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दोस्तों से मिलकर खिल उठे छात्रों के चेहरे
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शहर में सोमवार से नौवीं से 12वीं तक के स्कूल खोले गए। पहले दिन छात्रों की संख्या स्कूलों में कम दिखाई दी लेकिन, कई महीनों के बाद दोस्तों को स्कूल में देखकर छात्रों के चेहरे खिल उठे। शहर के स्कूल प्रबंधकों ने इस दौरान पूरी तरह से कोरोना गाइडलाइन के मानकों का पालन किया। सबसे ज्यादा संख्या कक्षा नौ में देखने को मिली। जबकि कक्षा में बच्चों की संख्या बेहद कम रही।
कुछ दिन पहले शिक्षा सचिव ने कक्षा छह से 12वीं तक के स्कूल खोले जाने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि तीन दिन पहले शिक्षा सचिव की बैठक में कक्षाएं संचालित किए जाने को लेकर पहले जारी कार्यक्रम में बदलाव किया गया। अब छठी से आठवीं तक की कक्षाएं 16 अगस्त से शुरू होनी है। सोमवार को खुलने वाले स्कूलों को लेकर स्कूल प्रबंधकों ने दो दिन पहले ही तैयारी पूरी कर ली थी। स्कूल की कक्षाएं पूरी तरह से सैनिटाइज करवा दी गई थी। सोमवार को छात्र सुबह ही स्कूल पहुंचने शुरू हो गए थे। हालांकि पहले दिन छात्रों की संख्या बेहद कम रही। इसके बावजूद छात्रों में स्कूल आने को लेकर उत्साह देखा गया। पहले दिन कक्षा नौवीं के बच्चों की उपस्थिति ज्यादा रही। जबकि कक्षा की उपस्थिति सबसे कम देखने को मिली। शहर के जीआईसी स्कूल में कक्षा नौ में 186 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें से 63 बच्चे स्कूल पहुंचे। इसी तरह कक्षा दस में 164 में से 71 और कक्षा 12 में 77 में से 19 बच्चे स्कूल पहुंचे। स्कूल प्रधानाचार्य राम मिलन ने बताया कि स्कूल में बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग और हाथ सैनिटाइज करके अंदर आने दिया। कक्षाओं में भी सीटें शारीरिक दूरी के हिसाब से लगाई गई थी। वहीं बीएसएम इंटर कॉलेज में भी कक्षा नौ में 41 प्रतिशत, कक्षा 10 में पांच प्रतिशत, कक्षा 11 में 90 प्रतिशत और कक्षा 12 में सात प्रतिशत उपस्थिति रही। कॉलेज प्रधानाचार्य अरुण कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों को शारीरिक दूरी के हिसाब से बैठाया गया था। बताया कि इससे पहले कक्षाएं सैनिटाइज करवा दी गई थी। इसी तरह रामनगर स्थित मूलराज इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या पुष्पारानी ने बताया कि स्कूल में पहले से ही सैनिटाइजेशन मशीन मंगवा ली गई थी। स्कूल में आते समय हर बच्चे को सैनिटाइज किया गया। इसके बाद जाते समय भी हर बच्चे को सैनिटाइजेशन किया गया। बताया कि पहले दिन स्कूल में कक्षा नौ में नौ बजे मौजूद रहे। जबकि कक्षा दस में 15 और कक्षा 12 में केवल तीन बच्चे पहुंचे। इसके अलावा अन्य स्कूलों में भी स्थिति ऐसी ही रही।
स्कूल में कैदी की तरह रहे बच्चे
शहर के सभी इंटर कॉलेजों में कोरोना महामारी के बीच स्कूल प्रबंधक सख्त नजर आए। स्कूल पहुंचने पर बच्चों ने पहले की तरह ही मस्ती शुरू कर दी थी, लेकिन स्कूल प्रबंधक ने उन्हें तुरंत टोकना शुरू कर दिया। यहां तक कि कक्षाओं में भी बच्चे एक दूसरे से बहुत दूरी पर बैठे थे। बच्चे चाहकर भी एक-दूसरे से बात नहीं कर पा रहे थे। यदि बच्चे बात भी करना चाह रहे थे तो अध्यापक तुरंत उन्हें टोक रहे थे। ऐसे में बच्चे स्कूल में खुद को कैदी की तरह महसूस कर रहे थे।
