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अब निगम नहीं प्रदेश सरकार का ई-नगर सेवा पोर्टल देगा ऑनलाइन सुविधाएं

Tue, 11 Dec 2018 11:56 PM IST
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:56 PM IST
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अब निगम नहीं प्रदेश सरकार का ई-नगर सेवा पोर्टल देगा ऑनलाइन सुविधाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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नगर निगम के लोगों को अब घर बैठे ऑनलाइन टैक्स जमा कराए जाने की सुविधा प्रदेश सरकार की ओर से लांच किए गए ई-नगर सेवा पोर्टल के जरिये मिलेगी। ऐसे में नगर निगम ने तैयार किए जा रहे अपने साफ्टवेयर पर रोक लगा दी है। यही नहीं प्रदेश सरकार के इस पोर्टल में रुड़की के करदाताओं का डाटा फीड करने का काम भी शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि करीब दो माह में शहरवासियों को ऑनलाइन टैक्स जमा करने की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इससे शहर के करीब 20 हजार भवन करदाताओं को सुविधा मिलेगी।
अभी तक भवन कर जमा करने के लिए लोगों को नगर निगम कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही थी। निगम कर्मी भी टैक्स का लेखा-जोखा रजिस्टरों में मैन्युवली दर्ज कर रहे थे। इसके चलते नगर निगम में आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग पिछले सालों में जमा किए जा चुके टैक्स को नए बिलों में जोड़कर भेजने की शिकायत कर रहे थे। एक साल पहले तक इस तरह के मामलों की भरमार थी। हालांकि इस समस्या को देखते हुए नगर निगम ने सभी करदाताओं के टैक्स की एंट्री रजिस्टर में दर्ज कर ली थी। फिर भी जमा किया हुआ कर दोबारा जुड़कर आने की शिकायतें आ रही थी। इन सभी दिक्कतों के चलते टैक्स जमा किए जाने की व्यवस्था ऑनलाइन किए जाने की मांग हो रही थी। निगम ने बोर्ड बैठक में इसके लिए प्रस्ताव भी पारित किया था। इसके बाद करीब तीन माह से निगम ऑनलाइन टैक्स जमा कराने के लिए साफ्टवेयर तैयार कराने में लगा था, लेकिन इसी बीच जानकारी मिली कि प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश के सभी नगर निकायों के लिए ई-नगर सेवा पोर्टर लांच किया गया है। सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि अब ई-नगर सेवा पोर्टल पर ही रुड़की नगर निगम के भवन करदाताओं का ब्यौरा फीड किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगले दो माह में शहरवासियों को ऑनलाइन टैक्स जमा कराने की सुविधा प्रदान कर दी जाएगी। बता दें कि शहर में करीब 20 हजार भवन हैं। इनमें व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या करीब ढाई हजार के आसपास है। ऑनलाइन सुविधा के बाद इन लोगों को काफी राहत मिलेगी।
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एक क्लिक पर मिलेगी बकायेदारों की सूची
ई-नगर सेवा पोर्टल पर डाटा फीड होने के बाद इसका एक लाभ यह भी होगा कि साफ्टवेयर के जरिये शहर के सभी भवनों की जानकारी डिजिटलाइज्ड फॉर्म में उपलब्ध हो सकेगी। इसके बाद वार्डवार भवनों की संख्या के आधार पर शहर में निर्माण और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी योजनाओं को तैयार करने और उनके क्रियान्वयन में भी बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही कुल भवन कर निर्धारण और बकाया कर के बारे में भी एक क्लिक पर जानकारी मिल सकेगी।
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बड़े व्यावसायिक भवनों से कर वसूली पर फोकस
सिंचाई विभाग से खुली भूमि की माप मांगने को कहा
रुड़की। नगर निगम में कर वसूली को लेकर एक बैठक का आयोजन किया गया। इसमें बड़े व्यावसायिक भवन स्वामियों से शत प्रतिशत कर वसूली के आदेश दिए गए। कर वसूली की धीमी गति पर अधिकारियों ने रोष व्यक्त किया।
नगर निगम में मंगलवार को मुख्य नगर आयुक्त की अध्यक्षता में कर विभाग की बैठक हुई। कर्मचारियों को संबोधित करते मुख्य नगर आयुक्त अशोक पांडेय ने कहा कि निगम क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक भवनों से शत प्रतिशत कर वसूली की जाए। साथ ही सिंचाई विभाग से खुली भूमि की माप भी मांगी जाए। बताया कि सिंचाई विभाग की ओर से नगर निगम कार्यालय को आवासीय और कार्यालय भवनों का विवरण और माप दी गई है। जबकि खाली भूमि की माप नहीं दी गई है। ऐसे में सिंचाई विभाग का टैक्स असिसमेंट नहीं हो पा रहा है। कहा कि खाली भूमि की माप आने के बाद ही यह काम हो पाएगा। साथ ही कर वसूली की धीमी गति को तेज करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट, कर अधीक्षक नरेश कुमार, कर निरीक्षक रविंद्र सिंह पंवार, मामचंद, पवन सैनी, मो.कय्यूम, जनक, गिरिधर गोपाल आदि उपस्थित थे।

दो साल का भवन कर जमा, फिर बिल आया
नगर निगम के कर विभाग की लापरवाही शहरवासियों पर भारी पड़ रही है। जो लोग पहले भवन कर जमा कर चुके हैं, उनके नए बिल में फिर पुराना जमा किया जा चुका कर जुड़कर आया है। मंगलवार को इमली रोड कानूनगोयान मोहल्ला निवासी सुनीता खन्ना (75) मुख्य नगर आयुक्त के कार्यालय में पहुंची। महिला का कहना था कि उसने 2015-16, 2016-17 का भवन कर जमा कर दिया था, लेकिन नगर निगम प्रशासन की ओर से जो भवन कर का बिल दिया है उसमें पुराना जमा किया जा चुका बिल भी जुड़कर आया है। पुराना बिल सामने आने के बाद कर विभाग के क्लर्क तरह-तरह के बहाने बनाने लगे। सोमवार को इसी तरह का मामला लेकर आदर्शनगर निवासी चरण सिंह भी नगर निगम कार्यालय आए थे।
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