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Rishikesh News: प्रवासी पक्षियों का रेन बसेरा बनने लगे गंगा घाट
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Iपर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहे प्रवासी पक्षी, फरवरी तक यहीं रहेंगे पक्षीI
गंगा घाट और तट इन दिनों प्रवासी पक्षियों का रेन बसेरा बन रहा है। सात समंदर पार से प्रवासी पक्षियों की चहलकदमी शुरू हो गई है। गंगा घाट और तटों पर प्रवासी पक्षी पर्यटक और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रकृति की इस सुंदरता को सैलानी अपने मोबाइल में कैद कर रहे हैं।
लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, त्रिवेणीघाट, वीरभद्र बैराज समेत राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में साइबेरियन पक्षियों का जमावड़ा लग रहा है। साइबेरिया से प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। ठंडे क्षेत्रों में इन दिनों झील, झरने आदि प्राकृतिक जलस्रोत अत्यधिक ठंड के कारण जम जाते हैं। जिसके कारण इन पक्षियों को झुंड अनुकूलित वातावरण की ओर आना शुरू हो जाता है।
यहां मौसम इनके अनुकूल होने के कारण यह पक्षी अपना रेन बसेरा यहीं बना देते हैं, जो फरवरी महीने तक रहते हैं। तीन से चार महीने गंगा तट और किनारों पर रहकर ये जलीय जीव जंतुओं को अपना आहार बनाते हैं। पर्यावरण प्रेमी विनोद जुगलान और गढ़वाल विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान में तैनात डाॅ. भूपेंद्र भंडारी ने बताया कि इन दिनों गंगा तटीय क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो जाता है।
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Iपर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहे प्रवासी पक्षी, फरवरी तक यहीं रहेंगे पक्षीI
गंगा घाट और तट इन दिनों प्रवासी पक्षियों का रेन बसेरा बन रहा है। सात समंदर पार से प्रवासी पक्षियों की चहलकदमी शुरू हो गई है। गंगा घाट और तटों पर प्रवासी पक्षी पर्यटक और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रकृति की इस सुंदरता को सैलानी अपने मोबाइल में कैद कर रहे हैं।
लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, त्रिवेणीघाट, वीरभद्र बैराज समेत राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में साइबेरियन पक्षियों का जमावड़ा लग रहा है। साइबेरिया से प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। ठंडे क्षेत्रों में इन दिनों झील, झरने आदि प्राकृतिक जलस्रोत अत्यधिक ठंड के कारण जम जाते हैं। जिसके कारण इन पक्षियों को झुंड अनुकूलित वातावरण की ओर आना शुरू हो जाता है।
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यहां मौसम इनके अनुकूल होने के कारण यह पक्षी अपना रेन बसेरा यहीं बना देते हैं, जो फरवरी महीने तक रहते हैं। तीन से चार महीने गंगा तट और किनारों पर रहकर ये जलीय जीव जंतुओं को अपना आहार बनाते हैं। पर्यावरण प्रेमी विनोद जुगलान और गढ़वाल विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान में तैनात डाॅ. भूपेंद्र भंडारी ने बताया कि इन दिनों गंगा तटीय क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो जाता है।
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