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35 हजार घूस लेते आबकारी निरीक्षक रंगे हाथ गिरफ्तार
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रुड़की। देहरादून से आई विजिलेंस की टीम ने आबकारी निरीक्षक को 35 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। ठेकों के लाइसेंस में कमी न निकले, इसके एवज में वह एक शराब कारोबारी से 50 हजार रुपये की मांग कर रहा था। शराब कारोबारी की शिकायत पर विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर आरोपी निरीक्षक को रंगेहाथ पकड़ लिया। यही नहीं, आरोपी के घर से तलाशी के दौरान छह लाख 95 हजार की नकदी भी बरामद हुई है। इतने रुपये कहां से आए, इस पर आबकारी निरीक्षक कोई जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद टीम ने नकदी और कुछ अन्य कागजातों को कब्जे में ले लिया।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता मोहन सिंह रावत निवासी साउथ सिविल लाइंस रुड़की की ओर से 30 जून को पुलिस अधीक्षक सतर्कता श्वेता चौबे को शिकायती पत्र भेजकर बताया गया था कि रावत एसोसिएट के नाम से उनकी फर्म वर्ष 2018 में पंजीकृत हुई थी। उनकी फर्म को शराब के दो ठेके आवंटित किए गए थे। शिकायती पत्र में उन्होंने कहा था कि आबकारी निरीक्षक मानवेंद्र सिंह पंवार समय-समय पर ठेकों की चेकिंग करते हैं। 28 जून को पंवार ने फोन कर उन्हें अपने कार्यालय बुलाया और कहा कि चेकिंग में उनकी दुकानों में कमी निकालकर लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। यदि इससे बचना है तो 50 हजार रुपये देने होंगे। मोहन सिंह रावत ने कोरोना काल का हवाला देते हुए रिश्वत देने में असमर्थता जताई। 29 जून को फिर से आबकारी निरीक्षक ने मोहन सिंह रावत को फोन कर अपने कार्यालय बुलाया और कहा कि तुम छोटे हो इसलिए कम मांग रहा हूं।
शिकायतकर्ता के काफी मान मनौव्वल पर आबकारी निरीक्षक 35 हजार रुपये पर मान गया और तीन जुलाई को रिश्वत लेकर पहुंचने को कहा। शिकायत मिलने के बाद सतर्कता पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे के निर्देश पर टीम का गठन कर आबकारी निरीक्षक को जाल में फंसाने की योजना बनाई गई। शनिवार को जैसे ही आबकारी निरीक्षक को जादूगर रोड स्थित उसके घर पर रिश्वत की रकम थमाई गई, पहले से ही तैयार विजिलेंस की टीम मौके पर पहुंची और उसे रंगेहाथ धर दबोचा। विजिलेंस टीम ने घर की गहनता से छानबीन की तो छह लाख 95 हजार की नकदी बरामद हुई। सीओ विजिलेंस एसएस सामंत ने बताया कि घर से बरामद छह लाख 95 हजार की नकदी कहां से आई है, इस बारे में आरोपी आबकारी निरीक्षक कुछ नहीं बता पाया। इसके बाद टीम ने नकदी समेत कुछ अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए और आरोपी को अपने साथ लेेकर देहरादून के लिए रवाना हो गई। आरोपी निरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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रंगेहाथ पकड़ में आया तो तेज होने लगे चर्चे
आबकारी निरीक्षक के रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार होने के बाद उसके कारनामे दिनभर चर्चाओं में रहे। अधिकांश शराब कारोबारी यही कहते नजर आए कि आबकारी निरीक्षक ने आतंक मचाया हुआ था। बिना रिश्वत लिए कोई काम नहीं हो रहा था। उसकी कार्यशैली से हर कोई त्रस्त नजर आ रहा था।
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शराब की ओवररेटिंग में किसकी थी शह
