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जिंदा रहने के मौसम बहुत मगर, जान देने की ऋतु रोज आती नहीं...
Updated Wed, 25 Jul 2018 10:38 PM IST
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रुद्रप्रयाग। जिले के 15 फीसदी परिवारों का एक-एक सदस्य सेना से जुड़ा हुआ है। देश की सीमा की सुरक्षा के लिए तैनात रुद्रप्रयाग जिले के 51 जवान प्राणों की आहुति दे चुके हैं, जबकि तीन जवान कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। इसके बाद भी इन शहीदों के गांवों में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।
अगस्त्यमुनि ब्लाक के कंडारा व जाखणी सहित अन्य क्षेत्रों के कई गांव सैनिक बाहुल्य हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी तीन पीढ़ियां सेना से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 1962 का चीन युद्ध हो चाहे, वर्ष 1965 व 1971 का पाक युद्ध या फिर वर्ष 1999 का कारगिल युद्ध, जिले के जवानों ने अपना लोहा मनवाया है, लेकिन इन सैनिकों के गांवों को मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो पाई हैं। कारगिल युद्ध में शहीद हुए बेंजी-कांडई के सुनील दत्त कांडपाल के गांव के लिए की गई घोषणाएं फाइलों में कैद हो गई हैं। क्यूंजा के भगवान सिंह, देवर गांव के गोविंद सिंह के गांव के लोगों को भी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। शहीद के भाई केके कांडपाल बताते हैं जीआईसी कांडई का नाम शहीद के नाम पर रखने की घोषणा हवाई साबित हुई हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना की ओर से जिले के 38 वीर सैनिकों को कीर्ति व शौर्य चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल आर रवि थापा ने बताया कि वीर सैनिकों के आश्रितों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नि:शुल्क कंप्यूटर कोर्स व अन्य प्रशिक्षण भी कराए जाते हैं।
अगस्त्यमुनि ब्लाक के कंडारा व जाखणी सहित अन्य क्षेत्रों के कई गांव सैनिक बाहुल्य हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी तीन पीढ़ियां सेना से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 1962 का चीन युद्ध हो चाहे, वर्ष 1965 व 1971 का पाक युद्ध या फिर वर्ष 1999 का कारगिल युद्ध, जिले के जवानों ने अपना लोहा मनवाया है, लेकिन इन सैनिकों के गांवों को मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो पाई हैं। कारगिल युद्ध में शहीद हुए बेंजी-कांडई के सुनील दत्त कांडपाल के गांव के लिए की गई घोषणाएं फाइलों में कैद हो गई हैं। क्यूंजा के भगवान सिंह, देवर गांव के गोविंद सिंह के गांव के लोगों को भी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। शहीद के भाई केके कांडपाल बताते हैं जीआईसी कांडई का नाम शहीद के नाम पर रखने की घोषणा हवाई साबित हुई हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना की ओर से जिले के 38 वीर सैनिकों को कीर्ति व शौर्य चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल आर रवि थापा ने बताया कि वीर सैनिकों के आश्रितों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नि:शुल्क कंप्यूटर कोर्स व अन्य प्रशिक्षण भी कराए जाते हैं।
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