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सहमति फार्म भरवाने को लेकर एतराज
शहर के कुछ प्राइवेट स्कूलों में स्कूल खोले जाने के आदेश जारी होते ही अभिभावकों को एक सहमति पत्र का मैसेज भेज दिया था। इस मैसेज के अनुसार परिजनों से सहमति फार्म भरवाया जा रहा है कि उनका बेटा या बेटी पूरी तरह से स्वस्थ है। उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने में कोई एतराज नहीं है। वे अपनी मर्जी से बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। यदि इस दौरान उनका बच्चा संक्रमित होता है तो स्कूल की कोई जिम्मेदारी नहीं है। इसकी पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की है। स्कूल प्रबंधकों के इस मैसेज पर परिजनों ने सख्त एतराज जताया। अधिकांश परिजनों का कहना है कि वो स्कूल बच्चों को नहीं भेजेंगे। अभिभावक शांतनु शर्मा और सुषमा चौधरी ने कहा कि स्कूल मनमानी पर उतर आए हैं। उन्हें बच्चों की कोई फिक्र नहीं है। यदि वे सहमति फार्म भर देते हैं उनके बच्चों की स्कूल में कोई देखभाल नहीं होगी। क्योंकि अभिभावकों का सहमति पत्र दिखाकर स्कूल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाल लेंगे। इससे तो वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाए ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर पढ़ाई करवा लेंगेे।
शहर के निजी स्कूलों पर लटका रहा ताला
सोमवार को वैसे तो शासकी और अशासकीय स्कूलों को खोले जाने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को स्कूल खोले जाने से पहले सभी निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक करनी थी। ये बैठक दो अगस्त को तय थी, लेकिन किन्हीं कारणों से सोमवार को होने वाली बैठक स्थगित हो गई थी। अब ये बैठक मंगलवार यानी आज होनी है। इस बैठक में प्राइवेट स्कूलों के लिए गाइडलाइन जारी की जाएगी।
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कुछ दिन पहले शिक्षा सचिव ने कक्षा छह से 12वीं तक के स्कूल खोले जाने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि तीन दिन पहले शिक्षा सचिव की बैठक में कक्षाएं संचालित किए जाने को लेकर पहले जारी कार्यक्रम में बदलाव किया गया। अब छठी से आठवीं तक की कक्षाएं 16 अगस्त से शुरू होनी है। सोमवार को खुलने वाले स्कूलों को लेकर स्कूल प्रबंधकों ने दो दिन पहले ही तैयारी पूरी कर ली थी। स्कूल की कक्षाएं पूरी तरह से सैनिटाइज करवा दी गई थी। सोमवार को छात्र सुबह ही स्कूल पहुंचने शुरू हो गए थे। हालांकि पहले दिन छात्रों की संख्या बेहद कम रही। इसके बावजूद छात्रों में स्कूल आने को लेकर उत्साह देखा गया। पहले दिन कक्षा नौवीं के बच्चों की उपस्थिति ज्यादा रही। जबकि कक्षा की उपस्थिति सबसे कम देखने को मिली। शहर के जीआईसी स्कूल में कक्षा नौ में 186 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें से 63 बच्चे स्कूल पहुंचे। इसी तरह कक्षा दस में 164 में से 71 और कक्षा 12 में 77 में से 19 बच्चे स्कूल पहुंचे। स्कूल प्रधानाचार्य राम मिलन ने बताया कि स्कूल में बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग और हाथ सैनिटाइज करके अंदर आने दिया। कक्षाओं में भी सीटें शारीरिक दूरी के हिसाब से लगाई गई थी। वहीं बीएसएम इंटर कॉलेज में भी कक्षा नौ में 41 प्रतिशत, कक्षा 10 में पांच प्रतिशत, कक्षा 