लॉकडाउन हो या फिर अनलॉक, समय-समय पर शहर में शराब की दुकानों पर ओवररेटिंग की शिकायतें मिल रही थी। पूर्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से भी इस तरह की शिकायत लोगों ने की थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह था कि जिस विभाग की जिम्मेदारी शराब की बिक्री सरकारी दरों पर कराने की होती है, उसे ओवररेटिंग क्यों नहीं दिखाई देती। आबकारी निरीक्षक के गिरफ्तार होने के बाद इस बात की आशंका जताई जा रही है कि रिश्वत की आड़ में शराब ठेकों खुलकर नियमों के उल्लंघन की छूट दी जा रही थी।
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जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता मोहन सिंह रावत निवासी साउथ सिविल लाइंस रुड़की की ओर से 30 जून को पुलिस अधीक्षक सतर्कता श्वेता चौबे को शिकायती पत्र भेजकर बताया गया था कि रावत एसोसिएट के नाम से उनकी फर्म वर्ष 2018 में पंजीकृत हुई थी। उनकी फर्म को शराब के दो ठेके आवंटित किए गए थे। शिकायती पत्र में उन्होंने कहा था कि आबकारी निरीक्षक मानवेंद्र सिंह पंवार समय-समय पर ठेकों की चेकिंग करते हैं। 28 जून को पंवार ने फोन कर उन्हें अपने कार्यालय बुलाया और कहा कि चेकिंग में उनकी दुकानों में कमी निकालकर लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। यदि इससे बचना है तो 50 हजार रुपये देने होंगे। मोहन सिंह रावत ने कोरोना काल का हवाला देते हुए रिश्वत देने में असमर्थता जताई। 29 जून को फिर से आबकारी निरीक्षक ने मोहन सिंह रावत को फोन कर अपने कार्यालय बुलाया और कहा कि तुम छोटे हो इसलिए कम मांग रहा हूं।
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शिकायतकर्ता के काफी मान मनौव्वल पर आबकारी निरीक्षक 35 हजार रुपये पर मान गया और तीन जुलाई को रिश्वत लेकर पहुंचने को कहा। शिकायत मिलने के बाद सतर्कता पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे के निर्देश पर टीम का गठन कर आबकारी निरीक्षक को जाल में फंसाने की योजना बनाई गई। शनिवार को जैसे ही आबकारी निरीक्षक को जादूगर रोड स्थित उसके घर पर रिश्वत की रकम थमाई गई, पहले से ही तैयार विजिलेंस की टीम मौके पर पहुंची और उसे रंगेहाथ धर दबोचा। विजिलेंस टीम ने घर की गहनता से छानबीन की तो छह लाख 95 हजार की नकदी बरामद हुई। सीओ विजिलेंस एसएस सामंत ने बताया कि घर से बरामद छह लाख 95 हजार की नकदी कहां से आई है, इस बारे में आरोपी आबकारी निरीक्षक कुछ नहीं बता पाया। इसके बाद टीम ने नकदी समेत कुछ अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए और आरोपी को अपने साथ लेेकर देहरादून के लिए रवाना हो गई। आरोपी निरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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रंगेहाथ पकड़ में आया तो तेज होने लगे चर्चे
आबकारी निरीक्षक के रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार होने के बाद उसके कारनामे दिनभर चर्चाओं में रहे। अधिकांश शराब कारोबारी यही कहते नजर आए कि आबकारी निरीक्षक ने आतंक मचाया हुआ था। बिना रिश्वत लिए कोई काम नहीं हो रहा था। उसकी कार्यशैली से हर कोई त्रस्त नजर आ रहा था।
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शराब की ओवररेटिंग में किसकी थी शह
लॉकडाउन हो या फिर अनलॉक, समय-समय पर शहर में शराब की दुकानों पर ओवररेटिंग की शिकायतें मिल रही थी। पूर्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से भी इस तरह की शिकायत लोगों ने की थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह था कि जिस विभाग की जिम्मेदारी शराब की बिक्री सरकारी दरों पर कराने की होती है, उसे ओवररेटिंग क्यों नहीं दिखाई देती। आबकारी निरीक्षक के गिरफ्तार होने के बाद इस बात की आशंका जताई जा रही है कि रिश्वत की आड़ में शराब ठेकों खुलकर नियमों के उल्लंघन की छूट दी जा रही थी।