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Rudraprayag News: मुआवजे में गड़बड़ी पर गुस्साए, मवाणा में ग्रामीणों ने रोका रेलवे का काम

Mon, 29 Jun 2026 07:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग Updated Mon, 29 Jun 2026 07:03 PM IST
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Angered by irregularities in compensation, villagers in Mawana halted railway work.
रुद्रप्रयाग के घोलतीर स्थित रेलवे निर्माण स्थल पर धरना देते स्थानीय लोग - संवाद
फोटो
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निर्माण स्थल पर किया प्रदर्शन, कहा-सर्वे होने के बावजूद कई प्रभावितों के नाम अंतिम सूची में नहीं
कई प्रभावितों को मुआवजा राशि नुकसान के अनुरूप नहीं दी
प्रशासनिक अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर जताई नाराजगी

संवाद न्यूज एजेंसी

रुद्रप्रयाग। घोलतीर के मवाणा गांव में रेलवे निर्माण कार्य से प्रभावित लोगों का भवनों का अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने रेलवे निर्माण स्थल पर पहुंचकर काम रुकवाया और प्रदर्शन किया। उन्होंने मुआवजे में अनियमितता का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि सर्वे होने के बावजूद कई प्रभावित परिवारों के नाम अंतिम मुआवजा सूची में शामिल नहीं किए गए हैं जबकि कई प्रभावितों को मुआवजा राशि नुकसान के अनुरूप नहीं दी गई है।
सोमवार को मवाणा गांव के ग्रामीण सुबह आठ बजे रेलवे निर्माण स्थल पर पहुंचे और काम रोककर प्रदर्शन किया। महिला मंगल दल अध्यक्ष सरिता देवी ने कहा कि सर्वे के अनुरूप मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। कई प्रभावित परिवारों को सूची से बाहर रखा गया है। वहीं मुआवजे के नाम पर 400 और 300 रुपये तय किए हैं। प्रभावित मोहन असवाल ने कहा कि रेलवे निर्माण से उनके मकान को भी नुकसान पहुंचा लेकिन उनका नाम अंतिम सूची में नहीं है। उन्होंने सर्वे को गलत बताया है। मवाणा क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश राणा ने आरोप लगाया कि रेलवे निर्माण कार्य में लगी कंपनी पहले भी मनमानी करती रही है। अब भवनों को हुई क्षति का भी सही आकलन नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि अंतिम सूची में कई लोगों को 400 और 800 रुपये तक की मुआवजा राशि रखी है जिससे क्षति की भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि सभी प्रभावितों को उचित मुआवजा नहीं मिला तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वह शाम चार बजे तक वहीं डटे रहे लेकिन न तो प्रशासनिक अधिकारियों मौके पर पहुंचा, न ही कोई अधिकारी, न ही कंपनी का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि। दूसरी ओर रेलवे निर्माण में लगी कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत का प्रयास किया लेकिन लोगों ने प्रशासन की मौजूदगी में ही वार्ता करने की बात कही। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक प्रशासन पूरे मामले में हस्तक्षेप कर समाधान नहीं निकालता तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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देर शाम को पहुंचा प्रशासन
- देर शाम को प्रशासन की ओर से तहसीलदार जगदीश सिंह नेगी तथा आरवीएनएल के तकनीकी अधिकारी कल्याण सिंह भंडारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से वार्ता कर बताया कि 7 जुलाई तक प्रभावित परिवार अपने-अपने वार्ड सदस्य, ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य के माध्यम से क्षति का विवरण एवं नामों की सूची उपलब्ध कराएं। इसके बाद संयुक्त सत्यापन कर आगे की कार्रवाई और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया।
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