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Rishikesh News: साधकों को कराया यौगिक क्रियाओं का अभ्यास
Tue, 04 Mar 2025 01:22 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Tue, 04 Mar 2025 01:22 AM IST
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मुनि की रेती स्थित जीएमवीएन गंगा रिजॉर्ट में गढ़वाल मंडल विकास निगम और पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन योगाचार्यों ने योग साधकों को योगाभ्यास कराया।
निरामय योगम रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक डॉ. उर्मिला पांडे ने कहा कि काॅस्मिक हीलिंग से किसी भी बीमारी को समय से पहले रोग बनने से रोका जा सकता है। इसमें जो औरा स्कैन करते हैं, इससे पता चल जाता है कि शरीर के अंदर समस्या क्या है।
सूक्ष्म शरीर के जो चक्र हैं उन चक्रों को प्रदूषित करने वाली नकारात्मक ऊर्जा को काॅस्मिक हीलिंग से बाहर निकाला जाता है। काॅस्मिक हीलिंग यूनिवर्स से ऊर्जा प्राप्त करने की ऐसी तकनीक है जो शरीर के अंदर उत्पन्न होने वाले रोग की जड़ को पहचान कर उनकी नकारात्मकत्ता को समाप्त कर लेती है। काॅस्मिक हीलिंग का सकारात्मक प्रभाव हमारे शरीर व मस्तिष्क पर पड़ता है।
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काॅस्मिक ऊर्जा व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं वरन यूनिवर्स से व्यक्ति में आती है। यम, नियम, तप, सहज शक्ति एवं धैर्य के रूप में जो आत्मबल हम अपने अंदर विकसित करते हैं, वही आध्यात्म है। महायोगी जीतानंद महाराज ने कहा कि आत्मरक्षा सिद्ध योग साधना प्राचीन भारतीय योग का पारंपरिक ज्ञान है, जिसे दुनिया के अन्य देशों ने मार्शल आर्ट, कुम्फो, कराटे आदि नाम दिया है जो कि मूल रूप से भारतीय योग का मौलिक स्वरूप है।
दून योगपीठ देहरादून के संस्थापक योगाचार्य डाॅ. विपिन जोशी ने कहा कि उत्तराखंड को योग वेलनेस का हब बनाने का लक्ष्य लेकर वह अभियान चला रहे हैं, जिससे रिवर्स पलायन को बढ़ावा मिलेगा। श्री गुरु रामराय विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के संकाय अध्यक्ष प्रो. कंचन जोशी ने कहा कि आसन योग का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। आसन शारीरिक दृढ़ता तथा मानसिक स्थिरता प्रदान करने वाला ऋषि मुनियों की ओर से दिया गया वरदान है।
योगाचार्य कपिल संघी ने प्राणायाम के बारे में बताया कि श्वास लेने और छोड़ने के बिना मनुष्य का जीवन संभव नहीं है। भौतिक रूप में अधिक ऊर्जा गहरी लंबी श्वास लेकर और छोड़कर उत्पन की जा सकती है। इस मौके पर जीएमवीएन प्रबंध निदेशक विशाल मिश्रा, महाप्रबंधक प्रशासन विप्रा त्रिवेदी, महाप्रबंधक पर्यटन दयानंद सरस्वती, एसपीएस रावत, विश्वनाथ बेंजवाल, चिंतामणी भट्ट, रघुवीर सिंह राणा आदि मौजूद रहे।
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निरामय योगम रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक डॉ. उर्मिला पांडे ने कहा कि काॅस्मिक हीलिंग से किसी भी बीमारी को समय से पहले रोग बनने से रोका जा सकता है। इसमें जो औरा स्कैन करते हैं, इससे पता चल जाता है कि शरीर के अंदर समस्या क्या है।
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सूक्ष्म शरीर के जो चक्र हैं उन चक्रों को प्रदूषित करने वाली नकारात्मक ऊर्जा को काॅस्मिक हीलिंग से बाहर निकाला जाता है। काॅस्मिक हीलिंग यूनिवर्स से ऊर्जा प्राप्त करने की ऐसी तकनीक है जो शरीर के अंदर उत्पन्न होने वाले रोग की जड़ को पहचान कर उनकी नकारात्मकत्ता को समाप्त कर लेती है। काॅस्मिक हीलिंग का सकारात्मक प्रभाव हमारे शरीर व मस्तिष्क पर पड़ता है।
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काॅस्मिक ऊर्जा व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं वरन यूनिवर्स से व्यक्ति में आती है। यम, नियम, तप, सहज शक्ति एवं धैर्य के रूप में जो आत्मबल हम अपने अंदर विकसित करते हैं, वही आध्यात्म है। महायोगी जीतानंद महाराज ने कहा कि आत्मरक्षा सिद्ध योग साधना प्राचीन भारतीय योग का पारंपरिक ज्ञान है, जिसे दुनिया के अन्य देशों ने मार्शल आर्ट, कुम्फो, कराटे आदि नाम दिया है जो कि मूल रूप से भारतीय योग का मौलिक स्वरूप है।
दून योगपीठ देहरादून के संस्थापक योगाचार्य डाॅ. विपिन जोशी ने कहा कि उत्तराखंड को योग वेलनेस का हब बनाने का लक्ष्य लेकर वह अभियान चला रहे हैं, जिससे रिवर्स पलायन को बढ़ावा मिलेगा। श्री गुरु रामराय विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के संकाय अध्यक्ष प्रो. कंचन जोशी ने कहा कि आसन योग का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। आसन शारीरिक दृढ़ता तथा मानसिक स्थिरता प्रदान करने वाला ऋषि मुनियों की ओर से दिया गया वरदान है।
योगाचार्य कपिल संघी ने प्राणायाम के बारे में बताया कि श्वास लेने और छोड़ने के बिना मनुष्य का जीवन संभव नहीं है। भौतिक रूप में अधिक ऊर्जा गहरी लंबी श्वास लेकर और छोड़कर उत्पन की जा सकती है। इस मौके पर जीएमवीएन प्रबंध निदेशक विशाल मिश्रा, महाप्रबंधक प्रशासन विप्रा त्रिवेदी, महाप्रबंधक पर्यटन दयानंद सरस्वती, एसपीएस रावत, विश्वनाथ बेंजवाल, चिंतामणी भट्ट, रघुवीर सिंह राणा आदि मौजूद रहे।