओर से महिला का प्रसव कराया गया। ऐसे में विभागीय स्टाफ, आशा कार्यकर्ता और निजी अस्पताल संचालक के बीच मिलीभगत की आशंका प्रतीत हो रही है। उन्होंने इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की। प्रमुख अधीक्षक डॉ. रखोलिया ने लोगों को आश्वासन देते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। रात के समय ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों का रिकॉर्ड मंगवाया जा रहा है। ज्ञापन देने वालों में अभिषेक शुक्ला, पार्षद राजेंद्र निषाद, सचिन मुंजाल, जावेद अख्तर, मानष बैरागी आदि थे।
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जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स के 24 पदों में से नौ रिक्त
रुद्रपुर। जिला अस्पताल में स्टाफ नर्सों के नौ पदों के लंबे समय से रिक्त रहने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. तारादत्त रखोलिया कहते हैं कि अस्पताल में स्टाफ नर्सों के लिए 24 पद स्वीकृत हैं लेकिन वर्तमान में सिर्फ 15 स्टाफ नर्स ही कार्यरत हैं। इनके अभाव में अस्पताल में महिला और बाल स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। रिक्त नौ पदों पर भर्ती के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 10 बच्चों का जन्म होता है। जिला अस्पताल में पिछले वर्ष 4,172 बच्चों ने जन्म लिया। इधर, जिला अस्पताल में आए दिन जच्चा-बच्चा वार्ड में गर्भवती महिलाओं को भर्ती न करने और आशा कार्यकर्ताओं के निजी अस्पतालों से मिलीभगत कर वहां प्रसव करवाने की शिकायतें मिल रही हैं।
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