{"_id":"62323f019c7cd06d041b4e37","slug":"were-ahead-in-studies-before-the-corona-period-now-backward-rishikesh-news-drn406630598","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल से पहले पढ़ाई में थे आगे, अब पिछड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल से पहले पढ़ाई में थे आगे, अब पिछड़े
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना मामलों में राहत के बाद शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का पुराना दौर लौटने लगा है। स्कूलों में मास्क, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन जैसे नियमों को अनिवार्य कर दिया गया है। कक्षाओं में सोशल डिस्टेसिंग छात्रों के लिए अब आम बात हो गई है, लेकिन स्कूली छात्रों पर कोरोना काल का विपरीत प्रभाव पड़ा है। ऑनलाइन पढ़ाई के बावजूद कोरोना काल से पहले पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राएं काफी पिछड़ गए हैं। यही नहीं, कक्षाओं में छात्र छात्राओं की उपस्थिति भी कम हो गई है। अभिभावक भी बच्चों के अधिकांश समय फोन पर बिताने की शिकायत कर रहे हैं।
बुधवार को अमर उजाला की टीम प्रगति विहार स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल माडर्न स्कूल पहुंची। विद्यालय में बच्चों की कक्षाएं संचालित हो रही थीं। छात्रों को अलग-अलग बैठाया गया था। सभी छात्र नियमित तरीके से मास्क लगाकर पढ़ाई कर रहे थे। विद्यालय प्रधानाचार्य नंदिनी उनियाल ने बताया कि कोरोनाकाल के बाद विद्यालय में मास्क को अनिवार्य कर दिया गया है। बच्चों को थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद भी स्कूल में प्रवेश दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल में स्कूल बंद होने के चलते बच्चों में अब फोन की अधिक आदत हो गई है। विद्यालय में कई छात्र अभी नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवा रहे हैं। इसके बाद टीम ने आदर्श ग्राम स्थित सेम लिटिल स्टार स्कूल की व्यवस्थाओं को देखा। यहां बच्चों की परीक्षाएं चल रही थीं। स्कूल की प्रधानाचार्य मधु साहनी ने बताया कि कोरोना नियमों को पूरी तरह पालन किया जा रहा है। हालांकि लंबे समय तक ऑनलाइन पढ़ाई करने के चलते बच्चों को ऑफलाइन पढ़ाई में दिक्कत पेश आ रही है।
श्रीभरत मंदिर पब्लिक स्कूल झंडा में छुट्टी के बाद कक्षाओं को सैनिटाइज किया जा रहा था। स्कूल के प्रधानाचार्य धीरेंद्र जोशी ने बताया कि स्कूल में नियमित रूप से कोविड के नियमों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कोरोनाकाल के बाद अब स्कूल खुलने से छात्रों की पढ़ने लिखने की क्षमता कमजोर हो गई है। बच्चों का ध्यान मोबाइल फोन पर अधिक है। आखिर में टीम रेलवे रोड स्थित मेरा बचपन स्कूल पहुंची। स्कूल प्रधानाचार्य संतोष गौड़ ने बताया कि अभी किसी भी अभिभावक पर उनके बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए दबाव नहीं बनाया जा रहा है। जो बच्चे विद्यालय में आ रहे हैं, वे अभिभावकों की इच्छानुसार आ रहे हैं। वैसे स्कूल में कोविड-19 के नियमों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। विशेषकर छोटे बच्चों के लिए विद्यालय में साफ सफाई का विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुधवार को अमर उजाला की टीम प्रगति विहार स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल माडर्न स्कूल पहुंची। विद्यालय में बच्चों की कक्षाएं संचालित हो रही थीं। छात्रों को अलग-अलग बैठाया गया था। सभी छात्र नियमित तरीके से मास्क लगाकर पढ़ाई कर रहे थे। विद्यालय प्रधानाचार्य नंदिनी उनियाल ने बताया कि कोरोनाकाल के बाद विद्यालय में मास्क को अनिवार्य कर दिया गया है। बच्चों को थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद भी स्कूल में प्रवेश दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल में स्कूल बंद होने के चलते बच्चों में अब फोन की अधिक आदत हो गई है। विद्यालय में कई छात्र अभी नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवा रहे हैं। इसके बाद टीम ने आदर्श ग्राम स्थित सेम लिटिल स्टार स्कूल की व्यवस्थाओं को देखा। यहां बच्चों की परीक्षाएं चल रही थीं। स्कूल की प्रधानाचार्य मधु साहनी ने बताया कि कोरोना नियमों को पूरी तरह पालन किया जा रहा है। हालांकि लंबे समय तक ऑनलाइन पढ़ाई करने के चलते बच्चों को ऑफलाइन पढ़ाई में दिक्कत पेश आ रही है।
विज्ञापन
श्रीभरत मंदिर पब्लिक स्कूल झंडा में छुट्टी के बाद कक्षाओं को सैनिटाइज किया जा रहा था। स्कूल के प्रधानाचार्य धीरेंद्र जोशी ने बताया कि स्कूल में नियमित रूप से कोविड के नियमों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कोरोनाकाल के बाद अब स्कूल खुलने से छात्रों की पढ़ने लिखने की क्षमता कमजोर हो गई है। बच्चों का ध्यान मोबाइल फोन पर अधिक है। आखिर में टीम रेलवे रोड स्थित मेरा बचपन स्कूल पहुंची। स्कूल प्रधानाचार्य संतोष गौड़ ने बताया कि अभी किसी भी अभिभावक पर उनके बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए दबाव नहीं बनाया जा रहा है। जो बच्चे विद्यालय में आ रहे हैं, वे अभिभावकों की इच्छानुसार आ रहे हैं। वैसे स्कूल में कोविड-19 के नियमों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। विशेषकर छोटे बच्चों के लिए विद्यालय में साफ सफाई का विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विज्ञापन