11 में 90 प्रतिशत और कक्षा 12 में सात प्रतिशत उपस्थिति रही। कॉलेज प्रधानाचार्य अरुण कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों को शारीरिक दूरी के हिसाब से बैठाया गया था। बताया कि इससे पहले कक्षाएं सैनिटाइज करवा दी गई थी। इसी तरह रामनगर स्थित मूलराज इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या पुष्पारानी ने बताया कि स्कूल में पहले से ही सैनिटाइजेशन मशीन मंगवा ली गई थी। स्कूल में आते समय हर बच्चे को सैनिटाइज किया गया। इसके बाद जाते समय भी हर बच्चे को सैनिटाइजेशन किया गया। बताया कि पहले दिन स्कूल में कक्षा नौ में नौ बजे मौजूद रहे। जबकि कक्षा दस में 15 और कक्षा 12 में केवल तीन बच्चे पहुंचे। इसके अलावा अन्य स्कूलों में भी स्थिति ऐसी ही रही।
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स्कूल में कैदी की तरह रहे बच्चे
शहर के सभी इंटर कॉलेजों में कोरोना महामारी के बीच स्कूल प्रबंधक सख्त नजर आए। स्कूल पहुंचने पर बच्चों ने पहले की तरह ही मस्ती शुरू कर दी थी, लेकिन स्कूल प्रबंधक ने उन्हें तुरंत टोकना शुरू कर दिया। यहां तक कि कक्षाओं में भी बच्चे एक दूसरे से बहुत दूरी पर बैठे थे। बच्चे चाहकर भी एक-दूसरे से बात नहीं कर पा रहे थे। यदि बच्चे बात भी करना चाह रहे थे तो अध्यापक तुरंत उन्हें टोक रहे थे। ऐसे में बच्चे स्कूल में खुद को कैदी की तरह महसूस कर रहे थे।
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सहमति फार्म भरवाने को लेकर एतराज
शहर के कुछ प्राइवेट स्कूलों में स्कूल खोले जाने के आदेश जारी होते ही अभिभावकों को एक सहमति पत्र का मैसेज भेज दिया था। इस मैसेज के अनुसार परिजनों से सहमति फार्म भरवाया जा रहा है कि उनका बेटा या बेटी पूरी तरह से स्वस्थ है। उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने में कोई एतराज नहीं है। वे अपनी मर्जी से बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। यदि इस दौरान उनका बच्चा संक्रमित होता है तो स्कूल की कोई जिम्मेदारी नहीं है। इसकी पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की है। स्कूल प्रबंधकों के इस मैसेज पर परिजनों ने सख्त एतराज जताया। अधिकांश परिजनों का कहना है कि वो स्कूल बच्चों को नहीं भेजेंगे। अभिभावक शांतनु शर्मा और सुषमा चौधरी ने कहा कि स्कूल मनमानी पर उतर आए हैं। उन्हें बच्चों की कोई फिक्र नहीं है। यदि वे सहमति फार्म भर देते हैं उनके बच्चों की स्कूल में कोई देखभाल नहीं होगी। क्योंकि अभिभावकों का सहमति पत्र दिखाकर स्कूल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाल लेंगे। इससे तो वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाए ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर पढ़ाई करवा लेंगेे।
शहर के निजी स्कूलों पर लटका रहा ताला
सोमवार को वैसे तो शासकी और अशासकीय स्कूलों को खोले जाने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को स्कूल खोले जाने से पहले सभी निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक करनी थी। ये बैठक दो अगस्त को तय थी, लेकिन किन्हीं कारणों से सोमवार को होने वाली बैठक स्थगित हो गई थी। अब ये बैठक मंगलवार यानी आज होनी है। इस बैठक में प्राइवेट स्कूलों के लिए गाइडलाइन जारी की जाएगी।
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