{"_id":"5c23c43dbdec2256ff44c3c6","slug":"141545847869-roorkee-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईआईटी रुड़की और एनएचपीसी के बीच हुआ एमओयू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईआईटी रुड़की और एनएचपीसी के बीच हुआ एमओयू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
रुड़की। आईआईटी रुड़की और नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन (एनएचपीसी) के बीच बुधवार को करार (एमओयू) साइन हुआ। इसके तहत संस्थान में एनएचपीसी प्रोफेसर चेयर (विभाग) की स्थापना की गई है। साथ ही शोध एवं विकास में भागीदारी के लिए भी अनुबंध किया गया है। इसके तहत आईआईटी और एनएचपीसी अब हाइड्रो पावर सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझीदार के रूप में काम कर सकेंगे। इस दौरान प्रोफेसर चेयर स्थापित करने के लिए आईआईटी रुड़की को दो करोड़ का चेक भी सौंपा गया।
संस्थान के थॉमसन भवन के बोर्ड रूम में निदेशक प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी की मौजूदगी में संस्थान के डीन प्रो. एम परीदा और एनएचपीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर गोविंद वैद्य ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। साथ ही अनुबंधपत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत संस्थान जलविद्युत, जल विज्ञान, जल संसाधन, भूविज्ञान, भूकंप, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझेदार के रूप में सहयोग करेगा। संस्थान में स्थापित एनएचपीसी के चेयर प्रोफेसर देश में हाइड्रो पॉवर विकास के एंबेसडर के रूप में कार्य करेंगे, जो जलविद्युत क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और विकास को उत्प्रेरित करेगा। एनएचपीसी के निदेशक जनार्दन चौधरी ने कहा कि उन्हें संस्थान में भूकंप इंजीनियरिंग एवं अन्य तकनीकी शोध का लाभ मिलेगा, क्योंकि भूकंप इंजीनियरिंग में पूर्वानुमान का विशेष महत्व होता है। ऐसे में पूर्वानुमान की तकनीक से हाइड्रो पॉवर के क्षेत्र में व्यापक शोध एवं विकास किया जा सकता है। आईआईटी निदेशक प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने कहा कि परस्पर सहयोग से जलविद्युत की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान खोजने में मदद मिलेगी। मौके पर एनएचपीसी के टेक्निकल डायरेक्टर जनार्दन चौधरी, डीन फैकल्टी प्रो. बीके मिश्रा एवं प्रो. अरुण कुमार भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
रुड़की। आईआईटी रुड़की और नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन (एनएचपीसी) के बीच बुधवार को करार (एमओयू) साइन हुआ। इसके तहत संस्थान में एनएचपीसी प्रोफेसर चेयर (विभाग) की स्थापना की गई है। साथ ही शोध एवं विकास में भागीदारी के लिए भी अनुबंध किया गया है। इसके तहत आईआईटी और एनएचपीसी अब हाइड्रो पावर सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझीदार के रूप में काम कर सकेंगे। इस दौरान प्रोफेसर चेयर स्थापित करने के लिए आईआईटी रुड़की को दो करोड़ का चेक भी सौंपा गया।
संस्थान के थॉमसन भवन के बोर्ड रूम में निदेशक प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी की मौजूदगी में संस्थान के डीन प्रो. एम परीदा और एनएचपीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर गोविंद वैद्य ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। साथ ही अनुबंधपत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत संस्थान जलविद्युत, जल विज्ञान, जल संसाधन, भूविज्ञान, भूकंप, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझेदार के रूप में सहयोग करेगा। संस्थान में स्थापित एनएचपीसी के चेयर प्रोफेसर देश में हाइड्रो पॉवर विकास के एंबेसडर के रूप में कार्य करेंगे, जो जलविद्युत क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और विकास को उत्प्रेरित करेगा। एनएचपीसी के निदेशक जनार्दन चौधरी ने कहा कि उन्हें संस्थान में भूकंप इंजीनियरिंग एवं अन्य तकनीकी शोध का लाभ मिलेगा, क्योंकि भूकंप इंजीनियरिंग में पूर्वानुमान का विशेष महत्व होता है। ऐसे में पूर्वानुमान की तकनीक से हाइड्रो पॉवर के क्षेत्र में व्यापक शोध एवं विकास किया जा सकता है। आईआईटी निदेशक प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने कहा कि परस्पर सहयोग से जलविद्युत की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान खोजने में मदद मिलेगी। मौके पर एनएचपीसी के टेक्निकल डायरेक्टर जनार्दन चौधरी, डीन फैकल्टी प्रो. बीके मिश्रा एवं प्रो. अरुण कुमार भी मौजूद रहे।
विज्ञापन