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धीमी पड़ी काम की रफ्तार, लंबा हुआ बजरंग सेतु का इंतजार,
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लक्ष्मणझूला पुल के पास बन रहे बजरंग सेतु का निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा है। पांच महीने में कार्यदायी संस्था पुल के दोनों ओर केवल गड्ढे ही खोद पाई है। लक्ष्मणझूला पुल पर आवाजाही बंद होने के बाद स्थानीय लोग भी बजरंग सेतु को जल्द तैयार करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक पुल का केवल नौ फीसदी कार्य ही पूरा हो पाया है। अगर मौजूदा गति से निर्माण कार्य चलता रहा तो पुल तैयार होने में कई साल का समय लग जाएगा।
2019 में आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट पर शासन ने लक्ष्मणझूूूला पुल को आवागमन के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके बाद आवागमन के लिए लक्ष्मणझूला पुल के विकल्प की मांग उठने लगी थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुल के पास चीन के कांच के पुल की तर्ज पर नया पुल बनाने के प्रस्ताव भेजा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जानकी पुल के उद्घाटन के अवसर पर बजरंग सेतु के निर्माण की भी घोषणा की थी। घोषणा के बाद लोनिवि नरेंद्र नगर की ओर से पुल की डीपीआर तैयार की गई थी। केंद्रीय सड़क निधि से बन रहे इस पुल के निर्माण का काम चंडीगढ़ की पी एंड आर इंफ्रा प्रोजेक्टस लिमिटेड को दिया गया है। निर्माण कार्य का मौजूदा हाल यह है कि पांच महीने बीत चुके हैं और कार्यदायी संस्था नदी के दोनों ओर टॉवर के लिए केवल गड्ढे ही खोद पाई है। काम की जो गति है उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुल के निर्माण में लंबा समय लग सकता है जबकि पुल की निर्माण कार्य की समाप्ति की तिथि चार जुलाई 2023 है।
ऐसा बनेगा पुल
नए पुल की लंबाई 132.30 मीटर और चौड़ाई 8.00 मीटर निर्धारित है। पुल के दोनों ओर आरसीसी टावर बनाए जाने हैं। लोगों के पैदल आवागमन के लिए दोनों ओर 1.50 मीटर चौड़ा रास्ता होगा। जो शीशे का बना होगा। पांच मीटर चौड़ाई में 2.50 मीटर दोनों ओर हल्के वाहनों के लिए आवागमन के लिए होगा।
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जल्द पुल निर्माण की उठ रही है मांग
16 अप्रैल को लोनिवि नरेेंद्र नगर की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी टिहरी की ओर से पुल पर आवाजाही रोकने के लिए सीओ नरेंद्र नगर और एसडीएम नरेंद्र नगर को आदेश दिए गए थे। आदेश मिलने के बाद प्रशासन ने पुल पर दोनों ओर से आवाजाही बंद कर दी थी। वहां पर दो पुलिस जवानों की ड्यूटी लगा दी थी। पुल पर आवाजाही बंद होने के बाद लक्ष्मणझूला (पौड़ी) क्षेत्र में पर्यटक और तीर्थयात्री नहीं पहुंच पा रहे हैं। भले ही स्थानीय प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था की गई है लेकिन वह भी नाकाफी है।
पुल निर्माण के दौरान के सिविल के काम से संबंधित कई जांच करनी पड़ती हैं। अभी तक नौ प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस सप्ताह से काम की गति में तेजी आएगी।
- रत्नेश सक्सेना, सहायक अभियंता लोनिवि नरेंद्र नगर
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2019 में आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट पर शासन ने लक्ष्मणझूूूला पुल को आवागमन के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके बाद आवागमन के लिए लक्ष्मणझूला पुल के विकल्प की मांग उठने लगी थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुल के पास चीन के कांच के पुल की तर्ज पर नया पुल बनाने के प्रस्ताव भेजा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जानकी पुल के उद्घाटन के अवसर पर बजरंग सेतु के निर्माण की भी घोषणा की थी। घोषणा के बाद लोनिवि नरेंद्र नगर की ओर से पुल की डीपीआर तैयार की गई थी। केंद्रीय सड़क निधि से बन रहे इस पुल के निर्माण का काम चंडीगढ़ की पी एंड आर इंफ्रा प्रोजेक्टस लिमिटेड को दिया गया है। निर्माण कार्य का मौजूदा हाल यह है कि पांच महीने बीत चुके हैं और कार्यदायी संस्था नदी के दोनों ओर टॉवर के लिए केवल गड्ढे ही खोद पाई है। काम की जो गति है उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुल के निर्माण में लंबा समय लग सकता है जबकि पुल की निर्माण कार्य की समाप्ति की तिथि चार जुलाई 2023 है।
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ऐसा बनेगा पुल
नए पुल की लंबाई 132.30 मीटर और चौड़ाई 8.00 मीटर निर्धारित है। पुल के दोनों ओर आरसीसी टावर बनाए जाने हैं। लोगों के पैदल आवागमन के लिए दोनों ओर 1.50 मीटर चौड़ा रास्ता होगा। जो शीशे का बना होगा। पांच मीटर चौड़ाई में 2.50 मीटर दोनों ओर हल्के वाहनों के लिए आवागमन के लिए होगा।
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जल्द पुल निर्माण की उठ रही है मांग
16 अप्रैल को लोनिवि नरेेंद्र नगर की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी टिहरी की ओर से पुल पर आवाजाही रोकने के लिए सीओ नरेंद्र नगर और एसडीएम नरेंद्र नगर को आदेश दिए गए थे। आदेश मिलने के बाद प्रशासन ने पुल पर दोनों ओर से आवाजाही बंद कर दी थी। वहां पर दो पुलिस जवानों की ड्यूटी लगा दी थी। पुल पर आवाजाही बंद होने के बाद लक्ष्मणझूला (पौड़ी) क्षेत्र में पर्यटक और तीर्थयात्री नहीं पहुंच पा रहे हैं। भले ही स्थानीय प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था की गई है लेकिन वह भी नाकाफी है।
पुल निर्माण के दौरान के सिविल के काम से संबंधित कई जांच करनी पड़ती हैं। अभी तक नौ प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस सप्ताह से काम की गति में तेजी आएगी।
- रत्नेश सक्सेना, सहायक अभियंता लोनिवि नरेंद्र नगर