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Roorkee News: शाह मंसूर की दरगाह का तीन दिवसीय सालाना उर्स शुरू
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बुग्गावाला क्षेत्र के घने जंगल के बीच स्थित ऐतिहासिक दरगाह हजरत शाह मंसूर रहमतुल्लाह अलैहि का तीन दिवसीय सालाना उर्स चादरपोशी और झंडा चढ़ाने की धार्मिक रस्म के साथ शुरू हो गया। रबीउल अव्वल की छह तारीख को होने वाले उर्स में दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरगाह पर पहुंचकर चादर और फूल पेश कर खिराज-ए-अकीदत पेश करते हैं।
बुधवार को दरगाह साबिर पाक से सभासद गुलफाम साबरी, इस्तिकार अमन साबरी और मेहरबान साबरी के नेतृत्व में सैकड़ों अकीदतमंदों का पैदल जत्था झंडा व चादर लेकर शाह मंसूर की दरगाह के लिए रवाना हुआ। जत्थे के पहुंचने पर उर्स कमेटी की ओर से अकीदतमंदों का स्वागत किया गया।
इसके बाद झंडा दरगाह पर चढ़ाया गया और चादर व फूल पेश कर देश में अमन-चैन, खुशहाली, एकता और भाईचारे के लिए दुआ की गई। हर साल कलियर से अकीदतमंदों का जत्था पैदल शाह मंसूर की दरगाह पर चादर और फूल पेश करने पहुंचता है।
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उर्स के दौरान महफिल-ए-शमा, कुल शरीफ और बड़ी दुआ समेत विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। दरगाह को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। बताया जाता है कि घने जंगल के बीच स्थित शाह मंसूर की दरगाह करीब एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी है। मान्यता है कि शाह मंसूर ने इसी जंगल में तप किया था। ग्रामीणों के अनुसार उर्स के दौरान जंगल का राजा शेर भी दरगाह पर हाजिरी लगाने आता है। दरगाह पर अकीदतमंदों की ओर से लंगर का आयोजन किया जाता हैं।
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बुधवार को दरगाह साबिर पाक से सभासद गुलफाम साबरी, इस्तिकार अमन साबरी और मेहरबान साबरी के नेतृत्व में सैकड़ों अकीदतमंदों का पैदल जत्था झंडा व चादर लेकर शाह मंसूर की दरगाह के लिए रवाना हुआ। जत्थे के पहुंचने पर उर्स कमेटी की ओर से अकीदतमंदों का स्वागत किया गया।
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इसके बाद झंडा दरगाह पर चढ़ाया गया और चादर व फूल पेश कर देश में अमन-चैन, खुशहाली, एकता और भाईचारे के लिए दुआ की गई। हर साल कलियर से अकीदतमंदों का जत्था पैदल शाह मंसूर की दरगाह पर चादर और फूल पेश करने पहुंचता है।
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उर्स के दौरान महफिल-ए-शमा, कुल शरीफ और बड़ी दुआ समेत विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। दरगाह को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। बताया जाता है कि घने जंगल के बीच स्थित शाह मंसूर की दरगाह करीब एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी है। मान्यता है कि शाह मंसूर ने इसी जंगल में तप किया था। ग्रामीणों के अनुसार उर्स के दौरान जंगल का राजा शेर भी दरगाह पर हाजिरी लगाने आता है। दरगाह पर अकीदतमंदों की ओर से लंगर का आयोजन किया जाता हैं।