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Roorkee News: घर बैठे मिलने लगी प्रमाणित नकल खतौनी
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राजस्व विभाग ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए खतौनी की प्रमाणित नकल प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। अब लोगों को अपनी भूमि से संबंधित दस्तावेज लेने के लिए बार-बार तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। ई-भूलेख सेवा के माध्यम से लोग घर बैठे ही किसी भी गांव की खतौनी की प्रमाणित नकल ऑनलाइन प्राप्त होने लगी है।
पहले जहां खतौनी की प्रमाणित नकल लेने के लिए लोगों को तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। लंबी कतारों में लगना पड़ता था और कई बार दिनभर का समय भी खर्च करना पड़ता था। वहीं अब यह प्रक्रिया बेहद आसान कर दी गई है। राजस्व विभाग की वेबसाइट https://ebhulekh.uk.gov.in पर जाकर आवेदक संबंधित गांव, खाता संख्या या गाटा संख्या दर्ज कर खतौनी का विवरण देख सकते हैं और निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान कर उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त कर सकते हैं।
यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाएगी। पहले कई मामलों में दलालों के माध्यम से खतौनी निकलवाने की शिकायतें सामने आती थीं लेकिन अब डिजिटल व्यवस्था लागू होने से आम नागरिक सीधे पोर्टल के माध्यम से अपनी भूमि का रिकॉर्ड प्राप्त कर सकेंगे। ई-भूलेख सेवा के तहत खतौनी की प्रमाणित नकल डाउनलोड करने के साथ-साथ उसे प्रिंट भी किया जा सकता है। अब किसी भी व्यक्ति को अपनी भूमि से जुड़ी जानकारी या खतौनी की प्रमाणित नकल प्राप्त करने के लिए सिर्फ इंटरनेट की जरूरत होगी। इससे न केवल लोगों का समय बचेगा बल्कि सरकारी कार्यालयों में भी भीड़ कम होगी।
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पहले जहां खतौनी की प्रमाणित नकल लेने के लिए लोगों को तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। लंबी कतारों में लगना पड़ता था और कई बार दिनभर का समय भी खर्च करना पड़ता था। वहीं अब यह प्रक्रिया बेहद आसान कर दी गई है। राजस्व विभाग की वेबसाइट https://ebhulekh.uk.gov.in पर जाकर आवेदक संबंधित गांव, खाता संख्या या गाटा संख्या दर्ज कर खतौनी का विवरण देख सकते हैं और निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान कर उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त कर सकते हैं।
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यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाएगी। पहले कई मामलों में दलालों के माध्यम से खतौनी निकलवाने की शिकायतें सामने आती थीं लेकिन अब डिजिटल व्यवस्था लागू होने से आम नागरिक सीधे पोर्टल के माध्यम से अपनी भूमि का रिकॉर्ड प्राप्त कर सकेंगे। ई-भूलेख सेवा के तहत खतौनी की प्रमाणित नकल डाउनलोड करने के साथ-साथ उसे प्रिंट भी किया जा सकता है। अब किसी भी व्यक्ति को अपनी भूमि से जुड़ी जानकारी या खतौनी की प्रमाणित नकल प्राप्त करने के लिए सिर्फ इंटरनेट की जरूरत होगी। इससे न केवल लोगों का समय बचेगा बल्कि सरकारी कार्यालयों में भी भीड़ कम होगी।
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