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Roorkee News: धान खरीद नीति पर किसानों ने जताई नाराजगी
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धान खरीद 2026-27 के लिए सरकार की ओर से तय की गई खरीद नीति के लिए किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि नई व्यवस्था में प्रति हेक्टेयर धान खरीद की सीमा कम किए जाने से उन्हें अपनी पूरी उपज सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचने में परेशानी हो सकती है। इससे किसानों को अपनी फसल कम कीमत पर खुले बाजार में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
किसानों के मुताबिक, धान खरीद 2025-26 में पूरे प्रदेश में 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सरकारी खरीद की जा रही थी। वहीं, 2026-27 के लिए कुमाऊं मंडल में 55 क्विंटल और गढ़वाल मंडल में 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की खरीद सीमा निर्धारित किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि हरिद्वार जिले में धान का उत्पादन करीब 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होता है। ऐसे में यदि सरकारी खरीद निर्धारित सीमा के आधार पर ही की जाएगी तो किसानों को शेष उपज बेचने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। किसानों ने सवाल उठाया कि जब खेतों में उत्पादन अधिक हो रहा है तो खरीद की सीमा कम करने का आधार क्या है।
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किसान बलदेव सिंह निवासी सहदेवपुर, मनजीत सिंह, हरदीप सिंह और चौधरी सुरेंद्र निवासी अहमदपुर ने खरीद नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि किसानों को उनकी पूरी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। सरकार को उत्पादन और किसानों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खरीद के नियम बनाने चाहिए ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
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किसानों के मुताबिक, धान खरीद 2025-26 में पूरे प्रदेश में 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सरकारी खरीद की जा रही थी। वहीं, 2026-27 के लिए कुमाऊं मंडल में 55 क्विंटल और गढ़वाल मंडल में 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की खरीद सीमा निर्धारित किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि हरिद्वार जिले में धान का उत्पादन करीब 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होता है। ऐसे में यदि सरकारी खरीद निर्धारित सीमा के आधार पर ही की जाएगी तो किसानों को शेष उपज बेचने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। किसानों ने सवाल उठाया कि जब खेतों में उत्पादन अधिक हो रहा है तो खरीद की सीमा कम करने का आधार क्या है।
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किसान बलदेव सिंह निवासी सहदेवपुर, मनजीत सिंह, हरदीप सिंह और चौधरी सुरेंद्र निवासी अहमदपुर ने खरीद नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि किसानों को उनकी पूरी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। सरकार को उत्पादन और किसानों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खरीद के नियम बनाने चाहिए ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।