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7 करोड़ की पेयजल योजना बुझाएगी 7000 आबादी की प्यास
Updated Sun, 22 Jul 2018 10:44 PM IST
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ऊखीमठ। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही ऊखीमठ कस्बे के लोगों की पेयजल समस्या दूर हो जाएगी। उत्तराखंड जलनिगम ने कस्बे की पेयजल योजना के पुनर्गठन के लिए 7 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। 7 हजार की आबादी को पर्याप्त जलापूर्ति के लिए 16 किमी लंबी पेयजल लाइन और 2 बड़े स्टोर टैंकों का निर्माण किया जाएगा।
भगवान केदारनाथ की शीतकालीन प्रवास स्थली वर्तमान में भारी पेयजल संकट से जूझ रही है। पिंगलापानी-ऊखीमठ योजना से मात्र 2 इंच के पाइप के सहारे कस्बे में पेयजल आपूर्ति की जा रही है, जो नाकाफी है, लेकिन अब, जल्द लोगों को समस्या से निजात मिलने वाली है। करीब तीन दशक पुरानी निर्मित योजना का पुनर्गठन कर जलनिगम द्वारा 16 किमी लंबी नई लाइन का निर्माण किया जाएगा। साथ ही दो बड़े स्टोर टैंक भी बनेंगे। इसके अलावा करीब 14 किमी वितरण लाइन बिछाई जाएगी, जिसकी मदद से ऊखीमठ कस्बे में चारों वार्डों, पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर सहित अन्य स्थानों पर नियमित जलापूर्ति होती रहेगी। जलनिगम के ईई नवल कुमार ने बताया बढ़ती आबादी के सापेक्ष पुरानी योजना से सप्लाई पूरी नहीं हो रही है। स्रोत पर पर्याप्त पानी को देखते हुए योजना का पुनर्गठन कर तहसील मुख्यालय के लिए योजना बनाई गई है। इसके लिए 7 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। उम्मीद है कि दो माह में इसे स्वीकृति मिल जाएगी।
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भगवान केदारनाथ की शीतकालीन प्रवास स्थली वर्तमान में भारी पेयजल संकट से जूझ रही है। पिंगलापानी-ऊखीमठ योजना से मात्र 2 इंच के पाइप के सहारे कस्बे में पेयजल आपूर्ति की जा रही है, जो नाकाफी है, लेकिन अब, जल्द लोगों को समस्या से निजात मिलने वाली है। करीब तीन दशक पुरानी निर्मित योजना का पुनर्गठन कर जलनिगम द्वारा 16 किमी लंबी नई लाइन का निर्माण किया जाएगा। साथ ही दो बड़े स्टोर टैंक भी बनेंगे। इसके अलावा करीब 14 किमी वितरण लाइन बिछाई जाएगी, जिसकी मदद से ऊखीमठ कस्बे में चारों वार्डों, पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर सहित अन्य स्थानों पर नियमित जलापूर्ति होती रहेगी। जलनिगम के ईई नवल कुमार ने बताया बढ़ती आबादी के सापेक्ष पुरानी योजना से सप्लाई पूरी नहीं हो रही है। स्रोत पर पर्याप्त पानी को देखते हुए योजना का पुनर्गठन कर तहसील मुख्यालय के लिए योजना बनाई गई है। इसके लिए 7 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। उम्मीद है कि दो माह में इसे स्वीकृति मिल जाएगी।
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